संस्कृति
बछ बारस आज : माताओं ने अपने बेटे की लंबी आयु के लिए व्रत रखा, इस तरह करें पूजा …
जन्माष्टमी के चार दिन बाद यानी भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को माता अपने पुत्र की लंबी उम्र के लिए बछ बारस व्रत रखती है. यह पर्व राजस्थानी महिलाओं का लोकप्रिय पर्व है. 30 अगस्त को मनाया जा रहा है. इस दिन गेहूं से बने पकवान व कटी हुई सब्जी नहीं खाई जाती हैं. बाजरे या ज्वार का सोगटा और अंकुरित अनाज की कढ़ी एवं सूखी सब्जी बनाई जाती है.
इस बार सोमवती अमावस्या पर बन रहा शिव योग, स्नान दान का यह होगा शुभ मुहर्त, पितरों को प्रसन्न करने के लिए करें ये उपाय …
धार्मिक मत है कि सोमवती अमावस्या पर पवित्र नदी में स्नान और पूजा-अर्चना करने से साधक के सभी पाप खत्म हो जाते हैं. हिंदू धर्म में अमावस्या का काफी महत्व माना जाता है.और अमावस्या सोमवार के दिन पड़े तो महत्व दो गुना हो जाता है. पंचांग के अनुसार, इस बार भाद्रपद माह की अमावस्या 2 सितंबर दिन सोमवार को पड़ रही है. भाद्रपद माह की अमावस्या को भादो अमावस्या या भादी अमावस्या भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन पूजा, जप- तप, दान और पवित्र नदी में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. इस दिन स्नान, दान और पूजन करने से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार पर उनकी कृपा बरसती है.
जीवन में पाप का डर वास्तविक होना चाहिए : मुनिश्री प्रियदर्शी विजयजी
रायपुर । श्री संभवनाथ जैन मंदिर विवेकानंद नगर में आत्मोल्लास चातुर्मास 2024 की प्रवचनमाला में पाप भीरूता गुण पर व्याख्यान जारी है। बुधवार को तपस्वी मुनिश्री प्रियदर्शी विजयजी म.सा. ने कहा कि जीवन में पाप का डर वास्तविक रहना चाहिए, बनावटी नहीं।
कभी भी फूंक मारकर नहीं बुझाना चाहिए दीया, यहां जाने ऐसा करने से क्या होता है…
रोशनी से अंधकार दूर होता है. रोशनी सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव करती है. रोशनी नई सोच को जन्म देती है. यही वजह है कि हमारे हिन्दू धर्म में दीया जलाना सबसे शुभ माना गया है. एक दीया घर की डहरी यानी चौखट पर रखा जाता है, ताकि सकारात्मक ऊर्जा का घर में प्रवाह होता रहे. हर पूजा-पाठ में सबसे पहले दीया लगाया जाता है, और इसके साथ ही भगवान का आव्हान किया जाता है. प्रार्थना की जाती है, हे भगवन आप पूजा स्थल पर विराजित हों. पूजा सफल करें. घर में सदा के लिए अपना वास करें.
मथुरा के बाद डोंगरगढ़ प्रसिद्धः गोविन्दोत्सव
मां चम्लेश्वरी देवी की पावन नगरी एवं नए छत्तीसगढ़ राज्य के डोंगरगढ़ में प्रतिवर्ष अनेक धार्मिक उत्सव धूमधाम से मनाए जाते हैं। इनमें "गोविन्दोत्सव भी सर्वप्रमुख एवं प्राचीन उत्सव है गीविन्दोव्यय अंचल के नागरिकों द्वारा पिछले 100 वर्षो से लगातार उत्याहपुर्वक मनाया जा रहा है। इस उत्सव को प्रारंभ करने का श्रेय बाबूराव अन्नाजी को हैं. उनके पश्चात मदन गोपाल । गट्टानी ने लगभग 14 वर्षों तक इस उत्सव का संचालन किया, और उनका देहावसान होने के बाद उनके सुपुत्र रामानंद गट्टानी ने लगभग 40 वर्षों तक लगातार सफलतापूर्वक इसका संचालन किया। रामानंद गट्टानी के देहावसान के पश्चात डोंगरगढ़ के नागरिकों ने एक राय से डोंगरगढ़ के इस अनुठे, प्राचीन, आत्मीय लगाव वाले पारम्परिक गोविन्दा उत्सव के संचालन का गुरुत्तर दायित्व उनके ज्येष्ठ सुपुत्र प्रकाशचंद गट्टानी को सौपा।
नर और मादा तोप की सलामी : श्रीकृष्ण का एकमात्र मंदिर जहां निभाई जाती है ये अनोखी परंपरा
क्या आपको ऐसी जगह के बारे में मालूम है जहां जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण को 21 तोपों की सलामी दी जाती है. भगवान श्रीकृष्ण के जितने रूप, उतने ही मंदिर और हर मंदिर से जुड़ा कोई ना कोई दिलचस्प किस्सा होता है. हम जिस भगवान कृष्ण के मंदिर के बारे में बात कर रहे हैं वह राजस्थान में स्थित है और यह मंदिर लगभग 400 साल पुराना बताया जाता है. राजस्थान के नाथद्वारा शहर में स्थापित श्रीनाथ जी मंदिर में जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण को 21 तोपों की सलामी दी जाती है. यहां साल भर भगवान के बाल स्वरूप के दर्शन करने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लाखों भक्त इस मंदिर में आते रहते हैं.
कृष्ण लला को अति प्रिय है मुरली, यहां जाने मुरली के उपाय जिससे घर और कार्यस्थल पर आएगी सुख-समृद्धि
नई दिल्ली। सोमवार को दुनियाभर में भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जाएगा। भक्त अपने भगवान के जन्मोत्सव मनाने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, आतुर हैं। यूं तो कृष्ण के अनेको नाम हैं। मगर, इन नामों में एक नाम है मुरलीधर या मुरलीवाले या मुरली मनोहर। मुरली, कान्हा को बहुत प्रिय है। उनकी मुरली की धुन में तो गोकुल झूम उठता था। क्या मनुष्य, क्या जीव-जंतु, सब मुरली की धुन में मंत्रमुग्ध होकर झूमते थे। । कहते हैं- कान्हा की मुरली से मुरझाए फूल खिल उठते थे। हरियाली छा जाती थी। लोग भूख-प्यास, घर-द्वार भूलकर, बस मुरली की धुन में रम जाते थे। जन्माष्टमी के अवसर आप मुरली के उपाय कर लें तो जिंदगी में खुशहाली आते देर नहीं लगेगी।
दक्षिण भारत की ‘द्वारिका’: 5000 साल पुराना एक ऐसा मंदिर, जहां होती है भगवान कृष्ण के बाल रूप की पूजा,
दक्षिण भारत की ‘द्वारिका’: गुरुवायूर मंदिर (गुरुपवनपुरी) केरल के त्रिशुर जिले के गुरुवयूर शहर में एक प्रसिद्ध मंदिर है. यह मंदिर भगवान विष्णु (गुरुवायुरप्पन) को समर्पित है, लेकिन उनके सबसे लोकप्रिय रूप को कृष्ण के नाम से जाना जाता हैं. केरल का सबसे समृद्ध मंदिर, गुरुवायूर मंदिर भगवान गुरुवायुरप्पन को समर्पित है. गुरुवायूर केवल केरल में ही प्रसिद्ध नहीं बल्कि पूरे भारत वर्ष के प्रमुख तीर्थ स्थानों में से एक है.
Krishna Janmashtami 2024 पर जरूर करें ये उपाय, जीवन में बरसेगा सुख ही सुख …
जन्माष्टमी पवित्र और खुशियों भरा त्योहार है. बहुत से लोग इस शुभ दिन पर श्रीकृष्ण के बाल गोपाल स्वरूप की मूर्ति की घर के मंदिर में स्थापना करते हैं. उनकी ड्रेस, भोग, झुले आदि का ध्यान रखते हैं. इस दिन खासतौर पर उन्हें झुले पर बिठाकर झुला झुलाया जाता है. ऐसे में लोग उनके झुले को अलग और विशेष रूप से सजाते हैं. साथ ही लोग भगवान को खुश करने और उनकी कृपा पाने के लिए उनका अच्छे से ख्याल रखते हैं. तो चलिए आज हम आपको कुछ ऐसी वास्तु के उपाय बताते हैं, जिसे विशेषतौर पर जन्माष्टमी के दिन करके आप भगवान श्रीकृष्ण की असीम कृपा पा सकते हैं.
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी में इस बार बन रहा दुर्लभ संयोग, 5 हजार 251 साल पहले हुआ था ऐसा…
इस जन्माष्टमी घर ले आएं ये 5 चीजें, रहेगी हमेशा बरकत और सुख समृद्धि…
श्री कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर अब केवल दो दिन ही शेष है. भक्तों द्वारा जन्म उत्सव मनाने की तैयारियां जोर-जोर से की जा रही है. ऐसे में जन्माष्टमी के दिन यदि कुछ खास उपाय कर लिए जाएं, तो भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है. साथ ही कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती. इन उपायों को करने से सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है.
खीरे के बिना अधूरी है कृष्ण Janmashtami, खीरा खरीदते समय यह बात जरूर ध्यान रखें …
जन्माष्टमी (Janmashtami) पर भगवान श्रीकृष्ण के लड्डू गोपाल रूप की पूजा की जाती है. जन्माष्टमी पर खीरे की अहम भूमिका है. इसके बिना जन्माष्टमी की पूजा अधूरी मानी जाती है. मान्यताओं के अनुसार कृष्ण जन्माष्टमी (Janmashtami) के दिन खीरा चढ़ाने का विशेष महत्व है. श्रीकृष्ण का जन्म मध्य रात्रि में रोहिणी नक्षत्र में हुआ था. जिस वजह से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की पूजा रात में की जाती है. लड्डू गोपाल के जन्म के बाद उन्हें स्नान कराया जाता है, बाल गोपाल को नए वस्त्र पहना कर तैयार किया जाता है.
लड्डू गोपाल के वस्त्रों से सजा बाजार… बांसुरी, पगड़ी, पालने भक्तों को कर रहे आकर्षित…
भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव इस साल 26 अगस्त को मनाया जाएगा. ऐसे में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी चीजों और रंग-बिरंगी पोशाक से बाजार सज गया है. इसमें बांसुरी, पगड़ी, पालने और गोपालजी की मूर्तिंयों की मांग बनी हुई है. वहीं लाल, पीली, हरी, नीली, गुलाबी रंगों की पोशाक की मांग ज्यादा है.
भगवान कृष्ण की मनपसंद माखन मिश्री है बहुत फायदेमंद, यहां जाने इसे खाने से आपको कैसे मिलेंगे लाभ …
जन्माष्टमी, भगवान कृष्ण के जन्म के उत्सव मनाने का दिन। हर किसी के मन को मोह लेने वाले, अपनी बाल लीलाओं से मंत्रमुग्ध कर देने वाले, नटखट, माखन चोर, बंसी बजईया कृष्ण की लीलाओं को याद करने का दिन। इस दिन भगवान कृष्ण का अभिषेक कर, नए वस्त्र पहनाकर, झूला सजाकर उनके पसंदीदा माखन और मिश्री का भोग लगाया जाता है, क्योंकि ये उन्हें बहुत प्रिय हैं। अब जो भगवान को प्रिय हों, तो तय है कि उसमें कुछ विशेष तो होगा ही। अगर, आप भी रोजाना माखन और मिश्री का सेवन करते हैं, तो आपके शरीर को भी ढेरों फायदे होंगे। हमारे घरों में मक्खन बहुत ही अधिक बनाया जाता है।
Janmashtami Special Recipe : कृष्ण लला को लगाएं मेवा पाग का भोग, यहां जानें रेसिपी …
जन्माष्टमी का त्योहार आने वाला है और इसके लिए बाजार भी पूरी तरह से सज गए हैं। जगह जगह भगवान के पोषक, सजावट का सामान, दही हांडी, बांसुरी, मोर पंख और बहुत कुछ मिल रहा है। बाजार में जहां रौनक लग गई है वहीं घरों में भी लाला को भोग लगाने वाले पकवानों की लिस्टिंग शुरू हो गई है। अगर आप मीठे में कुछ नया बनाने का सोच रहे हैं तो आप मेवा पाग बना सकते हैं। आज हम आपके साथ इसी की रेसिपी शेयर करने वाले हैं।
कृष्ण जन्माष्टमी पर तीन दिन की मिल सकती है छुट्टी, तो इन जगहों पर घूमने का बनाएं प्लान
इस साल जन्माष्टमी 26 अगस्त सोमवार के दिन मनाई जा रही है. ऐसे में आप शनिवार, रविवार और सोमवार तीन दिन की छुट्टी आपको मिल सकती है. इस वीकेंड पर आप तीन दिन में अपने परिवार या दोस्तों के साथ इन जगहों पर घूमने का प्लान बना सकते हैं. जो धार्मिक के साथ मन को भी सूकुन देने वाली होगी. जन्माष्टमी एक खास दिन है. हिंदू धर्म का पालन कर रहे हर व्यक्ति के लिए ये दिन काफी खास होता है. इस दिन श्री कृष्ण का जन्म हुआ था. इस साल जन्माष्टमी की छुट्टी 26 तारीख, सोमवार को है. भारत की अलग-अलग जगहों पर जन्माष्टमी धूम-धाम से मनाई जाती है.
आज है संकष्टी चतुर्थी, जानें क्या होगा पूजा का शुभ मुहूर्त और चंद्र दर्शन का सही समय…
प्रत्येक महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित है और यह संकष्टी चतुर्थी के नाम से जानी जाती है भाद्रपद माह में यह तिथि आज 22 अगस्त को है इसे हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी, बहुला चौथ के नाम से भी जाना जाता है इस दिन संतान की सुख, समृद्धि के लिए माताएं व्रत रखती हैं इस व्रत के करने से संतान को खुशहाली, सफलता, संकटों से मुक्ति, समृद्धि प्राप्त होती है.