"शासकीय दूधाधारी बजरंग महिला महाविद्यालय में सात दिवसीय रिसर्च मेथोडालोजी कोर्स का आयोजन: शिक्षाकर्मियों और प्राध्यापकों के लिए महत्वपूर्ण कार्यक्रम"
शासकीय दूधाधारी बजरंग महिला महाविद्यालय मे सात दिवसीय रिसर्च मेथोडालोजी कोर्स डॉ. उषाकिरण अग्रवाल संयोजक प्राध्यापक मनोविज्ञान विभाग, सह- संयोजक डॉ. अजित हुंदैत प्राध्यापक जीव विज्ञान, द्वारा कार्यक्रम का प्रथम दिवस संचालन किया गया। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. किरण गजपाल के मार्गदर्शन में कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद शुक्ला ने कहा -रिसर्च के लिए दो बातों का होना आवश्यक है- खोज एवं नवाचार। रिसर्च में धैर्य जरूरी है। अनुभव और विस्तार चर्चा से होता है। रिसर्च क़्वालिटी का आशय यह है कि, जिसके हाथ में पेपर जाये उसे वह प्रभावित करे एवं परिपक्व बना दे। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. किरण गजपाल ने आभार प्रकट करते हुए कहा कि, महाविद्यालय अभी बी++ है लेकिन सतत प्रयास कर रहे हैं ;जिससे
ग्रेड में विकास हो। उन्होने कुलपति को महाविद्यालय की विस्तृत जानकारी दी। तथा महाविद्यालय में चल रहे प्रोग्राम से रुबरु कराया। साथ ही उन्होंने कहा कि, पी. एच. डी. मौखिकी के लिए महाविद्यालय को सेंटर चुना जाये। पूर्व में महाविद्यालय में ही पीएचडी की मौखिकी होती रही है।यह सुविधा हमारे शोधार्थियो के लिए बहुत सुविधाजनक होगा । प्रथम दिवस विषय विशेषज्ञ के रूप में गुजरात विश्वविद्यालय से प्राध्यापक,डॉ. तपस दलपति ,ने कहा- साइंस में रिसर्च मैथडालॉजी की आवश्यकता क्यों नही पड़ती? साइंस में फ़ार्मूला है इसलिए रिसर्च मेथोडालोजी आवश्यक नहीं है।लेकिन सोशल साइंस रिसर्च के चार स्तंभ हैं- तत्व मीमांसा, ज्ञान मीमांसा, मेथोडालोजी ,राइटिंग। रिसर्च की जर्नी दर्शन से प्रारंभ होनी चाहिए।
डॉ. अजित हुंदैत ने उद्घाटन सत्र पर आभार व्यक्त किया।इस कार्यक्रम में महाविद्यालय एवं विभिन्न प्रान्तों से 84 प्रतिभागी सम्मिलित हुए।इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।