"वर्दी का दाग: पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आरोप, अनुशासन की दुहाई में आम लोगों का सवाल"
रायपुर: राज्य में अनुशासन की दुहाई देने वाली व्यवस्था में वर्दी की आन बान शान सुरक्षित नहीं है लगातार वर्दी की पिटाई की खबरें सामने आ रही है ऐसे में सवाल साफ है कि जब वर्दी सुरक्षित नहीं है तो आम लोगों की फिक्र कौन करेगा निरंकुश अपराध में राजधानी से लेकर सुदूर ग्रामीण अंचलों में भी अपरा तफरी मचा रखी है हर दिन अखबार के पहले पन्ने में एक अपराध की बड़ी खबर होती है साफ है कि कहीं ना कहीं वर्दी का जोर खत्म हो गया या फिर वर्दी का जोर रखने वाले लगातार पीट रहे हैं ऐसा क्यों हो रहा है विश्लेषक दो दो बातों पर जोर देते हैं एक की वर्दी का मनरखने वाले घमंड में है दूसरा यह की अपराध की जड़ को खत्म नहीं किया जा रहा अपराधी नशे की आड़ में निरंकुश होकर अपराध कर रहे हैं थाने के अंदर शेर के समान दिखाई देने वाले जवान सड़क पर ठंडा पड़ जाते हैं और आम आदमी आसानी से पीठ देता है सिर्फ इतना ही नहीं वर्दी की घमंड में चलने वाले जवान बेफिक्र हो चले हैं नतीजा सामने है रायपुर राजधानी के अंदर एक नहीं कई घटनाओं में वर्दी को खुलेआम पीट दिया गया निश्चित तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों को आत्म चिंतन करना चाहिए अन्यथा एक दिन ऐसा भी होगा की वर्दी का खौफ खत्म हो जाएगा और आम लोग वर्दी के उम्मीद को छोड़कर खुद कानून को हाथ में लेने लगेंगे
उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों रायपुर के पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र के अंतर्गत भाटा गांव के पास एक घटना घटी इसमेंचार लोगों ने एक आरक्षक की बेल्ट लात गुस्से से पिटाई कर दी गई कारण क्या है यह स्पष्ट नहीं है परंतु यह स्पष्ट है की आरक्षक वर्दी की घमंड में था और कानून व्यवस्था को नियंत्रित करने की बात कर रहा था जो उल्टा पड़ गया असल में हकीकत है की वर्दी धारण करने से पहले सभी जवानों को यह सिखाया जाता है की रक्षा के लिए कोई समय नहीं होता अनुशासन जब मिले जहां मिले पालन करना है शायद इसी परंपरा को निभाने के दौरान जवान की पिटाई कर दी गई इसका एक और पक्ष यह भी हो सकता है की जवान वर्दी की घमंड में हमलावर लोगों से अनर्गल बातचीत करने लगा या वे लोग नशे में थे वर्दी पहचान नहीं सके और पिटाई कर दी यह इस घटना का एक पहलू हो सकता है परंतु वर्दी पहनकर के भी वसूली के खेल खेले जा रहे हैं पिछले दोनों राजधानी में एक युवती को पुलिस ने पकड़ा है उक्त युवती पुलिस की वर्दी पहन कर खुलेआम वसूली कर रही थी ऐसे में सवाल सिर्फ इस बात का नहीं है रक्षक भक्षक कैसे बन सकते हैं वर्दी को लेकर पहले भी सवाल उठे हैं कई बार वर्दी वाले नशे की आगोश में गिरे पड़े पाए जाते हैं मामला यूं ही खत्म नहीं होता असल में अधिकारियों को इस बात की समीक्षा करना चाहिए की वर्दी पहनने के बाद प्रतिष्ठा बचाए बार रखने के लिए धारण करने वाला किस तरह मेहनत करता है किस तरह परंपरा का निर्वहन करता है ट्रेनिंग तो पूरी दी जाती है फिर इज्जत क्यों चली जा रही है यह सोचा हर किसी के लिए तो संभव है पर धारण करने वाले को ज्यादा सोचना चाहिए
थाने के अंदर की नहीं डरता
रायपुर के प्राइम लोकेशन वाले थाने में हर दिन वर्दी दागदार होती है कई बार सुर्खियां अखबार में आ जाती है पर अधिकांश अवसर पर मामले दबा दिए जाते हैं पुरानी बस्ती का ही एक मामला है जिसमें एक आरक्षक ने एक महिला के आंसू में भावनात्मक रूप से आकर एक युवक की थाने में जमकर पिटाई कर दी थी कारण क्या था आरक्षक को नहीं मालूम था महिला के निवेदन और आशु ने उग्र कर दिया और पिटाई कर दी ऐसे में अब वही वर्दी सड़क में पिट रही है तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए