छत्तीसगढ़ / रायपुर

CBI Raid in Chhattisgarh: CGPSC घोटाला मामले में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, पीएससी चेयरमैन और राज्यपाल के पूर्व सचिव के ठिकानों पर दबिश

 CBI Raid in Chhattisgarh: रायपुर। सीजीपीएससी भर्ती घोटाला मामले में सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई की है. सीबीआई की टीम ने आज तड़के रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग, भिलाई, धमतरी समेत कई शहरों में छापेमारी की है. CBI की इस करवाई से प्रदेश में हड़कंप मच गया है.


छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) घोटाला मामले में सीबीआई ने आज सुबह राज्यपाल के पूर्व सचिव आईएएस अमृत खलको, पीएससी के पूर्व चेयरमैन टामन सोनवानी और कांग्रेस नेता राजेंद्र शुक्ला के निवास समेत कई स्थानों पर दबिश दी है. मिली जानकारी के अनुसार राज्य पाल के पूर्व सचिव आईएस अमृत खलको के भिलाई स्थित तालपुरी कालोनी में सीबीआई की टीम पहुंची. जहां सीबीआई सीजी पीएससी घोटाले में छानबीन कर रही है. PSC घोटाले मामले में सीबीआई जांच शुरू होने के बाद राज्यपाल के सचिव पद से अमृत खलको को हटा दिया गया था.


वहीं रायपुर में पीएससी के पूर्व चेयरमैन टामन सोनवानी के निवास स्वर्णभूमि समेत तीन स्थानों पर सीबीआई ने दबिश दी. इसके साथ ही बिलासपुर में कांग्रेस नेता राजेंद्र शुक्ला के यदुनंदन नगर और तिफरा क्षेत्र के नए बस स्टैंड के पास स्थित मकान पर CBI ने छापेमारी की है. राजेंद्र शुक्ला के बेटे स्वर्णिम शुक्ला का चयन आदिमजाति कल्याण विभाग के असिस्टेंट डायरेक्टर पद पर हुआ था. सीबीआई की टीम इन सभी स्थानों में दबिश देकर CGPSC घोटाले की जांच कर रही है.


बता दें कि तत्कालीन अध्यक्ष, अधिकारियों और राजनेताओं के परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों को पीएससी 2022 (CGPSC 2022) के दौरान जिला कलेक्टरेट और डिप्टी एसपी के रूप में नियुक्त किया गया था. नियुक्त के बाद इसपर धांधली का मामला उठा था. जिसके बाद प्रदेश में बीजेपी की सरकार आने के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है. जिसके बाद आज सुबह मामले की जांच के लिए सीबीआई की टीम ने कई स्थानों में छापेमारी की है.

सीबीआई ने इनपर दर्ज की है एफआईआर
जांच एजेंसी सीबीआई ने सीजीपीएससी में गड़बड़ी मामले में जिनपर एफआईआर दर्ज किया है. उसमें तत्कालीन सीजीपीएससी अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, सचिव जेके ध्रुव और अन्य के खिलाफ कथित भाई-भतीजावाद और अपने अयोग्य बेटों, बेटी, रिश्तेदारों और परिचितों को जिला कलेक्टर, डिप्टी एसपी के बड़े पदों पर भर्ती सुनिश्चित करने के लिए मेरिट सूची में डालने का आरोप है.

 

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