सामान्य ज्ञान

पितृ पक्ष 10 अक्टूबर तक:परंपरा- क्या आप जानते हैं पितरों को अंगूठे की ओर से ही जल क्यों चढ़ाते हैं?

आज (28 अक्टूबर) पितृ पक्ष की द्वितीया तिथि है। आज उन लोगों के लिए धूप-ध्यान किया जाएगा, जिनकी मृत्यु किसी भी महीने की द्वितीया तिथि पर हुई थी। पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध और धूप-ध्यान जैसे कर्म किए जाते हैं। इन सभी विधियों में तर्पण यानी जल अर्पित करना प्रमुख माना गया है। पितरों को तर्पण देते समय जल हथेली में लेकर अंगूठे की तरफ से छोड़ा जाता है। ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, इस परंपरा के पीछे हथेली में बताए गए अलग-अलग तीर्थ क्षेत्र से जुड़ी मान्यता है। हथेली में अंगूठे के पास होता है पितृ तीर्थ पं. शर्मा बताते हैं कि हथेली में अंगूठे और तर्जनी उंगली के नीचे के बीच वाले हिस्से को पितृ तीर्थ कहा जाता है। मान्यता है कि हमारी हथेली का यह स्थान पितरों से संबंधित है। इसलिए जब पितरों के नाम से तर्पण किया जाता है, तो जल हथेली के इसी हिस्से से अर्पित करते हैं। इसका भाव यह है कि जल को हथेली में लेकर अंगूठे की ओर से छोड़ने पर वह पितृ तीर्थ से गुजरते हुए पितरों को अर्पित होता है। इस तरह जल चढ़ाने से पितरों को तृप्ति मिलती है, यह मान्यता है। देवताओं को जल देने का तरीका अलग है पितरों के तर्पण और देव पूजा में जल चढ़ाने की विधि अलग-अलग है। देवी-देवताओं की पूजा में हथेली के आगे वाले हिस्से से जल अर्पित किया जाता है। हथेली के इस हिस्से को देव कार्य के लिए श्रेष्ठ माना गया है। हमारी हथेली में जीवित लोगों और पितरों से जुड़े कर्मों के लिए अलग-अलग हिस्से बताए गए हैं। हथेली का आगे वाला भाग जीवित लोगों से संबंधित है, जबकि पीछे का हिस्सा पितरों से जुड़ा बताया गया है। अब जानिए पितृ पक्ष में धूप-ध्यान के लिए जरूरी चीजें कौन-कौन सी है और धूप-ध्यान की सरल विधि… जरूरी चीजें- गाय के गोबर से बने कंडे, धूप देने के लिए हवन कुंड या अन्य कोई बर्तन, घी, काले तिल, चावल, गुड़, कर्पूर, जल से भरा तांबे का लोटा, फूल, बैठने के लिए आसन। अगर ये सभी चीजें उपलब्ध न हो, तो जल, तिल, कंडे के अंगारे और गुड़-घी से भी श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण करके धूप-ध्यान किया जा सकता है। आप चाहें तो खीर-पुड़ी भी बना सकते हैं। खीर-पुड़ी से भी धूप दिया जाता है।

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