सामान्य ज्ञान
रामायण की सीख:गलत कामों से बचना चाहिए और अगर कोई गलत काम हो जाए तो उसके लिए तुरंत क्षमा मांगनी चाहिए
25 जनवरी को षट्तिला एकादशी:तिल से जुड़े 6 शुभ काम करने का पर्व, विष्णु पूजा के बाद तिल का करें दान और तिल का सेवन करें
बुद्ध की सीख: सुख-शांति चाहते हैं तो मोह से बचें:लोग अपनी चीजों से इतना मोह रखते हैं कि वे अपना लक्ष्य ही भूल जाते हैं
शरीर को एनर्जी देने में ये 5 हाइड्रेटिंग फूड्स करते हैं मदद
हाई बीपी को कम करने के लिए करें इन चीजों का सेवन
खराब लाइफस्टाइल, अनहेल्दी डाइट प्लान, जरूरत से ज्यादा स्ट्रेस जैसे तमाम फैक्टर्स हाई ब्लड प्रेशर के लिए जिम्मेदार साबित हो सकते हैं। आयुर्वेद के मुताबिक पोषक तत्वों से भरपूर कुछ चीजों को अपने डेली डाइट प्लान में शामिल करने से आपको हाई बीपी की समस्या से काफी हद तक छुटकारा मिल सकता है। आइए ऐसी ही कुछ खाने की चीजों के बारे में जानकारी हासिल करते हैं।
आज का इतिहास 17 जनवरी : आज ही के दिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की हुई थी पहली बैठक
वर्ष के 365 दिन इतिहास की किताब के 365 पन्ने हैं और हर पन्ने में उस तारीख की अच्छी बुरी घटनाएं दर्ज हैं। इस लिहाज से वर्ष का यह 17वां दिन भी कोई अपवाद नहीं है। इस दिन कई महत्त्वपूर्ण घटनाएं घटीं, जो इतिहास का हिस्सा बनीं। दुनिया में शांति और सुरक्षा की संरक्षक मानी जाने वाली सर्वोच्च संस्था संयुक्त राष्ट्र की प्रमुख इकाई सुरक्षा परिषद् की पहली बैठक 17 जनवरी 1946 को हुई और इस दिन को इतिहास का हिस्सा बना गई। सुरक्षा परिषद् संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंगों में से एक है।
Health Tips : खूब पानी पीने के बाद भी नहीं साफ हो रहा पेट...गुनगुने पानी में ये चीज मिलाकर पिएं...सुबह निकल जाएगी पेट की सारी गंदगी...
अक्सर हम पेट साफ न होने की समस्या से परेशान हो जाते हैं. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में गलत खानपान और स्ट्रेस वाले रूटीन की वजह से पेट से जुड़ी समस्याएं होना आम हो गई हैं. खासतौर पर पेट का साफ न होना एक गंभीर समस्या बन जाता है. कई बार हम दिनभर खूब पानी पीते हैं, लेकिन फिर भी पेट पूरी तरह से साफ नहीं होता. ऐसे में पेट साफ करने के लिए क्या करें? कब्ज से कैसे छुटकारा पाएं? क्या सुबह फ्रेश होने के उपाय हैं जो नेचुरल तरीके से पेट की गंदगी को बाहर निकालने में मदद करें? अगर आप भी कब्ज के शिकार हैं और चाहते हैं कि सुबह पेट जल्दी साफ हो, तो हम आपके लिए एक ऐसा कारगर घरेलू लेकर आए हैं, जो आसानी से पेट की सारी गंदगी को साफ करता है. दिन में 2 बार गुनगुने पानी के साथ कुछ प्राकृतिक चीजें मिलाकर पीने से आपको फायदा हो सकता है.
काला नमक और हींग को पेट के लिए माना जाता है अमृत समान
काला नमक और हींग का इस्तेमाल खाना बनाने के लिए किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं इनका एक साथ सेवन सेहत के लिए बेहद लाभकरी है। खासकर पेट से जुड़ी समस्याओं में ये काफी लाभप्रद माने जाते हैं। सुबह के समय खाली पेट काला नमक और हींग का पानी पीना काफी फायदेमंद माना गया है। चलिए जानते हैं इनका सेवन सेहत से जुड़ी किन परेशानियों में कारगर है?
Health Tips : शराब तो छोड़िए, लिवर के लिए ये 5 फूड्स भी तेजाब से कम नहीं...खाते ही गलने लगता है Liver..
शराब नहीं पीने के बावजूद भी आपका लिवर सड़ सकता है. यदि आप इन 5 फूड्स का सेवन बहुत ज्यादा कर रहे हैं. लिवर डैमेज होने मुख्य कारण व्यक्ति के खानपान की आदतें होती है. जिसमें शराब के अलावा भी कई फूड्स आइटम शामिल है, जिसे आप रोज खा रहे हैं. लिवर शरीर का एक ऐसा अंग है, जो अकेले 500 से ज्यादा काम करता है. साथ ही यह खुद को रिपेयर करने में भी सक्षम होता है.
सूर्य इस अस्तित्व के सौर-मंडल का काम-केंद्र है, इसी कारण जिसमें भी जीवन है, प्राण है, उसको सूर्य की रोशनी, सूर्य की गर्मी की आवश्यकता है “ओशो”
ओशो- सूर्य पर संयम संपन्न करने से संपूर्ण सौर-ज्ञान की उपलब्धि होती है। यह सूत्र थोड़ा जटिल है- अपने आप में यह सूत्र जटिल नहीं है, किंतु व्याख्या करने वालों के कारण यह सूत्र जटिल हो गया है।
पंतजलि की व्याख्या करने वाले सभी व्याख्याकार इस सूत्र के विषय में ऐसी व्याख्या करते हैं, जैसे पंतजलि किसी बाहर के सूर्य की बात कर रहे हों। पंतजलि बाह्य सूर्य की बात नहीं कर रहे हैं; पंतजलि उसकी बात
ज्योतिषी तो है नहीं, और उन्हें ज्योतिष में कोई रुचि भी नहीं है। उनकी रुचि मनुष्य में है। उनकी रुचि मनुष्य की चेतना का नक्शा तैयार करने में है। और
सूर्य मनुष्य से बाहर नहीं है।
योग की भाषा में मनुष्य एक लघु ब्रह्मांड है। सूक्ष्म ढंग से मनुष्य एक छोटा सा ब्रह्मांड है, मनुष्य एक छोटे से अस्तित्व में सघन रूप से समाया हुआ है। यह जो ब्रह्मांड है, यह जो संपूर्ण अस्तित्व है, यह और कुछ नहीं मनुष्य का विस्तार ही है। यह योग की भाषा है : लघु ब्रह्मांड व संपूर्ण ब्रह्मांड । जो कुछ बाहर अस्तित्व रखता है, ठीक वही मनुष्य के भीतर भी अस्तित्व रखता है।
मनुष्य के भीतर भी सूर्य छिपा हुआ है; बाहर के चाँद की ही भाँति मनुष्य के भीतर भी चाँद छिपा हुआ है। और पंतजलि का रस इसी में है कि वे अंतर्जगत के आंतरिक व्यक्तित्व का संपूर्ण भूगोल हमें दे देना चाहते हैं। इसलिए जब वे कहते हैं कि – ‘भुवन ज्ञानम् सूर्ये संयमात।’ – सूर्य पर संयम संपन्न करने से सौर ज्ञान की उपलब्धि होती है।’ तो उनका संकेत उस सूर्य की ओर नहीं है जो बाहर है। उनका मतलब उस सूर्य से है जो हमारे भीतर है।
हमारे भीतर सूर्य कहाँ है? हमारे अंतस के सौर-तंत्र का केंद्र कहा है? वह केंद्र ठीक प्रजनन-तंत्र की गहनता में छिपा हुआ है। इसीलिए कामवासना में एक प्रकार की ऊष्णता, एक प्रकार की गर्मी होती है। जानवरों के लिए कहा जाता है कि जब भी कोई स्त्री-पशु गर्भाधान के लिए तैयार होती है, तो हम कहते हैं कि – शी इज़ इन हीट। यह मुहावरा एकदम ठीक है।
होता है। इसीलिए तो कामवासना व्यक्ति को इतना ऊष्ण और उत्तेजित कर देती है। जब कोई व्यक्ति कामवासना में उतरता है तो वह उत्तप्त से उत्तप्त होता चला जाता है। व्यक्ति कामवासना के प्रवाह में एक तरह से ज्वर-ग्रस्त हो जाता है, पसीने से एकदम तर-बतर हो जाता है, उसकी श्वास भी अलग ढंग से चलने लगती है। और उसके बाद व्यक्ति थककर सो जाता है।
जब व्यक्ति कामवासना से थक जाता है तो तुरंत भीतर चंद्र ऊर्जा सक्रिय हो जाती है। जब सूर्य छिप जाता है तब चंद्र का उदय होता है। इसीलिए तो काम-क्रीड़ा के तुरंत बाद व्यक्ति को नींद आने लगती है। सूर्य ऊर्जा का काम समाप्त हो चुका, अब चंद्र ऊर्जा का कार्य प्रारंभ होता है।
केंद्र है। उस सूर्य ऊर्जा पर संयम केंद्रित करने से, व्यक्ति भीतर के संपूर्ण सौर-तंत्र को जान ले सकता है। काम-केंद्र पर संयम करने से व्यक्ति काम के पार जाने में सक्षम हो जाता है। काम-केंद्र के सभी रहस्यों को जान सकता है। लेकिन बाहर के सूर्य के साथ उसका कोई भी संबंध नहीं है।
लेकिन अगर कोई व्यक्ति भीतर के सूर्य को जान लेता है तो उसके प्रतिबिंब से वह बाहर के सूर्य को भी जान सकता है। सूर्य इस अस्तित्व के सौर-मंडल का काम-केंद्र है। इसी कारण जिसमें भी जीवन है, प्राण है, उसको सूर्य की रोशनी, सूर्य की गर्मी को आवश्यकता है। जैसे कि वृक्ष अधिक से अधिक ऊपर जाना
की अपेक्षा अफ्रीका में वृक्ष सबसे अधिक ऊँचे हैं। कारण अफ्रीका के जंगल इतने घने हैं और इस कारण वृक्षों में वापस में इतनी अधिक प्रतियोगिता है कि अगर वृक्ष ऊपर नहीं उठेगा तो सूर्य की किरणों तक पहुँच ही नहीं पाएगा, उसे सूर्य की रोशनी मिलेगी ही नहीं। और अगर सूर्य की रोशनी वृक्ष को नहीं मिलेगी तो वह मर जाएगा। इस तरह से सूर्य वृक्ष को उपलब्ध न होगा और वृक्ष सूर्य को उपलब्ध न होगा, वृक्ष को सूर्य की जीवन ऊर्जा मिल ही न पाएगी।
जैसे सूर्य जीवन है; वैसे ही कामवासना भी जीवन है। इस पृथ्वी पर जीवन सूर्य से ही है, और ठीक इसी तरह से कामवासना से ही जीवन जन्म लेता है- सभी प्रकार के जीवन का जन्म काम से ही होता है।
अफ्रीका में वृक्ष अधिक से अधिक ऊँचे जाना चाहते हैं, ताकि वे सूर्य को उपलब्ध हो सकें और सूर्य उन्हें उपलब्ध हो सके। इन वृक्षों को ही देखो। जिस तरह से वृक्ष इस ओर हैं- यह पाइन के वृक्ष, ठीक वैसे ही वृक्ष दूसरी ओर भी हैं- और उस तरफ के वृक्ष छोटे ही रह गए हैं। इस तरह के वृक्ष ऊपर छोटे ही रह गए हैं। इस तरह के वृक्ष ऊपर ऊपर बढ़ते ही चले जा रहे हैं। क्योंकि इस ओर सूर्य की किरणें अधिक पहुँच रही हैं, दूसरी ओर सूर्य की किरणें अधिक नहीं पहुँच पा रही हैं।
काम भीतर का सूर्य है, और सूर्य सौर-मंडल का काम-केंद्र है। भीतर के सूर्य के प्रतिबिंब के माध्यम से व्यक्ति बाहर के सौर-तंत्र का ज्ञान भी प्राप्त कर सकता है, लेकिन बुनियादी बात तो आंतरिक सौर-तंत्र को
ध्यान रहे, मेरा जोर इसी बात पर रहेगा कि पतंजलि आंतरिक भूमि के मानचित्र ही बना रहे हैं। और निस्संदेह यह केवल सूर्य से ही प्रारंभ हो सकता है, क्योंकि सूर्य हमारा केंद्र है। सूर्य लक्ष्य नहीं है, बल्कि केंद्र है। परम नहीं है, फिर भी केंद्र तो है। हमको उससे भी ऊपर उठना है, उससे भी आगे निकलना है, फिर भी यह केवल प्रारंभ ही है। यह अंतिम चरण नहीं है, यह प्रारंभिक चरण ही है। यह ओमेगा नहीं है, अल्फा है।
जब पतंजलि हमें बताते हैं कि संयम को उपलब्ध कैसे होना; करुणा में, प्रेम में व मैत्री में कैसे उतरना; करुणावान कैसे होना, प्रेमपूर्ण होने की क्षमता कैसे अर्जित करनी; तब वे आंतरिक जगत में पहुँच जाते हैं। पतंजलि की पहुँच अंतर-अवस्था के पूरे वैज्ञानिक विवरण तक है।
‘ सूर्य पर संयम संपन्न करने से, संपूर्ण सौर-ज्ञान की उपलब्धि होती है।’
इस पृथ्वी के लोगों को दो भागों में विभक्त किया जा सकता है, सूर्य-व्यक्ति और चंद्र-व्यक्ति, या हम उन्हें यांग और यिन भी कह सकते हैं। सूर्य पुरुष का गुण है; स्त्री चंद्र का गुण है। सूर्य आक्रामक होता है, सूर्य सकारात्मक है; चंद्र ग्रहणशील होता है, निष्क्रिय होता है।
इन दो रूपों मे विभक्त किया जा सकता है। और हम अपने शरीर को भी सूर्य और चंद्र में विभक्त कर सकते हैं; योग ने इसे इसी भाँति विभक्त किया है।
योग ने तो शरीर को इतने छोटे-छोटे रूपों में विभक्त किया है कि श्वास तक को भी बाँट दिया है। एक नासापुट में सूर्यगत श्वास है, तो दूसरे में चंद्रगता वास है जब व्यक्ति क्रोधित होता है, तब वह सूर्य के नासापुट से श्वास लेता है। और अगर शांत होना चाहता है तो उसे चंद्र नासापुट से श्वास लेनी होगी।
योग में तो संपूर्ण शरीर को ही विभक्त कर दिया गया है : मन का एक हिस्सा पुरुष है, मन का दूसरा हिस्सा स्त्री है। और व्यक्ति को सूर्य से चंद्र की ओर बढ़ना है, और अंत में दोनों के भी पार जाना है, दोनों का अतिक्रमण करना है।
पर्यटन मंत्रालय ने महाकुंभ 2025 को वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में बढ़ावा देने के लिए कई अहम कदम उठाए
नई दिल्ली
पर्यटन मंत्रालय महाकुंभ 2025 को न केवल आध्यात्मिक समागमों के लिए बल्कि वैश्विक पर्यटन के लिए भी एक ऐतिहासिक आयोजन बनाने के लिए तैयार है। इस पावन अवसर का जश्न मनाने के लिए मंत्रालय घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई पहल कर रहा है। यह महाकुंभ दुनिया के सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक समागमों में से एक है, जो हर 12 साल में भारत के चार स्थानों में से एक पर आयोजित किया जाता है। महाकुंभ -2025 उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 13 जनवरी को शुरू होगा और 26 फरवरी, 2025 तक चलेगा। इसे पूर्ण कुंभ भी कहा जाता है। इस विशाल आयोजन में दुनिया भर से लाखों भक्तों, पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के आने की उम्मीद है। यह भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक विरासत और पर्यटन क्षमता को प्रदर्शित करने का एक अनूठा अवसर है।
पर्यटन मंत्रालय इस महाकुंभ में 5000 वर्ग फीट का विशाल अतुल्य भारत मंडप स्थापित कर रहा है, जो विदेशी पर्यटकों, विद्वानों, शोधकर्ताओं, फोटोग्राफरों, पत्रकारों, प्रवासी समुदाय, भारतीय प्रवासियों आदि को सुविधा प्रदान करेगा। यह मंडप आगंतुकों को एक अनूठा अनुभव प्रदान करेगा, जिसमें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और कुंभ मेले के महत्व को दर्शाया जाएगा। इस मंडप में देखो अपना देश – लोगों की पसंद का सर्वेक्षण भी होगा, जिसमें आगंतुक भारत में अपने पसंदीदा पर्यटन स्थलों के लिए वोट कर सकेंगे।
इस महाकुंभ में शामिल होने वाले विदेशी पर्यटकों, प्रभावशाली हस्तियों, पत्रकारों और फोटोग्राफरों की विशिष्ट जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्यटन मंत्रालय ने एक समर्पित टोल-फ्री टूरिस्ट इन्फोलाइन (1800111363 या 1363) शुरू की है। अंग्रेजी और हिंदी के अलावा टोल फ्री इन्फोलाइन अब दस (10) अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं और तमिल, तेलुगु, कन्नड़, बंगाली, असमिया और मराठी सहित भारतीय स्थानीय भाषाओं में भी काम कर रही है। यह सेवा अंतर्राष्ट्रीय आगंतुकों की भागीदारी को आसान और अधिक सुखद बनाने के लिए सहायता, सूचना और मार्गदर्शन प्रदान करेगी।
पर्यटन मंत्रालय ने आगामी महाकुंभ-2025 को चर्चित करने के लिए एक बड़ा सोशल मीडिया अभियान शुरू किया है। लोगों को महाकुंभ के इस आयोजन से जुड़े अपने अनुभव और आनंद के पल साझा करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु #महाकुंभ2025 और #स्पिरिचुअलप्रयागराज जैसे विशेष हैशटैग का इस्तेमाल किया जा रहा है। सोशल मीडिया प्रतियोगिताएं और आईटीडीसी, यूपी टूरिज्म तथा अन्य संगठनों के साथ सहयोगात्मक पोस्ट इस आयोजन की दृश्यता को फैलाएंगे और लोगों को इस आध्यात्मिक उत्सव को देखने के लिए आमंत्रित करेंगे।
पर्यटन मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी), आईआरसीटीसी और आईटीडीसी जैसे प्रमुख पर्यटन हितधारकों के साथ मिलकर कई तरह के क्यूरेटेड टूर पैकेज और लग्जरी आवास विकल्प पेश किए हैं। आईटीडीसी ने प्रयागराज के टेंट सिटी में 80 लग्जरी आवास बनाए हैं, जबकि आईआरसीटीसी तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए लग्जरी टेंट भी उपलब्ध करा रहा है। ये पैकेज एक डिजिटल ब्रोशर में उपलब्ध होंगे, जिसे अधिक से अधिक प्रचार के लिए भारतीय मिशनों और भारत पर्यटन कार्यालयों में व्यापक रूप से प्रसारित किया गया है।
इस महाकुंभ में भाग लेने वाले पर्यटकों के लिए निर्बाध यात्रा सुनिश्चित करने के लिए पर्यटन मंत्रालय ने देश के कई शहरों से प्रयागराज तक हवाई सेवाएं बढ़ाने के लिए एलायंस एयर के साथ साझेदारी की है। इससे घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय श्रद्धालुओं के लिए महाकुंभ में आना-जाना आसान हो जाएगा।
इस दुर्लभ अवसर का लाभ उठाने के लिए पर्यटन मंत्रालय महाकुंभ की भव्यता और आध्यात्मिक तत्व को कैमरे में कैद करने के लिए बड़े पैमाने पर फोटोशूट और वीडियोग्राफी परियोजना शुरू करेगा। इन दृश्यों को अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय मीडिया प्लेटफॉर्म पर व्यापक रूप से साझा किया जाएगा, जिससे महाकुंभ की भव्यता का प्रदर्शन होगा और प्रयागराज की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गंतव्य के रूप में पर्यटन क्षमता पर जोर दिया जाएगा।
Hair Care Tips for Winter: इस तेल दूर करे बालों से डेंड्रफ की समस्या, जाने इस्तेमाल का तरीका और फायदे…
ठंड के मौसम में बालों की एक समस्या कॉमन होती है जिससे सभी बहुत ज़्यादा परेशान होते हैं और वो है डेंड्रफ की प्रॉब्लम . अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं तो आज हम आपको एक घरेलू नुस्खा बताएँगे. मेथी के दानों में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं.
सेब और अमरूद से कहीं ज्यादा मीठा और स्वादिष्ट होता है रामफल
रामफल हल्के नारंगी रंग का होता है और खाने में एकदम मीठा और स्वादिष्ट होता है। रामफल के स्वाद के आगे सेब और अमरूद का टेस्ट भी फीका लगेगा। रामफल नवंबर और दिसंबर महीने में ही मिलता है। आइये जानते हैं रामफल खाने के फायदों के बारे में।
बार-बार जकड़ लेती है सर्दी-जुकाम की समस्या, तो शुरू कर दें इन चीजों का सेवन
सर्दियों में अक्सर सर्दी, खांसी और जुकाम के मामले काफी ज्यादा बढ़ जाते हैं। इस तरह की समस्याओं से बचने के लिए आपको अपनी इम्यूनिटी को मजबूत बनाने की कोशिश में जुट जाना चाहिए। आयुर्वेद के मुताबिक रेगुलरली नियम से कुछ औषधीय गुणों से भरपूर चीजों का सेवन करने से न केवल आपकी इम्यूनिटी को बूस्ट किया जा सकता है बल्कि सर्दी, खांसी और जुकाम की समस्या को भी दूर भगाया जा सकता है।
क्या देसी घी कभी एक्सपायर होता है? उत्तर है हाँ… लेकिन कब?
देसी घी भारतीय रसोई की जान है. देसी घी डालने से खाने का स्वाद तो बढ़ जाता है और इसकी मनमोहक खुशबू भी पूरे घर में फैल जाती है. पूजा हो या घरेलू उपाय, इसका प्रयोग हर जगह किया जाता है. अब जब देसी घी इतना खास है तो स्वाभाविक है कि यह हर घर में पाया जाता है. कुछ लोग घर में देसी घी को बहुत अधिक स्टोक करके रखते हैं, लेकिन क्या देसी घी को लंबे समय तक स्टोर करके रखना सुरक्षित है या इसकी कोई एक्सपायरी डेट होती है? ये कुछ ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब ज्यादातर लोगों को नहीं पता और भ्रम बना रहता है. तो चलिए आज इसी बारे में बात करते हैं.
Hair Care Tips : ये आठ सुपरफूड बालों के लिए हैं वरदान, बालों को बनाएं घने, लंबे और शायनी ...
लंबे और घने काले बाल की चाहत हर लड़की की होती है. क्योंकि बालों की खूबसूरती से चेहरे की सुंदरता में भी चार चांद लग जाते हैं. पर आज के इस प्रदूषण भरे माहौल और अनहेलथी ख़ान पान के चलते बाल काफ़ी जल्दी ख़राब होने लगे हैं. ऐसे में हम आज आपको आठ ऐसे सुपरफूड के बारे में बताएँगे जो बालों के लिए बहुत ही ज़्यादा फायदेमंद होते हैं. इन सुपरफूड्स को डाइट में शामिल करके आप अपने बालों को न केवल मजबूत और शाइनी बना सकते हैं, बल्कि बालों के झड़ने और सफेद होने की समस्या से भी बच सकते हैं. बालों के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए ये सभी खाद्य पदार्थ पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और नियमित सेवन से बालों में सुधार आ सकता है.
रोजाना खाएं मुट्ठी भर गुड़-चना, शरीर को मिलेगी ताकत
खून की कमी को दूर करने के लिए अक्सर गुड़ और चने का सेवन करने की सलाह दी जाती है। गुड़ और चने का फूड कॉम्बिनेशन आपकी मसल और बोन हेल्थ के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है। इसके अलावा अगर आप अपनी वेट लॉस जर्नी को आसान बनाना चाहते हैं, तो गुड़ और चने को अपने डेली डाइट प्लान का हिस्सा बना लीजिए। गुड़ और चने मिलकर आपकी बॉडी के मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने में कारगर साबित हो सकते हैं।