शिक्षा में गुणवत्ता और तकनीक चुनौती पूर्ण डॉक्टर सच्चिदानंद शुक्ला
शिक्षा के क्षेत्र में होने वाले इनोवेशन को भूल चुके हैं लेकिन संस्कृति परंपरा और नैतिक शिक्षा की परंपरा को बनाए रखना होगा आज भी विदेश में शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय मूल्य पर काम किया जा रहा है हमारे ज्ञान का भंडार है लेकिन मेहनत नहीं कर पा रहे हैं नई शिक्षा नीति इंटरफेस प्रोग्राम को महत्व देती है उन्होंने बताया कि आज भी नॉलेज की पूजा होती है इसलिए अध्ययन और अध्यापन पर दिलचस्पी रखने वालों को सम्मानित दृष्टि से देखा जाता है सबसे अच्छा रिसर्च हुआ है जो अन्य विषयों में जाकर किया जा सके कुलपति ने इस बात पर चिता जाहिर की कि वह सपोर्ट शिक्षा के प्रति दिलचस्पी कम होते जा रही है उन्होंने कहा कि सामाजिक विज्ञान का विद्यार्थी कंप्यूटर विज्ञान के क्षेत्र में काम करता है तो यह बेहद महत्वपूर्ण होगा और आने वाले दिनों में इसकी जरूरत भी है अर्थशास्त्र समाजशास्त्र प्रबंधन और तकनीक एक मंच पर आकर बैठते हैं तो मार्केटिंग वैल्यू बढ़ जाती है किंतु विश्वविद्यालय को शोध अध्ययन को नियमों में बांध दिया है जिससे छुटकारा दिलाने की आवश्यकता है वह प्रयास कर रहे हैं और सफलता भी मिली है अब पंडित रवि शंकर शुक्ला विद्यालय में 100 वर्षों तक किसी भी आयु के विद्यार्थी अध्ययन और अध्यापन कर सकते हैं क्योंकि शिक्षा का अधिकार संविधान में पढ़ने की आजादी देता है उन्होंने बताया कि आने वाली 20 से 25 वर्षों में शिक्षा के स्तर में काफी बदलाव होने जा रहा है जिस से शिक्षकों को और विद्यार्थियों को जोड़ने की आवश्यकता है