छत्तीसगढ़ / रायपुर

आईसीएफएआई(इक्फाई) विश्वविद्यालय में "कंटेम्परोरी ट्रेंडस एंड फंडामेंटल्स् ऑफ साइंटिफिक रिसर्च" विषयक ऑनलाइन वर्कशॉप का आयोजन


रायपुर: आईसीएफएआई(इक्फाई) विश्वविद्यालय, कुम्हारी, रायपुर में सोमवार को कंटेम्परोरी ट्रेंडस एंड फंडामेंटलस् ऑफ साइंटिफिक रिसर्च" विषय पर वन वीक का(8 से 12 जनवरी) अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन वर्कशॉप प्रारंभ हुआ। विवि के मैनेजमेंट डिपार्टमेंट द्वारा आयोजित इस वर्कशॉप में देश-विदेश के करीब दो सौ एसोसिएट व असिस्टेंट प्रोफेसर, रिसर्च स्कॉलर एवं अन्य फैकल्टी मेंबर भाग ले रहे हैं।

उदघाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि गुरूघासीदास केंद्रीय विवि, बिलासपुर के कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल ने कहा कि रिसर्च का मलतब केवल अंग्रेजी में थीसिस लिखना नहीं है। विभिन्न विकसित देश अपनी मातृभाषा में बेहतर अनुसंधान कर रहे हैं। इसलिए भाषा को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए। वैज्ञानिक शोध हम किसी भी भाषा में कर सकते हैं। रिसर्च के लिए भी वही भाषा अच्छी मानी जाती है जो अधिक से अधिक लोगों के समझ में आए। अधिकतर के दिलों में आसानी से उतर जाए।

प्रो. चक्रवाल ने आज हो रहे कुछ शोध कार्य पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि रिसर्च वैसा हो जो देश को प्रगति की ओर ले जाए। रिसर्च आम व्यक्ति के काम आने वाला होना चाहिए। केवल खानापूर्ति के लिए रिसर्च न हो। उन्होंने कहा कि केवल एसपीएसएस और एक्सल जैसे माध्यमों से डाटा कलकुलेट करना रिसर्च नहीं है। एक ही प्रविधि और परिकल्पना का बार-बार प्रयोग अनुचित है। डॉ. चक्रवाल ने बताया यह जरूरी नहीं कि रिसर्च थीसिस के पन्ने अधिक से अधिक हों। कई अच्छे रिसर्च ऐसे भी हैं जो महज 10 और चालीस पेज के हैं। रिसर्च थीसिस की लंबाई बहुत ज्यादा मायने नहीं रखती है।

प्रो. चक्रवाल ने रिसर्च को आवश्यकता के बाद शुरू होने वाली प्रक्रिया का उदाहरण देते हुए व्हाट्सअप के प्रारंभ होने की कहानी बताई। उन्होंने बताया कि कैसे एक रसियन स्टूडेंट अमरीका में रहते हुए अपनी मां से संवाद के लिए एक तकनीकी प्लेटफॉर्म की शुरुआत की जो बाद में व्हाट्सएप के नाम से सबके सामने आया। डॉ. चक्रवाल ने कहा कि ज्यादा से ज्यादा विदेशी विद्वानों को पढ़ना और उनका संदर्भ देना सही नहीं है। हमारे देश का भी समृद्ध वैचारिक अतीत रहा है। हमें एडम स्मिथ के साथ-साथ कौटिल्य के अर्थशास्त्र को भी पढ़ना- समझना चाहिए।

प्रथम सत्र के रिसोर्स पर्सन एनसीआरटी टीचर एडुकेशन के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. सतीश के यादव ने अपने उद्बोधन में रिसर्च, उच्च शिक्षा में शोध कार्य की स्थिति, अनुसंधान के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फंडिंग एजेंसी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कुलसचिव डॉ. मनीष उपाध्याय ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर विवि के कुलपति डॉ. एसपी दुबे, डीन एकेडमिक डॉ के किशोर कुमार, सह संयोजक डॉ जयंत ईसाक सहित अन्य उपस्थित थे। कन्वेनर डॉ. संजय कुमार यादव ने बताया कि आगामी सत्रों में आईआईटी दिल्ली के प्रो. अर्पण कुमार कर, मोतिहारी केंद्रीय विवि के प्रो. पवनेश कुमार सिंह, मोन्टेपिलर बिजिनेस स्कूल, फ्रांस के प्रो. सिरिल आरएच फोरोपन, बिजिनेस कॉलेज, सऊदी अरबिया के डॉ. अजय सिंह क्रमशः रिसर्च जनरल की पहचान, रिसर्च रिव्यू, केस स्टडी, शोध निष्कर्ष इत्यादि विषयों पर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन करेंगे। 

 

 

 

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