छत्तीसगढ़ / रायपुर

"नया कानून सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ितों की मदद करेगा: केंद्र सरकार ने लागू किया हिट एंड रन कानून"


केंद्र सरकार द्वारा सड़क दुर्घटना पर रोक लगाने के लिए लाया गया नया कानून हिट एंड रन को लेकर हर तरफ चर्चा का माहौल है इस चर्चा से एक वर्ग खासा परेशान है उसे लगता है कि यह कानून परेशानी में डालने वाला है जबकि ऐसा नहीं है यह कानून उन पीड़ितों की मदद के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित होगा जो न्याय के लिए भटकते रहे हैं

सही स्वरूप में देखा जाए तो यह कानून उन लोगों को ठोकर लगने से बचाने में मदद करेगा जो हाईवे में सबसे अधिक की गति में वाहन चलाते हुए स्टंट करते हैं अधिकांश अखबारों की सुर्खियां भी कई दिन तक कई बड़ी दुर्घटनाओं पर बनती है पिछले दिनों दुर्ग संभाग में एक महिला टीचर को दुर्घटना का शिकार होना पड़ा ऐसे कई सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कानून लाया गया है भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 एक वन और भारतीय दंड संहिता धारा 304 ए का नया स्वरूप है जिसमें ठोकर मारकर भाग जाने वाले को 5 साल की अधिकतम सजा थी और गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाने का प्रावधान था

भारतीय न्याय संहिता की धारा 1062 में दोषी वाहन चालक को 10 वर्ष की सजा और 7 लाख जुर्माना का प्रावधान रखा गया है हालांकि कानून में 7 लाख जुर्माना का उल्लेख नहीं है लेकिन 10 वर्ष की सजा का प्रावधान है जिसे सुनकर बस और ट्रक चालक भ्रम में पड़ गए हैं लेकिन ऐसे चालकों को उन परिवारों की तरफ भी सोचना चाहिए जो अनायास किसी दुर्घटना की शिकार हो जाते हैं और न्याय नहीं मिल पाता था जिनकी संख्या लगातार बढ़ रही थी इस कानून के तहत संख्या पर नियंत्रण आएगा और उन पीड़ितों को नया मिल पाएगा जो ठोकर लगने के बाद मौत के शिकार हो जाते हैं कई परिवारों में यह बात भी सामने आई की घटना में शिकार व्यक्ति मुखिया था

अब उसे परिवार के सामने परिवार के भरण पोषण का सवाल रहता था और न्याय नहीं मिल पाता था ऐसी दशा में यह कानून कारगर साबित होगा इस कानून के दबाव में वाहन चालक ठोकर वाली स्पीड में नहीं रखेंगे तो दुर्घटनाएं कम होगी साथ में डायल 112 की उपयोगिता कर पीड़ितों को न्याय मिल पाएगा ठोकर मारने वाला कुछ दूरी पर जाकर रुक कर एंबुलेंस सेवा की सहायता से पीड़ित की मदद कर सकेगा जो अब तक नहीं होता रहा है ठोकर मारने के बाद वाहन चालक भाग जाया करते हैं लेकिन इस कानून के प्रावधान में अगर वह मदद करते हैं तो दोषी नहीं माने जाएंगे इससे सड़क दुर्घटना रख सकेगी रायपुर जिले का ही आंकड़ा ने तो पिछले 247 प्रकरण में 163 व्यक्तियों की मौत हुई है

जिसमें दोषी वाहन चालक ठोकर मारने के बाद मौके से भाग निकला था दरअसल वाहन चालक पिटाई की डर से भागते रहे हैं अब इस डर भागने में मदद मिलेगी और वाहन चालक मदद कर सकेंगे तथा पीड़ित परिवारों को भी मदद मिल पाएगी सच कहा जाए तो यह कानून ऐसे लोगों के लिए सामने आया है जो किसी चार पहिया वाहन में सवार होने के बाद हवाई जहाज की तुलना करने लगते हैं और उसी रफ्तार से गाड़ी भागने लगते हैं खुद को रोड का शहंशाह समझने लगते हैं ऐसे शहंशाह अब कानून की निगाह में आ पाएंगे और सजा मिल पाएगी यहां तक की नशा कर वाहन चलाने वालों को भी सजा मिल पाएगी ज्यादातर घटनाओं में स्पीड मुख्य कारण रहती है क्योंकि चालक का चार पहिया वाहन पर पर नियंत्रण नहीं रहता इससे दुर्घटना घटित होती है

इस कानून से ऐसी घटनाओं को रोकने में भी मदद मिल पाएगी देश के कई हिस्सों में इस तरह की घटनाएं देखने को मिलती है और वार्षिक घटनाओं में कमी आ पाएगी अलबत्ता यह कहा जा सकता है यह कानून या नया कानून पीड़ितों की मदद के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा जो न्याय के लिए कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाते रहे हैं और उन परिवारों को भी मदद मिल पाएगी जिनकी सर पर से बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद छूट जाता रहा है घर पर किसी दीवाल के एक हिस्से में फोटो पर माला पहने व्यक्ति को देखकर रोने वाला परेशान तो होता है पर दोषी बच जाता था अब उसे दोषी को भी सजा मिलेगी और पीड़ित को न्याय मिल पाएगा 

 

 

 

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