"अवकाश अधिकार नहीं, बल्कि एक सुविधा है," शिक्षा संस्थान में अवकाश नियम के बारे में जानकारी दी गई
शासकीय दूधाधारी बजरंग महिला महाविद्यालय रायपुर में द्वितीय दिवस उन्मुखीकरण कार्यक्रम में अवकाश नियम की जानकारी दी गई।मुख्यवक्ता डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता ने कहा- "अवकाश अधिकार नही सुविधा है।" अवकाश नियम 1 अक्टूबर 2010 से लागू है :यह नियम राज्य के नियमित/अस्थायी अधिकारी एवं कर्मचारियो पर लागू है। स्थानातंरण प्रति नियुक्ति की सेवा पर भी लागू(आने,लौटने/पूर्व व पश्चात) अवकाश का अधिकार का दावा नहीं किया जा सकता ।स्वीकृत अधिकारी पर अवकाश देना निर्भर करता है।तीन वर्ष से अधिक के लिये अवकाश मान्य नहीं/अनुपस्थिति की अवधि में त्याग पत्र माना जायेगा। चिकित्सा अवकाश हेतु निर्धारित प्रारूप है। उन्मुखीकरण एवं पुनश्चर्या पाठ्यक्रम में जाने की अवधि में 45 दिन का ड्यूटी अवकाश प्राप्त होता है। अध्यनन मंडल की बैठक विशेष अवकाश की श्रेणी में आता है।
अगर कोई अधिकारी आवेदन कर एक सेवा से दूसरी सेवा में जाता है तो उसका अवकाश उस सेवा में जुड़ जाता है। विश्रमावकाश 10 दिन प्राप्त होता है। एक समय मे 180 दिनों से अधिक का अवकाश स्वीकृत नही किया जा सकता। अवकाश अवधि में निरंतर वेतन भत्ते की पात्रता होगी। अर्ध वेतन अवकाश व्यक्तिगत एवं चिकित्सा दोनों के लिए स्वीकृत किया जाता है।इस तरह लघु कृत अवकाश, अर्ध वेतन अवकाश, असाधारण अवकाश, प्रशिक्षु के लिए अवकाश, प्रसूति अवकाश, पितृत्व, दत्तक ग्रहण, संतान पालन, परिवार नियोजन इस तरह से अनेक प्रकार के अवकाश शासकीय कर्मचारियों, अधिकारियों के लिए प्रदान की जाती है।
संरक्षक एवं चेयर आई क्यू ए सी डॉ. किरण गजपाल ,प्राचार्य ने कहा-सिविल सेवा आचरण नियम की जानकारी अधिकारियों को होना चाहिए। कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. मनीषा महापात्र ने प्रमुख वक्ता का स्वागत किया एवं कहा कि अवकाश पर लंबी चर्चा सहायक एवं सहायक प्राध्यापक के लिए आवश्यक बताया। आई क्यू ए सी प्रभारी डॉ. उषाकिरण अग्रवाल ने कहा अवकाश आवश्यकता अनुसार ही लेना चाहिए। आभार व्यक्त डॉ. रमा सरोजिनी ने किया।उक्त कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक एवम सहायक प्राध्यापक उपस्थित रहे।