छत्तीसगढ़ / जांजगीर-चाम्पा

चट्टान आ गया बीच वरना राहुल कब से बाहर आ गया होता छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा रेस्क्यू राहुल कैसे गिरा था बोर में पढ़े पूरा किस्सा

 
रायपुर 13 जून 2022/ जरा सी चूक कब किसी को मुसीबत में डाल दे, यह कहा नहीं जा सकता। आज जांजगीर-चाम्पा जिले का यह गाँव पिहरीद देश भर में सुर्खियों में है। यहाँ रहने वाले लाला साहू पेशे से किसान है और घर पर ही टेंट हाउस के साथ डीजे का व्यवसाय भी करते हैं। इन्होंने अपने घर के पीछे अपनी जमीन पर बोर कराई थी। बोर में पानी नहीं निकल पाने की वजह से पास ही एक दूसरा बोर भी कराया था। लाला साहू ने वह बोर जिसमें पानी नहीं निकला,उस बोर को पूरी तरह से शायद ढका नहीं! बोर खुला हुआ था। इनके घर में दो बच्चे भी है। एक राहुल, दूसरा ऋषभ। राहुल 11 साल का है और ऋषभ 8 साल का। घर के पीछे बहुत बड़ी खुली जगह भी है। जहाँ राहुल,ऋषभ और अन्य बच्चे खेलते हैं। बताया जा रहा है कि 10 जून को अचानक ही एक घटना घट गई। दोपहर में खेलते हुए राहुल बोर में नीचे जा गिरा। जैसे ही यह बात परिजनों तक पहुँची। हंगामा सा मच गया। राहुल खुले हुए बोर में लगभग 60 फीट नीचे गिरकर फस गया। आनन-फानन गॉंव में यह खबर आग की तरह फैल गई और सहायता के लिए सभी ने पुलिस प्रशासन तक बात पहुचा कर मदद मांगी। घटना की खबर मिलते ही जिले के कलेक्टर श्री जितेन्द्र कुमार शुक्ला और पुलिस अधीक्षक श्री विजय अग्रवाल सहित तमाम अधिकारियों का दल घटनास्थल पहुँचा। सबसे पहले बोरवेल में गिरे बच्चे को सुरक्षित रखने की दिशा में कदम उठाया गया। ऑक्सीजन की व्यवस्था कर तत्काल राहुल तक पहुचाई गई। विशेष कैमरे लगाकर राहुल की हर गतिविधियों पर नज़र रखी गई और  उसे खाने पीने के सामान भी दिए गए। यह घटना कोई सामान्य घटना नहीं थी। जिला प्रशासन द्वारा बच्चे को बाहर निकालने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ सहित आवश्यकता अनुसार सभी से संपर्क बनाया गया। आसपास की भीड़ हटाने पुलिस फोर्स लगाकर बेरिकेडिंग की गई। समय रहते बच्चे को ऊपर लाने का भी प्रयास किया गया। जिला प्रशासन की मांग पर रेस्कयू के लिए बड़ी-बड़ी मशीनों के साथ एक्सपर्ट भी बुलाए गए। भिलाई,कटक,कोरबा, झारखण्ड,रायगढ़,बिलासपुर सहित अन्य स्थानों से भी राहत एवं बचाव के लिए मशीनें तथा वाहन मांगी गई।  एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के पहुचने के बाद सैकड़ो कोशिशें की गई कि राहुल किसी तरह रस्सी, हुक को पकड़ ले।   कई अलग-अलग जुगाड़ भी बनाये गए। खाने के सामान देकर उसे पकड़कर ऊपर लाने की योजना बनी। गुजरात से रोबोट बुलाकर भी निकालने की कोशिशें जारी रही। एक तरफ बोर के गहराई में गिरे राहुल के समानांतर गड्ढा कर सुरंग बनाकर राहुल तक पहुँचने की रणनीति बनी और अमल में लाया गया, वही दूसरी ओर कभी मैनुअल क्रेन में रस्सी के सहारे राहुल को ऊपर खीचने का प्रयास किया गया। 10 जून की रात लगभग 10 बजे से  200 से अधिक बार बोरवेल के नीचे कभी रस्सी, तो कभी पाइप या दूसरे जुगाड़ के माध्यम से राहुल को ऊपर लाने का प्रयास किया जाता रहा। कभी केले,कभी जूस तो अन्य खाद्य सामग्रियों के साथ राहुल को ऊपर लाने की कोशिश की गई।  न ही उसने रस्सी पकड़ी और न ही उसने किसी की बात समझी। वह खाने पीने की वस्तुओं को लेकर  खा तो लेता है, मग़र बोरवेल से ऊपर आने का प्रयास ही नहीं करता है। 
11 साल के राहुल की इस गतिविधियों को देखकर बचाव के एक्सपर्ट भी हैरान और निराश रहे। आखिरकार जब बात नहीं बनी तो बोरवेल की गहराई तक गड्ढा कर सुरंग बनाकर ही राहुल को बाहर निकालने का निर्णय लिया गया। भारी मशक्कत के बाद बड़ी-बड़ी पोकलेन मशीनों,जेसीबी से गड्ढा किया गया। अब सुरंग बनाने का काम तो चल रहा है लेकिन इसके साथ ही बोरवेल में उसका मनोबल बढ़ाने और खाद्य सामग्रियां पहुचाकर  बाहर निकालने की जुगत अब भी लगाई जा रही है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल बोरवेल में फंसे राहुल को बाहर लाने के लिए स्वयं पल -पल की जानकारी ले रहे हैं और जिला प्रशासन को भी राहुल को सकुशल बाहर निकालने के निर्देश दिए हुए हैं। उन्होंने राहुल के परिजनों से भी बात कर ढांढस बंधाया है। अब सभी चाहते हैं कि राहुल सकुशल बाहर आ जाए। कलेक्टर ने अंतिम दौर का रेस्क्यू अभियान भी बीती रात से शुरू कराया है। अभियान सही दिशा में चल भी रहा है। सुरंग बनाकर राहुल तक पहुँचने टीम लगी भी है,लेकिन राह में आया चट्टान कुछ समय के लिए अभियान की गति को धीमी कर गया। बहुत ही रिस्की क्षेत्र होने और कम्पन से राहुल के प्रभावित होने की आशंकाओं की वजह से चट्टान को तोड़ने भारी भरकम मशीन नहीं लगाई गई है, लेकिन फिर भी एक अन्य ड्रिलिंग मशीन मंगाकर राहुल को बचाने टीम जोर शोर से सक्रिय हो गई है। राहुल को बचाने के लिए हर सम्भव कोशिश हो रही है। लेकिन यह भी सच है कि हजारों बार कोशिश कर चुके टीम के सदस्यों की बातें काश राहुल यदि ठीक से समझ पाता तो यह राहुल कब का बाहर आकर अपने भाइयों के साथ खेलता-कूदता रहता...वह संघर्ष नहीं कर रहा होता

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