"छत्तीसगढ़ चुनाव: मतदाताओं की मौन साधना दावेदारों की उलझन"
कार्यकर्ता शाबाशी लेने कार्यालय में हो रहे एकत्रितरायपुर 12 सितंबर छत्तीसगढ़ प्रदेश में चुनावी लहर तेज होने लगी है हर तरफ दावे किए जा रहे हैं वादे किए जा रहे हैं और सरकार बनाने की बात हो रही है इस बीच मतदाता मौन है उसे नहीं मालूम की आने वाले दिनों में किस चिन्ह पर मोहर लगाने जा रहा है परंतु इतना तय है विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में मतदाता अंतर की अहमियत को समझता है यही वजह है कि मतदाता मौन साधना कर रहा है ताकि सही वक्त पर सही चिन्ह पर मोहर लगा सके इधर मतदाताओं की खामोशी से दावेदार प्रत्याशी बेचैन है लगभग सैकड़ो की संख्या में पहुंचने वाले शुभचिंतक हर मतदाता को प्रत्याशी का खास वाटर बता रहे हैं खुश होने के लिए यह बात ठीक होती है लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रवक्ताओं के दावे हकीकत से कहीं उसको दूर हैं जगदलपुर की हकीकत में भाजपा को एक तरह से विधानसभा चुनाव 2023 किया आइना दिखा दिया है
इस आईने को और साफ करके भाजपा को देख लेना चाहिए वहीं कांग्रेस भी अपनी हकीकत को टटोल ले क्योंकि 23 के चुनाव में परिणाम निश्चित तौर पर त्रिकोणी होंगे इस बार सर्वाधिक मात्रा में युवा मतदाता मतदान करने की तैयारी में है जो क्रिकेट की भाषा में बाजी पलट देने के लिए काफी होंगे बहरहाल दावेदार चिंतन और मनन के बीच उलझन भारी आहे लेते बैठे हुए हैं जब तक के टिकट की घोषणा नहीं हो जाती सभी यही कहते हैं की पार्टी हाई कमान पर बात टिकी हुई है वह जैसा आदेश करेंगी वैसा निर्णय स्वीकार ही होगा भाजपा के अंदर कांग्रेस में यही बातें सुनाई पड़ती हैं मगर चुनाव नहीं लड़ने वाले सपोर्टर अलग तरह की कहानी कैसे दिखाई देते हैं वह कहते हैं की हकीकत को जानकर पहले स्वीकार कर लेना चाहिए तभी हम अपनी स्वीकार्यता को जीवित रख सकेंगे
बता दे की छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव 2023 दिसंबर में प्रस्तावित है राज्य निर्वाचन आयोग ने अधिसूचना जारी नहीं की है इसलिए यह चुनाव कार्यक्रम पता नहीं है फिर भी मतदाता और प्रत्याशी दोनों रोज सुबह की चाय में मुलाकात कर रहे हैं और चर्चा इस बात की हो रही है कि उनकी तैयारी कितनी है लेकिन कहीं ना कहीं मन में यह चिंता भी है की टिकट मिलेगी कि नहीं मिलेगी भारतीय जनता पार्टी के अंदर युवा चेहरों को उतरने की चेतावनी या संकेत संघ ने भी दे दिए हैं
2018 के चुनाव में भाजपा ने यही गलती की थी और ऐसे कैंडिडेट को प्रत्याशी नहीं बनाया जो जीतने वाले थे या युवा कहलाते नतीजा यह हुआ कि भाजपा को भारी हार का सामना करना पड़ा इस बार भी संघ ने भारतीय जनता पार्टी को स्पष्ट संकेत देते हुए पुराने चेहरों में बदलाव की बात कही है आप उन चेहरों से मुकाबला करने के लिए कांग्रेस को भी हर छोर पर तैयारी करना होगा क्योंकि कांग्रेस के पास भी काफी संख्या में युवा चेहरे हैं जो चुनाव लड़ने के लिए उत्सुक है और इस बार वहीं राज्य के विधानसभा चुनाव में अधिक संख्या में सीट जीतने वाले हो सकते हैं मतदाता भी यही कहते हैं कि हर बार इस कैंडिडेट को मतदान नहीं करने वाले जो पुराने हो चुके हैं इस बात को हर पार्टी स्तर के प्रमुख अधिकारियों ने समझ लिया है इसीलिए टिकटोका वितरण काफी सोच समझ कर किया जा रहा है टिकट वितरण में देरी का एक प्रमुख कारण यह भी है कि घोषणा के बाद संशोधन की आवश्यकता ना पढ़ सके
पार्षद ताकतवर प्रत्याशी की तैयारी
रायपुर नगर पालिका निगम में भाजपा कांग्रेस के पार्षद ताकतवर हैं यह ताकत शारीरिक नहीं आर्थिक है तभी तो चुनाव में दावेदारी पेश की जा रही है और अधिकारियों को यह कहते सुना जा सकता है कि उनके परसदीय क्षेत्र में वही मंत्री वही विधायक होते हैं इसलिए किसी से अनुमति लेने की कोई आवश्यकता नहीं है पार्टी स्तर पर टिकट मांगने वाले अधिकांश दावेदार में कांग्रेस और भाजपा के पार्षद दावेदार हैं जो यह कहते हैं कि कार्यकर्ता को अब मौका नहीं दोगे तो कब मौका दोगे
लग्जरी गाड़ी और बंगले का शौक
विधायक बनाने के बाद मिलने वाले रुतबे से हर दावेदार अपने आप को विधायक मानने लगा है यही कारण है कि बंगले और महंगी गाड़ी का शौक ने टिकट की मांग कर दी है हालांकि उनके ही कार्यकर्ता उनकी हकीकत को सामने नहीं कह रहे हैं और एक प्रकार से यह ऐसा अवसर है जब कार्य करता अपनी जेब भरकर पार्षद को भी मंत्री बता दे रहा है नतीजा आम वोटर चिंतित है की किसे चुने