"लेखांकन में आए बदलाव विद्यार्थियों के लिए नई चुनौती" - लेखक अब्दुल करीम
रायपुर: शहर के गांधी चौक स्थित महंत लक्ष्मी नारायण दास महाविद्यालय में आज कॉमर्स विभाग के तत्वाधान में लेखांकन विषय पर एक महत्वपूर्ण सेमिनार का आयोजन किया गया इस आयोजन में शासकीय वल्लभाचार्य महाविद्यालय महासमुंद प्राचार्य एवं विख्यात लेखक अब्दुल करीम दुर्गा महाविद्यालय के प्राचार्य एस एस खनूजा तथा महंत लक्ष्मी नारायण दास महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर देवाशीष मुखर्जी की विशेष उपस्थिति रही आयोजन में उपस्थित छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए लेखक एवं प्राचार्य अब्दुल करीम साहब ने कहा की लेखांकन में आए बदलाव विद्यार्थियों के लिए एक नई चुनौती है
लेखांकन के बदलाव से काफी विस्तृत कार्य क्षेत्र निर्मित हुआ है उन्होंने जानकारी रखते हुए बताया कि प्राचीन काल में मनु संहिता में लाइन खींच कर लेखांकन का कार्य किया जाता रहा है उन्होंने लेखांकन के कार्य में उपयोग में आने वाले लाल कपड़ा और काली स्याही के महत्व को प्रतिपादित करते हुए बताया की लाल कपड़ा काफी धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण होता है इसलिए व्यापारी वर्ग और अन्य कार्यों में लाल कपड़ा का उपयोग किया जाता है किसी की बुरी नजर ना लगे इसलिए लेखांकन में व्यापारी काली स्याहि का उपयोग करते हैं उन्होंने महाजनी लेखन पद्धती के बारे में जानकारी दी और बताया कि भारत में पहले लेखांकन का कार्य कल्याणी सुब्रमण्यम अय्यर ने किया था
जिले लेखांकन का जनक माना जाता है और वर्ष 1890 में यह कार्य प्रिंसिपल एंड प्रैक्टिस बुक ऑफ कीपिंग के जरिए सामने आया था इसी तरह छत्तीसगढ़ में रायगढ़ में लेखांकन का कार्य लेखन पन्नालाल के कार्यों से सामने आता है जीके अग्रवाल बिलासपुर एवं रायपुर से गुप्ता वर्मा एवं महाजन लेखकों के द्वारा लिखी पुस्तक से लेखांकन का प्रथम कार्य सामने आता है उन्होंने बताया कि आप लेखांकन में खाता 31 दिसंबर को बंद नहीं किया जाता बल्कि 31 मार्च को क्लोजिंग होती है यह जरूरी बदलाव है इसे सभी लेखांकन से जुड़े विशेषज्ञों को जानना चाहिए वही दुर्गा महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य एस खनूजा ने कहा की लेखांकन एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और सिलेबस में जिस तरह से विस्तार हुआ है
वह विद्यार्थियों के लिए एक चुनौती पूर्ण हो गया है अच्छे से पढ़ाई करना विद्यार्थियों को बेहद जरूरी है क्योंकि परीक्षा में तैयारी करना और तैयारी कर करके आना दोनों में काफी प्रभाव पड़ता है महंत कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर देवाशीष मुखर्जी ने अपने शब्द रखते हुए बताया की लेखांकन के जरिए कई ऐतिहासिक महत्व की बातें लिखी जा रही है और पूरा एक सिस्टम लेखांकन के कार्यों पर निर्भर करता है आर्थिक जगत के समस्त कार्य लेखांकन के माध्यम से हो पाते हैं यह काफी महत्वपूर्ण है और यह विद्यार्थियों के करियर की दृष्टि से भी काफी जरूरी है इसी कड़ी को ध्यान में रखते हुए सेमिनार आयोजित किया गया जिसमें विशेषज्ञ विस्तार से बातचीत रखी है उम्मीद है कि विद्यार्थी आत्मसात कर अपने भविष्य को एक नई दिशा में लेकर जाने में सफल हो पाएंगे इस कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर जयचंद्र ने किया और पूरे कार्यक्रम की संरचना प्रोफेसर शांतनु पाल एवं प्रोफेसर ललित मोहन वर्मा के द्वारा तैयार की गई थी