छत्तीसगढ़ / रायपुर

महादेव ऐप घोटाला: छत्तीसगढ़ में राजनीतिक विवाद और सुर्खियाँ, क्या यह ऐप विश्वसनीय है?


छत्तीसगढ़ में चुनाव से पहले महादेव ऐप अब एक राजनीतिक मुद्दा बन चूका है. जहाँ भाजपा ने इस ऐप को लेकर आरोप लगाया था कि, महादेव ऐप के जरिये पाकिस्तान का पैसा कांग्रेस को मिल रहा है. तो वहीँ कांग्रेस ने इस आरोप को मुर्खतापूर्ण बत्ताते हुए अपने ऊपर लगे आरोपों का पलटवार किया.

वही मुख्यंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि, महादेव ऐप बंद करने का काम केंद्र सरकार का है राज्य सरकार का नहीं. उन्होंने कहा कि सरकार महादेव ऐप क्यों बंद नहीं कर रही है. कहीं चुनावी फंड तो नहीं ले लिया.

उन्होंने कहा महादेव ऐप पूरे देश में चल रहा है. केंद्र सरकार सट्टा ऐप पर जीएसटी लगाकर पैसा वसूल रही है. ये लोगों को बर्बाद कर रहे हैं. लेकिन सरकार खमोश है कोई कार्रवाई नहीं कर रही है. उनके कार्यकर्ता साथ केक काट रहे, पार्टी कर रहे हैं.

भूपेश बघेल ने चर्चा करते हुए कहा कि, हमारी सरकार ने जितनी कार्रवाई की शायद ही किसी राज्य ने की हो. उन्होंने कहा कि, अब तक इस मामले में 450 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है.

देशभर की बात करें तो शायद ही किसी सट्टा ऐप अब तक इतनी बड़ी कार्यवाही हुई होगी जो कि राष्ट्रीय मीडिया में भी सुर्खियाँ बटोर रहा है.

इस ऐप के माध्यम से करीब 6000 करोड़ के घोटाला किये जाने की बात कही जा रही है. जिसमे 41 करोड़ रुपये जप्त किये जाने की बात कही जा रही है. मामले में सौरभ चंद्राकर, रवि उत्पल सहित 14 लोगों को आरोपी बनाये गए है.

सौरभ चंद्राकर जो कि छत्तीसगढ़ भिलाई का निवास है, जिसे इस पुरे ऐप का मास्टरमाइंड और मालिक बताया जाता है. हाल ही में हुए एक शादी, जिसमे 200 करोड़ का खर्च और फिल्मी सितारों में शामिल होने की भी ख़बर सुर्खियाँ बटोर रही थी.

लोगों से घोखाधड़ी कर पैसे ऐंठने में ना केवल महादेव ऐप बल्कि आपको इस तरह के कई और भी ऐप इंटरनेट पर उपलब्ध मिलेंगे. इस तरह के ऐप की संख्या इंटरनेट पर कितनी होगी और रोजाना कितने ही लोग लालच में घोखाधड़ी का शिकार होते होंगे इसका अंदाजा लगा पाना भी मुश्किल है. सराकर द्वारा तमाम कोशिशों के बावजूद इंटरनेट पर रोजाना ऐसे कई ऐप उपलब्ध कराये जा रहे हैं जिनसे गलत तरीके से धोखाधड़ी कर पैसा हड़पा जा रहा है.

जब किसी को इस बात का एहसास होता है कि उसके साथ ठगी हुई है तो वह इस बात की शिकायत करते हुए भी कार्रवाई करवाने में सक्षम नही रहता है. क्योकिं इन ऐप का कोई ठिकाना नही होता ये किसी भी देश से संचालित किये जा सकते हैं, यहाँ तक कि आप भारत में बैठकर इसे अमेरिका के एड्रेस से भी संचालित कर सकते हैं. तो फिर कार्रवाई किस पर की जायेगी.

इस सब चीजों में लोगो को बढ़ावा देने के लिए कहीं हद तक हमारे फिल्मी सितारे भी शालिम है, जिनके बहकावे में आकर लोग इस तरह के जाल में फँस जाते हैं और अपने पैसे गवां बैठते हैं.

आखिर केंद्र सरकार क्यों नहीं बंद करवा पा रही ऐप ?

अब बात करते हैं कि आखिर केंद्र सरकार इस ऐप को क्यों नहीं बंद करवा पा रही है, तो इसका जवाब होगा इस तरह के ऐप को रोकने के लिए सरकार लगातार कोशिश कर रही है. बावजूद इसके इन्हें रोकने में वे कायम नही हो पाए हैं. जिसका कारण है इंटरनेट पर डोमेन नेम को चेंज कर देना.

यदि शासन को इस बात की जानकारी होती है कि इन्टरनेट पर उपलब्ध पते से किसी तरह की सुरक्षा का खतरा, या लोगों को धोखा देने का कार्य किया जा रहा है तो उस पते को तुरंत ही देश में ब्लॉक कर दिया जाता है. इसके पहले केंद्र सरकार ने सुरक्षा का हवाला देते हुए करीब 232 ऐप को एक साथ ब्लाक किया था. लेकिन ब्लॉक होने वाले ऐप अपना डोमेन नेम पता बदलकर फिर से उसी सॉफ्टवेयर को इंटरनेट पर चलाने लगते हैं. सरकार केवल डोमेन नेम ही ब्लॉक कर पाती है, और जैसे ही ऐप चलाने वाले को अपने डोमेन नेम के ब्लॉक होने की जानकारी मिलती है तो वह तुरंत अपना सारा डाटाबेस और कोड एक दुसरे डोमेन नेम पर ट्रांसफर कर चलाने लग जाते हैं. जिसमे सारे वहीं डेटा वापस उपलब्ध हो जाते हैं जो ब्लाक किये जाने के पहले चल रहे थे. इसे करने में इन्हें केवल 1 से 2 घन्टे का ही समय लगता है, जब तक कि नया डोमेन एक्टिवेट ना हो जाए.

क्या ऐप के माध्यम से लालच देकर की जा रही ठगी ?

जी हाँ, बिल्कूल ऐसा संभव है कि महादेव ऐप के माध्यम से लोगों की लालच देकर उसमे पैसा लगवाया जा रहा है, और ज्यादा अमाउंट दिखते ही उसे हड़प लिया जा रहा है. लेकिन यूजर इस बात से बेखबर होता है उसे सब सही लगता है, और जीतने के प्रयास में और गवांता जाता है.

महादेव ऐप एक ऐसा ऐप है जिसे संचालित, कहने को दुबई से किया जा रहा है लेकिन इसमें 24*7 कस्टमर केयर की सहायता दी जा रही है वह भी हिंदी में, जो आपको आईडी खरीदने से लेकर बैटिंग कैसे करनी है और पैसा कैसे लगाना है ये बताते हैं.

महादेव ऐप के कस्टमर केयर से ही 100 रुपये जमा करने के बाद आईडी बनाकर दे दी जाती है, समझाने के लिए लोगों को डेमो यूजर आई और पासवर्ड भी उपलब्ध कराये जाते हैं. इस ऐप के माध्यम से कई तरह की वेबसाइट में क्रिकेट, फुटबाल, तीन पत्ती जैसे खेलों में पैसे लगवाये जाते है.

कितना सही और विश्वशनीय है यह ऐप ?

इंटरनेट पर उपलब्ध ऐसे किसी भी तरह का खेल धोखे का हो सकता है. जो दिखता कुछ हो और हो कुछ, इस ऐप की विश्वशनीयता केवल इसके लिखे गए कोड को देखकर ही बताया जा सकता है. क्योकि इस तरह के ऐप किसने बनाया है और क्या कोडिंग की है बिना देखे कुछ कह पाना मुश्किल है हो सकता है उनके ऐप में 2+2 = 22 होता हो, जबकि आम लोगों के लिए यह केवल 4 ही है. जब आप ज्यादा पैसे लगा रहे हो तो हो सकता है, गलत कोड के वजह से आप हार जाते हो. इस लिए ऐसे सब ऐप पर भरोसा करना अत्यंत ही खतरनाक हो सकता है. यूँ ही नहीं कोई कुछ महीनों में 6 हजार करोड़ का घोटाला कर गया. पता नहीं देश भर के कितनों के पैसे डूबे हैं इनमे. शासन द्वारा इन से कमाई गई सारी रकम जब्त कर लोगों को जागरूक करना चाहिए. क्योकि जागरूकता ही इसका असली हथियार है.

 

 

 

 

 

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