देश-विदेश
"टेस्ला के सीईओ Elon Musk ने दिखाया दूसरे जनरेशन का ह्यूमनॉइड रोबोट, ऑप्टिमस Gen 2: नए फीचर्स और डांस करने की क्षमता के साथ"
टेस्ला के सीईओ Elon Musk ने अपने सेकेंड जनरेशन ह्यूमनॉइड रोबोट ऑप्टिमस (Optimus) को पेश कर दिया है. मस्क ने अपने एक्स (पहले ट्विटर) हैंडल पर एक वीडियो शेयर कर इस रोबोट के बारे में जानकारी दी है. वीडियो में रोबोट को डांस करते, टेस्ला फैक्ट्री में घूमते-फिरते देखा जा सकता है. इतना ही नहीं, यह हूबहू इंसानों की तरह स्क्वैट भी लगा सकता है और अंडे भी उबाल सकता है.
Tesla Optimus Gen 2 में क्या है खास?
इसमें कई नए फीचर्स दिए गए हैं. Tesla ने नए Optimus Gen 2 में नए Actuators और Sensor दिए हैं. इसमें 2-DoF Actuated नेक दी गई है. Tesla ने अपने नए रोबोट को नया हाथ, पैरों के लिए नए सेंसर और दूसरे अपडेट्स जोड़े हैं. इन अपडेट्स के बाद टेस्ला का ह्यूमनॉइड पहले से ज्यादा बेहतर काम कर रहा है. साथ ही इस रोबोट का वजन 10 किलोग्राम कम हुआ है. कंपनी का कहना है कि, वजन कम करने के लिए फीचर्स में कोई भी कटौती नहीं की गई है. Tesla Optimus Gen 2 बेहतर बैलेंस और फुल बॉडी कंट्रोल के साथ आता है. इस रोबोट का बैलेंस इतना बेहतर है कि ये स्क्वाट्स लगा सकता है.
कंपनी ने इसमें 11 DoF ब्रैंड न्यू हैंड्स दिए गए हैं, जो पहले वाले वर्जन के मुकाबले काफी तेज हैं. ये रोबोट अपनी उंगलियों को भी आसानी से घुमा सकता है. बेहतर रिजल्ट के लिए Tactile सेंसिंग का इस्तेमाल सभी उंगलियों में किया गया है. इसका फायदा ये होगा कि रोबोट कुछ भी होल्ड करेगा तो उसका अंदाजा लगा सकेगा.
ज्यादा बेहतर बैलेंसिंग, स्क्वाट करते दिखा रोबोट
मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जो वीडियो शेयर किया है उसमें रोबोट खुद को बैलेंस करते हुए स्क्वाट करता दिखाई दे रहा है. पिछले मॉडल्स की तुलना में रोबोट का यह वर्जन 30% ज्यादा तेज चल सकता है.
क्या डांस कर सकते हैं?
जी हां, वीडियो के अंत में दो ऑप्टिमस जेन 2 रोबोट डांस करते नजर आ रहे हैं. कंपनी का दावा है कि रोबोट एक ही काम को बार-बार कर सकता है और यहां तक कि बोरिंग काम को भी बखूबी कर सकता है.
टेस्ला फ्रैक्ट्री में रोबोट का इस्तेमाल होगा, बेचे भी जाएंगे
कंपनी ने कहा कि वह जल्द ही अपने खुद के मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशन में रोबोट का उपयोग शुरू करने की योजना बना रही है. टेस्ला ने रोबोट की बिक्री शुरू करने की योजना बनाई है. ऑप्टिमस पर पिछले अपडेट में, टेस्ला के CEO एलन मस्क ने दावा किया था कि ऑप्टिमस रोबोट की डिमांड 10 से 20 अरब यूनिट तक हो सकती है.
मस्क के अनुसार ऑप्टिमस रोबोट खतरनाक, दोहराव वाले और उबाऊ कामों को करेगा. ऑप्टिमस के इनिशियल वर्जन का इस्तेमाल फैक्ट्री फ्लोर पर किया जा सकता है. मस्क का मानना है कि समय के साथ रोबोट की क्षमताओं में सुधार जारी रहेगा, जिससे यह कई तरह के कामों को करने के लिए एक अमूल्य संपत्ति बन जाएगा.
"श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मामले में हाईकोर्ट ने सर्वे की इजाजत दी, तय होगा सर्वे करने का तौर-तरीका"
लखनऊ: श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह परिसर विवाद की सुनवाई कर रहे इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परिसर के सर्वे की इजाजत दे दी है. हिंदू पक्ष शाही ईदगाह के सर्वे की मांग को लेकर जिला कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक का दरवाजा खटखटा चुका है. इलाहाबाद हाईकोर्ट गुरुवार को 18 याचिकाओं पर सुनवाई करने के बाद ये फैसला दिया है.
ज्ञानवापी के बाद मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद में भी सर्वे कराने को लेकर हिंदू पक्ष ने याचिका दायर की थी. इसको लेकर काफी समय से जिला कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक सुनवाई चल रही थी. छह नवंबर को कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद फैसले को सुरक्षित रख लिया था. गुरुवार को हाईकोर्ट ने शाही ईदगाह परिसर में सर्वे को लेकर एक कमिश्नर नियुक्त करने का भी आदेश दिया है, जो मंदिर परिसर का सर्वे कराएगा. कोर्ट 10 दिसंबर को टीम में सदस्य की संख्या को लेकर निर्देश देगा.
18 दिसंबर को तय किए जाएंगे तौर-तरीके
हाईकोर्ट के फैसले पर हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हमारे आवेदन को स्वीकार कर लिया है, जहां हमने अधिवक्ता आयुक्त द्वारा (शाही ईदगाह मस्जिद) के सर्वेक्षण की मांग की थी. तौर-तरीके 18 दिसंबर को तय किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि शाही ईदगाह मस्जिद के तर्कों को खारिज कर दिया है. मेरी मांग थी कि शाही ईदगाह मस्जिद में हिंदू मंदिर के बहुत सारे चिन्ह और प्रतीक हैं, और वास्तविक स्थिति जानने के लिए एक अधिवक्ता आयुक्त की आवश्यकता है. यह अदालत का एक ऐतिहासिक फैसला है.
क्या थी हिंदू पक्ष की मांग
शाही ईदगाह में सर्वे को लेकर हिंदू पक्ष ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. वादी की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने हाईकोर्ट में बताया था कि वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर की तरह ही श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर स्थित शाही ईदगाह मस्जिद का भी सर्वे कराया जाए. इसके लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया जाए. उन्होंने न्यायालय से तीन अधिवक्ताओं के पैनल को कोर्ट कमिश्नर के रूप में नियुक्त करने की मांग की थी.
मुस्लिम पक्ष ने जताया था विरोध
मुस्लिम पक्ष ओर से इस बात का विरोध करते हुए कहा गया था कि जब तक प्लेसेस ऑफ वरशिप एक्ट और वक्फ बोर्ड एक्ट के तहत मामले में सुनवाई पूरी नहीं होती, इस अर्जी पर कोई निर्णय नहीं किया जा सकता है. साथ ही ज्ञानवापी मस्जिद केस में दिए गए फैसले का भी हवाला देकर के कहा गया कि ज्ञानवापी मामले में भी न्यायालय ने कोर्ट कमिश्नर नियुक्त करने का आदेश दिया था. ऐसे में शाही ईदगाह परिसर का कोर्ट कमिश्नर और पुरातत्व विभाग द्वारा सर्वे किया जाना चाहिए.
"शिक्षा मंत्रालय ने 'परीक्षा पे चर्चा' कार्यक्रम के लिए आवेदन आमंत्रित किए, 12 जनवरी, 2024 तक हैं"
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं. ये इस कार्यक्रम का 7वां संस्करण है. उम्मीदवार इसके लिए 12 जनवरी, 2024 तक आवेदन कर सकते हैं.
इस कार्यक्रम के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोगी सलाह देते हैं. इस कार्यक्रम के माध्यम से उम्मीदवारों को प्रधानमंत्री के साथ सीधे बातचीत करने और पुरस्कार जीतने का मौका मिलता है.
कौन कर सकता है पंजीकरण?
शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, ये कार्यक्रम कक्षा 6 से कक्षा 12 में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए है. इसके अलावा विद्यार्थियों के माता-पिता और शिक्षक भी विशेष रूप से उनके लिए डिजाइन की गई ऑनलाइन गतिविधियों में भाग ले सकते हैं और अपनी प्रविष्टियां जमा कर सकते हैं. इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री 2024 में होने वाली प्रवेश परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं में किसी भी चिंता के बिना सफल होने के बारे में सलाह देंगे.
कब होगा कार्यक्रम?
पिछले साल ये कार्यक्रम 27 जनवरी, 2023 को आयोजित किया गया था. इस साल भी कार्यक्रम जनवरी, 2024 के अंत तक ही होने की संभावना है. हालांकि, कार्यक्रम आयोजन की तारीख को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. पिछले साल कार्यक्रम के लिए रिकॉर्ड 38 लाख छात्रों ने पंजीकरण कराया था, इस साल भी रिकार्ड संख्या में आवेदन आने का अनुमान है. कार्यक्रम की अन्य जानकारी के लिए उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट का उपयोग कर सकते हैं.
छात्रों को भेजना होगा अपना सवाल
इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए छात्रों को अपना प्रश्न प्रधानमंत्री को भेजना होगा. छात्र ध्यान रखें कि ये प्रश्न 500 शब्दों से ज्यादा का नहीं होना चाहिए. इस कार्यक्रम के लिए चयनित उम्मीदवारों को सर्टिफिकेट के साथ अन्य उपहार भी मिलते हैं.
कब हुई थी कार्यक्रम की शुरुआत?
प्रधानमंत्री के संवाद कार्यक्रम ‘परीक्षा पे चर्चा’ का पहला संस्करण 16 फरवरी, 2018 को आयोजित किया गया था. ये कार्यक्रम एग्जाम वॉरियर्स का एक हिस्सा है, जिसका उद्देश्य किशोरों को तनाव मुक्त वातावरण प्रदान करना है. ये एक ऐसा कार्यक्रम है, जिसके जरिए छात्रों, माता-पिता, शिक्षकों और समाज को एक साथ लाने पर जोर दिया जाता है ताकि ऐसे वातावरण को बढ़ावा दिया जा सके जहां प्रत्येक बच्चा पूरी आजादी से अपने आप को व्यक्त कर सके.
"मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री मोहन यादव का ऐक्शन मोड: धार्मिक स्थलों के लाउड स्पीकर पर लगाई रोक"
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेते ही मोहन यादव ऐक्शन मोड में आ गए हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश में धर्म स्थलों के लाउड स्पीकर पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है। गृह विभाग की ओर से इस बाबत आदेश जारी कर दिया गया है। आदेश में कहा गया है कि प्रदेश में धार्मिक एवं अन्य स्थलों पर नियमों के खिलाफ बजने वाले लाउड स्पीकरों पर प्रतिबंध रहेगा। आधिकारिक बयान में यह भी कहा गया है कि धर्म गुरुओं से संवाद के आधार पर यह फैसला लिया गया है।
समाचार एजेंसी युनिवार्ता की रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शपथ ग्रहण करने के बाद कार्यभार संभालते ही धार्मिक स्थलों एवं अन्य स्थानों पर निर्धारित मापदंडों से ज्यादा आवाज में बजाए जाने वाले लाउडस्पीकरों पर प्रतिबंध लगाये जाने के आदेश जारी कर दिए। इस संबंध में सूबे के गृह मंत्रालय की ओर से संबंधित अधिकारियों को आदेश जारी कर दिए गए।
सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, अब सूबे में धार्मिक स्थलों पर तेज आवाज वाले लाउड स्पीकर नहीं बजेंगे। आदेश्नि में कहा गया है कि अनियंत्रित ध्वनि विस्तारक यंत्रों यानी तेज आवाज वाले लाउड स्पीकरों के इस्तेमाल पर ही प्रतिबंध है। नियमित एवं नियंत्रित लाउडस्पीकरों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध नहीं होगा। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सीएम बनने के बाद मोहन यादव ने तेज आवाज वाले लाउड स्पीकरों के बैन पर पहला फैसला लिया।
"मध्य प्रदेश: डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जानें उनका राजनीतिक सफर"
भोपाल: मध्य प्रदेश में डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला ने भी मंत्री पद की शपथ ली। वे अब डिप्टी सीएम बन गए है। भोपाल के परेड ग्राउंड मैदान में आयोजित भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नेड्डा मौजूद रहे। इसके अलावा यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र सीएम एकनाथ शिंदे, डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस, अजित पवार, उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत तमाम बीजेपी नेता मौजूद रहे।
जानें कौन हैं नए मुख्यमंत्री मोहन यादव
मोहन यादव का जन्म 25 मार्च 1965 को मध्य प्रदेश के उज्जैन में हुआ था. उनके पिता का नाम पूनमचंद यादव है। तीन बार के विधायक यादव दो बेटे और एक बेटी के पिता हैं। उन्होंने बीएससी, एल-एल.बी, राजनीतिक विज्ञान में एम.ए, एम.बी.ए और पी.एच.डी की है। इसके अलावा एमबीए भी किया है और फिलॉसफी में पीएचडी की है. मोहन यादव ने अपनी पढ़ाई विक्रम यूनिवर्सिटी उज्जैन से की है।
उज्जैन के दक्षिण सीट से मोहन यादव ने जीत हासिल की है। मोहन यादव शिवराज कैबिनेट में उच्च शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। लगातार तीसरी बार चुनाव जीतकर उज्जैन दक्षिण सीट पर कब्जा किया है। वे लगातार तीसरी बार चुनाव जीते हैं। 2013 में पहली बार विधायक बने।
अब तक का राजनीतिक सफर
- 1982 में माधव विज्ञान महाविद्यालय छात्रसंघ के सह-सचिव और 1984 में अध्यक्ष.
- 1984 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद उज्जैन के नगर मंत्री एवं 1986 में विभाग प्रमुख,
- 1988 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद मध्यप्रदेश के प्रदेश सहमंत्री एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य
- 1989-90 में परिषद की प्रदेश इकाई के प्रदेश मंत्री
- 1991-92 में परिषद के राष्ट्रीय मंत्री
- 1993-95 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, उज्जैन नगर के सह खण्ड कार्यबाह, सायं भाग नगर कार्यवाह
- 1996 में खण्ड कार्यवाह और नगर कार्यवाह
- 1997 में भा.ज.यु.मो. की प्रदेश कार्य समिति के सदस्य
- 1998 में पश्चिम रेलवे बोर्ड की सलाहकार समिति के सदस्य
- 1999 में ‘भा.ज.यु.मो. के उज्जैन संभाग प्रभारी
- 2000-2003 में विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन की कार्य परिषद के सदस्य
- 2000-2003 में भा.ज.पा. के नगर जिला महामंत्री
- 2004 में भा.ज.पा. की प्रदेश कार्य समिति के सदस्य
- 2004 में सिंहस्थ, मध्यप्रदेश की केन्द्रीय समिति के सदस्य
- 2004-2010 में उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष (राज्य मंत्री दर्जा)
- 2008 से भारत स्काउट एण्ड गाइड के जिलाध्यक्ष
- 2011-2013 में मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम, भोपाल के अध्यक्ष (केबिनेट मंत्री दर्जा) भा.ज.पा. की प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य
- 2013-2016 में भा.ज.पा. के अखिल भारतीय सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के सह-संयोजक. उज्जैन के समग्र विकास हेतु अप्रवासी भारतीय संगठन शिकागो (अमेरिका) द्वारा महात्मा गांधी पुरस्कार और इस्कॉन इंटरनेशनल फाउंडेशन द्वारा सम्मानित.
- मध्य प्रदेश के पर्यटन के निरंतर विकास हेतु सन 2011-2012 और 2012-2013 में राष्ट्रपति पुरस्कृत
- 2013 में चौदहवीं विधान सभा के सदस्य निर्वाचित
- 2018 में दूसरी बार विधानसभा सदस्य निर्वाचित
- 2 जुलाई 2020 को मंत्री पद की शपथ.
"राजस्थान: भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री चुना गया, दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा उप मुख्यमंत्री"
जयपुर: छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के बाद अब राजस्थान में भी मुख्यमंत्री की तस्वीर साफ हो गई है. छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में नए चेहरों को नेतृत्व देने के साथ ही राजस्थान में भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री चुन लिया है. विधायक दल की बैठक में इनके नाम पर मुहर लगा दी गई है. वहीं दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा उप मुख्यमंत्री बनाए गए हैं. वहीं वासुदेव देवनानी स्पीकर बनाए गए हैं.
बता दें कि भजनलाल सांगानेर विधानसभा सीट से विधायक हैं. वे पहली बार विधायक बने हैं. उन्हें सीटिंग MLA अशोक लौहाटी का टिकट काटकर भजनलाल शर्मा को दिया गया था. भजनलाल ने कांग्रेस के पुष्पेंद्र भारद्वाज को 48081 वोटों से हराया था. भजनलाल शर्मा भरतपुर के निवासी हैं. यही वजह है कि सांगानेर से चुनाव मैदान में उतरे भजनलाल को बाहरी होने के आरोपों का सामना करना पड़ा था. हालांकि उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को करारी शिकस्त दी. वे संघ और संगठन दोनों के करीबी माने जाते हैं.
बता दें कि राजस्थान में भाजपा ने केंद्रीय नेतृत्व ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विनोद तावड़े और सरोज पांडेय को राजस्थान का पर्यवेक्षक बनाया था. जिन्होंने मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान किया है. बैठक के लिए सभी विधायकों को 1 बजे भाजपा के जयपुर कार्यालय बुलाया गया था.
बता दें कि राजस्थान की कुल 200 विधानसभा सीटों में से 199 सीटों पर चुनाव हुआ था. जिसमें से भाजपा को 112 सीट, कांग्रेस को 72 और निर्दलीय को 12 सीटें मिली थी.
"राजस्थान में नए मुख्यमंत्री की घोषणा, बीजेपी की बैठक में होगा नामकरण"
छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश के बाद अब राजस्थान में कौन बनेगा मुख्यमंत्री, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई है. यहां सीएम के नाम की घोषणा 12 दिसंबर को होगा. बीजेपी ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राज्यसभा सांसद सरोज पांडे और बीजेपी राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को राजस्थान का पर्यवेक्षक बनाया है. राजस्थान में मंगलवार को विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें सीएम चुने जाएंगे.
बीजेपी ने डॉक्टर मोहन यादव को एमपी के सीएम बनाए हैं. वहीं छत्तीसगढ़ में विष्णु देवसाय को सीएम की कमान सौंपी गई है. ऐसे में अब सबकी नजर राजस्थान पर है. राजस्थान में भी बीजेपी सीएम पद के लिए चौंकाने वाली नाम की घोषणा कर सकती है. मंगलवार शाम 4 बजे प्रदेश कार्यालय में विधायक दल की बैठक बुलाई गई है. शाम चार बजे के बाद किसी भी वक्त नए सीएम का एलान कर दिया जाएगा.
राजस्थान में इन नामों पर चल रही चर्चा
राजस्थान में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे, किरोड़ीलाल मीणा, राज्यवर्धन सिंह राठौर, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव,लोकभा अध्यक्ष ओम बिरला, बाबा बालकनाथ, दीया कुमारी का नाम सीएम की रेस में है. उधर, सूत्र बताते हैं कि वसुंधरा ने केंद्रीय नेतृत्व से एक साल के लिए सीएम बनाने की मांग की है. उधर, किरोड़ी लाल मीणा ने कहा है कि हमारे पास सक्षम चेहरों की कोई कमी नहीं है. केंद्रीय संसदीय बोर्ड जो भी फैसला करेगा उसे हम सभी स्वीकार करेंगे.
"मध्य प्रदेश के कटनी में एक महिला के साथ ट्रेन में दुष्कर्म का मामला कार्रवाई शुरू,देखे"
कटनी: मध्य प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला कटनी से सामने आया है। जहां कटनी से सतना के बीच चलती ट्रेन में आरोपी ने एक महिला के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया है।बताया जा रहा है जिस वक्त ये घटना हुई उस दौरान ट्रेन की उस बोगी में कोई भी मौजूद नहीं था।
पीड़ित महिला ने सतना में उतरकर अपने साथ हुए दुष्कर्म की घटना को जीआरपी को बताया। पकरिया स्टेशन से सतना के बीच चलती ट्रेन में महिला दुष्कर्म का शिकार हुई है। फिलहाल पीड़िता की शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। घटना बीते रविवार की है।
जीआरपी डीएसपी सारिका पांडे ने बताया कि महिला मूलतः सतना जिले के रहने वाली है। वह अपनी बहन से मिलने कटनी आई हुई थी। वहीं सतना वापसी के दौरान चलती ट्रेन में उसके साथ एक व्यक्ति के द्वारा दुष्कर्म किया गया है। उन्होंने बताया कि जब महिला ने इसका विरोध किया तो आरोपी पीड़िता को ट्रेन के अंदर ही धक्का देकर पटक दिया। महिला विवाहित है और उसके बच्चे भी है। फरियादी की शिकायत पर जीआरपी पुलिस कटनी ने मामला दर्ज कर लिया है, वहीं आरोपी की तलाश कर रही है।
"सीबीआई में एक डीआईजी और चार एसपी नियुक्त, जितेंद्र सिंह मीणा को उप महानिरीक्षक बनाया गया"
नयी दिल्ली: भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी जितेंद्र सिंह मीणा को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) में उप महानिरीक्षक (डीआईजी) के रूप में नियुक्त किया गया है। एक आधिकारिक आदेश से यह जानकारी मिली। आदेश में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ कैडर के 2007 बैच के आईपीएस अधिकारी मीणा को पांच साल की अवधि के लिए सीबीआई में नियुक्त किया गया है। उनके अलावा चार पुलिस अधीक्षक (एसपी) को संघीय जांच एजेंसी में नियुक्त किया गया है।.
कार्मिक मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, सीबीआई में नियुक्त चार आईपीएस अधिकारियों में विनायक वर्मा (मध्य प्रदेश कैडर), अचल त्यागी (गुजरात कैडर), प्रवीण कुमार (गुजरात कैडर) शामिल हैं जिन्हें पांच साल के लिए नियुक्त किया गया है।.
सुप्रीम कोर्ट ने आनुच्छेद 370 के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया, जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग माना गया
सुप्रीम कोर्ट ने आज अनुच्छेद 370 (Article 370)से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ सोमवार को निर्णय दिया है. जिसमें शीर्ष अदालत ने इस निर्णय को सही बताया है.
CJI ने कहा कि प्रक्रिया पर बात हो. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विलय के बाद जम्मू-कश्मीर संप्रभु राज्य नहीं बल्कि भारत का अभिन्न अंग. अनुच्छेद 370 एक अस्थायी प्रावधान था. सीजेआई ने यह भी कहा कि विलय के साथ J&K ने संप्रभुता छोड़ी है. उन्होंने कहा कि हर फैसला कानूनी चुनौती के अधीन है. जम्मू-कश्मीर भारत के संविधान के अधीन है.
जम्मू-कश्मीर में सिंतबर 2024 में कराए जाएं चुनाव
सीजेआई ने अपने फैसले में कहा कि हम चुनाव आयोग को सितंबर 2024 तक जम्मू-कश्मीर में चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने का निर्देश देते हैं. साथ ही सीजेआई ने कहा कि केंद्र के इस कथन के मद्देनजर कि जम्मू-कश्मीर को अपना राज्य का दर्जा फिर से मिलेगा, जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित करने की जरूरत नहीं थी.
सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने से पहले जम्मू-कश्मीर संविधान सभा की सिफारिश आवश्यक नहीं थी. 370 को हटाने का अधिकार जम्मू-कश्मीर के एकीकरण के लिए है. असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के राष्ट्रपति के फैसले के खिलाफ अपील में सुनवाई नहीं कर सकते. सीजेआई ने कहा कि दुर्भावनापूर्ण तरीके से इसे रद्द नहीं किया जा सकता.
राष्ट्रपति के पास अनुच्छेद 370 खत्म करने की शक्ति
CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पास कोई आंतरिक संप्रभुता भी नहीं थी. इसका संविधान भारत के संविधान के अधीन था. राष्ट्रपति के पास अनुच्छेद 370 खत्म करने की शक्ति थी. अनुच्छेद 370 को स्थायी व्यवस्था कहने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है.
आर्टिकल 370 को निरस्त करने के खिलाफ दायर की गई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने आज अपना फैसला सुनाया. साल 2019 में इसके खिलाफ दायर 18 याचिकाओं पर 16 दिन सुनवाई के बाद 5 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत समेत पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने आज इस पर फैसला सुनाया.
अनुच्छेद 370 मामले में अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमाणी, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे, राकेश द्विवेदी, वी गिरी और अन्य कोर्ट में केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए. वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से कपिल सिब्बल, गोपाल सुब्रमण्यम, राजीव धवन, जफर शाह, दुष्यंत दवे और अन्य वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अपनी दलीलें पेश की.
2019 में प्रावधानों को हटाने लिया गया था फैसला
केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने का निर्णय लिया था. केंद्र के इस फैसले के बाद जम्मू कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा छिन गया था और यह केंद्र के अधीन आ गया था. इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई.
मध्य प्रदेश: मोहन यादव को मिला मुख्यमंत्री पद, BJP ने राज्य की कमान सौंपी
भोपाल: मध्य प्रदेश में CM फेस को लेकर जारी सस्पेंस खत्म हो गया है. BJP ने मध्य प्रदेश की कमान राज्य के बड़े नेता मोहन यादव के हाथों में सौंपने का फैसला लिया है. यानी अब मध्य प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री मोहन यादव होंगे. पर्यवेक्षकों ने बीजेपी विधायक दल की बैठक के बाद मोहन यादव के नाम की घोषणा की. जबकि जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ल प्रदेश के डिप्टी सीएम होंगे. पार्टी ने नरेंद्र सिंह तोमर विधानसभा अध्यक्ष बनाया है.
सुबह करीब 11 बजे केंद्रीय पर्यवेक्षक राजधानी भोपाल पहुंचे और जिसके बाद कोर ग्रुप के साथ बैठक की. बैठक में राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, पर्यवेक्षकगण हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. के लक्ष्मण, पार्टी की राष्ट्रीय सचिव आशा लाकड़ा, मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा, नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद पटेल और प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा बैठक में मौजूद रहे. जिसके बाद विधायकों के साथ बैठक हुई और सीएम के नाम पर मंथन हुआ. विधायक दल की बैठक में सीएम का नाम तय होने के बाद मुख्यमंत्री चेहरे का ऐलान हुआ.
जानिए राजनीतिक सफर
छात्र राजनीति से करियर की शुरुआत करने वाले मोहन यादव बीजेपी के स्थापित नेता हैं.उज्जैन संभाग के बड़े नेताओं में उनकी गिनती होती है. मोहन यादव माधव विज्ञान महाविद्यालय से छात्र राजनीति की शुरुआत की थी. पार्टी में कई पदों पर रहने के बाद सरकार में उन्हें पहले मंत्री बनने का मौका मिला और अब वे प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने हैं. कई बार वह बयानों को लेकर प्रदेश की राजनीति में चर्चा में रहे हैं.1982 में वे माधव विज्ञान महाविद्यालय छात्रसंघ के सह-सचिव और 1984 में माधव विज्ञान महाविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे हैं.
मोहन यादव ने वर्ष 1984 मे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद उज्जैन के नगर मंत्री और 1986 मे विभाग प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली. यही नहीं वर्ष 1988 में वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद मध्यप्रदेश के प्रदेश सहमंत्री और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रहे हैं. 1989-90 में परिषद की प्रदेश इकाई के प्रदेश मंत्री और सन 1991-92 में परिषद के राष्ट्रीय मंत्री रह चुके हैं. 1993-95 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, उज्जैन नगर के सह खंड कार्यवाह, सायं भाग नगर कार्यवाह और 1996 में खण्ड कार्यवाह और नगर कार्यवाह रहे हैं.
संघ में सक्रियता की वजह से मोहन यादव 1997 में भाजयुमो प्रदेश समिति में अपनी जगह बनाई.1998 में उन्हें पश्चिम रेलवेबोर्ड की सलाहकार समिति के सदस्य भी बने.इसके बाद उन्होंने संगठन में रहकर अलग-अलग पदों पर काम किया. 2004-2010 के बीच वह उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष (राज्यमंत्री दर्जा) रहें. 2011-2013 में मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम, भोपाल के अध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री दर्जा) भी बने.
गुटखा प्रचार मामला: शाहरुख खान, अक्षय कुमार, और अजय देवगन को नोटिस, अगली सुनवाई की तारीख 9 मई 2024
दिल्ली: हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ को भारत सरकार के डिप्टी सॉलिसिटर जनरल ने जानकारी है कि, गुटखा कंपनियों का प्रचार करने के मामले में अक्षय कुमार शाहरुख खान और अजय देवगन को बीते अक्टूबर महीने में नोटिस जारी किया गया है. यह भी कहा गया कि, उसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट भी सुनवाई कर रहा है तो यह याचिका खारिज कर दी जाए. इस पर कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 9 मई 2024 की तारीख तय कर दी. यह आदेश जस्टिस राजेश सिंह चौहान की एकल पीठ ने एक अवमानना याचिका पर पारित किया.
बता दें कि, अधिवक्ता मोतीलाल यादव ने एक याचिका दायर कर कहा था कि, भारत सरकार के द्वारा पदम सम्मान से सम्मानित कलाकारों के द्वारा गुटखा का प्रचार किया जा रहा है. कलाकारों के द्वारा गुटखा का प्रचार कर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है. इसी याचिका पर नोटिस का जवाब नहीं देने पर बीते अगस्त 2023 को हाईकोर्ट ने कैबिनेट सेक्रेटरी, चीफ कमिश्नर और उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण को अवमानना का नोटिस जारी किया गया था.
नोटिस का जवाब दाखिल करते हुए शुक्रवार को सुनवाई के दौरान डिप्टी सॉलिसिटर जनरल ने कहा, 20 अक्टूबर को महीने में अभिनेता शाहरुख खान अक्षय कुमार और अजय देवगन को नोटिस दिया जा चुका है. वही अभिनेता अमिताभ बच्चन ने गुटखा कंपनी से एग्रीमेंट खत्म होने के बावजूद विज्ञापन में दिखाने पर संबंधित पान मसाला कंपनी को लीगल नोटिस भेजा है. हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 मई में 2024 तय की है.
"पीएम मोदी विश्व नेताओं में 76% अप्रूवल के साथ टॉप पर, COP33 की मेजबानी का ऐलान किया"
पीएम मोदी देश में ही नहीं दुनियाभर में काफी लोकप्रिय हैं. इस बात का अंदाजा मॉर्निंग कंसल्ट के एक सर्वेक्षण में पीएम मोदी को मिली रेटिंग से लगाया जा सकता है. सर्वे के मुताबिक पीएम मोदी वैश्विक नेताओं में एक बार फिर टॉप पर हैं, उनको 76 प्रतिशत की अप्रूवल रेटिंग मिली है. अमेरिका की कंसल्टेंसी फर्म के 'ग्लोबल लीडर अप्रूवल रेटिंग ट्रैकर' के मुताबिक, भारत में 76 फीसदी लोग पीएम मोदी के नेतृत्व को स्वीकार करते हैं, जबकि 18 फीसदी लोगों को उनका नेतृत्व पसंद नहीं है. वहीं छह फीसदी लोगों ने इस अपनी अपनी कोई राय नहीं दी.
रेटिंग के मामले में पीएम मोदी के आसपास कोई भी नहीं हैं. सर्वे में दूसरे नंबर पर मेक्सिको के राष्ट्रपति एंड्रेस मैनुअल लोपेज़ ओब्रेडोर हैं, उनको 66 प्रतिशत रेटिंग मिली है. वहीं तीसरे नंबर पर स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति एलेन बर्सेट को 58 प्रतिशत रेटिंग मिली हैं.पिछले सर्वेक्षणों में भी प्रधानमंत्री मोदी वैश्विक रेटिंग में टॉप पर थे, जब कि अन्य बड़े वैश्विक नेताओं की अप्रूवल रेटिंग काफी कम है.
रेटिंग लिस्ट में ये वैश्विक नेता दूसरे और तीसरे नंबर पर
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को अप्रूवल रेटिंग 37 प्रतिशत है, जब कि कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो को 31 प्रतिशत और यूके के पीएम ऋषि सुनक को 25 प्रतिशत रेटिंग मिली है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन को सर्वे में सिर्फ 24 प्रतिशत रेटिंग मिली है. पीएम मोदी की टॉप रेटिंग खासकर बीजेपी द्वारा हिंदी भाषी राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में भारी जीत दर्ज करने के बाद सामने आई है. इसको 2024 में होने वाले आम चुनाव से पहले पीएम मोदी और उनकी पार्टी के लिए एक बड़े प्रोत्साहन के रूप में देखा जा रहा है.
2028 में भारत करेगा COP33 की मेजबानी
इस बीच, प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में दुबई में कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज-28 (COP28) जलवायु कार्रवाई शिखर सम्मेलन में भाग लिया. पीएम मोदी ने कहा कि भारत उन कुछ देशों में से है, जो जलवायु परिवर्तन से निपटने की कोशिशों के तहत इच्छित राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) को पूरा करने की राह पर आगे बढ़ रहा हैं, इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत 2028 में COP33 की मेजबानी करेगा.
अपनी यूएई यात्रा के दौरान, पीएम मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का ग्लोबल साउथ के देशों पर व्यापक प्रभाव पड़ा है. उन्होंने रेखांकित किया कि भारत समेत वैश्विक दक्षिण के देशों की जलवायु परिवर्तन में भूमिका छोटी है, लेकिन उन पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव बहुत अधिक है.
"सरकार ने फर्जी ऑनलाइन जॉब वेबसाइट्स को बंद किया; 100 कंपनियों पर कार्रवाई का आदान-प्रदान"
अब ऑनलाइन जॅाब देने के नाम पर आपके साथ कोई ठगी नहीं होगी . क्योंकि सरकार ने ऐसी कंपनियों को चिंहित करना शुरू कर दिया है. यही नहीं 100 कंपनियों पर कार्रवाई भी की जा चुकी है. यानि इन कंपनियों पूरी तरह बैन कर दिया है.
कोरोना के बाद से गूगल पर वर्क फ्रॉम जॉब्स और पार्ट टाइम जॉब सबसे ज्यादा सर्च किये जाने वाले वर्ड हैं. इन्हीं का फायदा जालसाज उठाते हैं. साथ ही पार्ट टाइम व ऑनलाइन वर्क का हवाला देकर लोगों से ठगी कर लेते हैं. गृह मंत्रालय के अलर्ट के बाद ऐसी फेक कंपनियों पर कार्रवाई की गई है…
ये वेबसाइट्स बेरोजगारों के सीधे माइंड पर व़ार करती है. और ऐसे सपने दिखाती हैं जैसे उन्हें कुछ किये बगैर ही पैसा मिलना शुरू हो जाएगा. अधिकतर वेबसाइट्स पर घर बैठे ऑनलाइन वर्क के नाम पर 3000 रुपए प्रति दिन कमाएं. या पार्ट टाइम जॅाब करके प्रतिदिन 5000 रुपए कमाएं जैसे भ्रामक विज्ञापन होते हैं.
नेशनल साइबर क्राइम थ्रेट एनालिसिस यूनिट के इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर ने पिछले हफ्ते इन वेबसाइट की पहचान की और सेंटर ने इन्हें बंद करने की सिफारिश दे दी. एक्सपर्ट संदीप के मुताबिक” ये वेबसाइट यूजर्स को गलत तरीके से जॉब और निवेश का ऑफर देकर ठगी का शिकार बना रही थीं. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत इन वेबसाइट को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ब्लॉक किया
फ्रॉड का तरीका
इन वेबसाइट्स का संचलन विदेश से चल रहा है. वहां बैठे साइबर ठग लोगों को फंसाने के लिए डिजिटल विज्ञापन, चैट मैसेंजर्स और किराए पर लिए गए अकाउंट की मदद ले रहे हैं. साथ ही इन पर जॅाब संबंधी भ्रामक व फेक विज्ञापन डालकर लोगों से पैसे ऐंठ रहे हैं. धोखाधड़ी से आई रकम को ये लोग क्रिप्टो करेंसी, विदेशों में एटीएम निकासी और अंतराष्ट्रीय फिनटेक कंपनियों के जरिए निकाल लेते हैं.
मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने फिलहाल 100 वेबसाइट्स को बंद किया है. बताया जा रहा है कि अन्य फेक वेबसाइट्स की जांच की जा रही है. आरोप सिद्ध होते ही इन पर भी कार्रवाई की जाएगी. साथ ही सूचना एव प्रोद्योगिकी मंत्रालय ने लोगों से भी अपील की है कि इस तरह की फर्जी वेबसाइट्स से नौकरी देने वालों के झांसे में ने आएं.
आयकर छापेमारी में धीरज साहू और उनके करीबियों के ठिकानों से 200 करोड़ रुपए कैश जब्त, बलदेव साहू ग्रुप से जुड़े हैं
भुवनेश्वर: कांग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज साहू और उनके करीबियों के ठिकानों पर आयकर विभाग की छापेमारी में 200 करोड़ रुपए कैश बरामद किए गए हैं. छापेमारी में 9 अलमारियां नोटों से भरी पाई गईं और नोटों को गिनने के लिए मशीनें मंगवानी पड़ी. अभी भी नोटों की गिनती चल रही है. ऐसे में जब्त रकम अभी और बढ़ सकती है.
धीरज साहू शराब बनाने वाली कंपनी बलदेव साहू एंड ग्रुप ऑफ कंपनीज से जुड़े हैं. आयकर विभाग ने ग्रुप के झारखंड-ओडिशा और बंगाल के 10 ठिकानों पर छापेमारी की, जिसमें बोलांगीर स्थित कार्यालय से 30 किलोमीटर दूर सतपुड़ा ऑफिस में छापेमारी में 200 करोड़ रुपए कैश बरामद किए हैं. इतनी बड़ी संख्या में कैश मिलने के बाद आयकर विभाग की टीम ने मशीनों से नोटों को गिनकर बैग में रखा, लेकिन जब बैग कम पड़ गए तो बोरियों में नोट भरे गए और उसके बाद एक ट्रक में डालकर इन्हें बैंक ले जाया गया.
बता दें कि बलदेव साहू एंड ग्रुप ऑफ कंपनीज पश्चिमी ओडिशा की सबसे बड़ी देशी शराब निर्माता और विक्रेता कंपनियों में से एक है. कंपनी में कांग्रेस सांसद धीरज साहू के अलावा उनके परिवार के राजकिशोर साहू, स्वराज साहू और परिवार के अन्य सदस्य शामिल हैं. ओडिशा का कारोबार उनके भाई संजय साहू और दीपक साहू संभालते हैं.
"भारत में चीन से आए नए बैक्टीरिया ने फैलाई टेंशन: माइक्रोप्लाजमा निमोनिया के मामले बढ़ते हुए"
दिल्ली: कोरोना अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था कि एक बार चीन से आए एक नए बैक्टीरिया ने भारत की टेंशन बढ़ा दी है. दरअसल भारत में एक नए चाइनीज बैक्टीरिया माइक्रोप्लाजमा न्यूमोनिया की एंट्री हो चुकी है जिसकी जद में छोटे बच्चे आ रहे हैं. यह बीमारी चीन में हाहाकार मचा रही है. दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) अस्पताल ने अप्रैल से सितंबर के बीच माइकोप्लाज्मा निमोनिया के सात मामलों का पता लगाया है.
एम्स ने पीसीआर और आईडीएम एलिसा नामक दो परीक्षणों के जरिए चीन में बच्चों में सांस की बीमारी पैदा करने वाले बैक्टीरिया माइकोप्लाज्मा निमोनिया के सात केस दर्ज किए हैं. पीसीआर और आईजीएम एलिसा परीक्षणों की पॉजिटिविटी रेट तीन और 16 प्रतिशत पाया गया है. यही वजह है कि चीन से आए कोरोना को झेलने के बाद भारत में अब इस बीमारी को लेकर डर फैलने लगा है.
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में माइकोप्लाज्मा निमोनिया का पता लगाने के लिए सर्वेलांस बढ़ाने की जरूरत है. एम्स दिल्ली ने इस साल अप्रैल और सितंबर के बीच माइकोप्लाज्मा निमोनिया के सात मामलों की जांच की है जो चीन में फैली बीमारी की वजह है. लैंसेट माइक्रोब में प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि एक केस की जांच संक्रमण के शुरुआती चरण में किए गए पीसीआर टेस्ट जबकि बाकी छह मामलों का पता आईजीएम एलिसा परीक्षण के जरिए लगाया था.
ऐसा तब हुआ है जब चीन और कई अन्य यूरोपीय देशों में ‘वॉकिंग निमोनिया’ के मामलों में वृद्धि देखी गई है. ‘वॉकिंग निमोनिया’ एक बोलचाल का शब्द है जिसका उपयोग निमोनिया के हल्के रूप को बताने के लिए किया जाता है. सामान्य निमोनिया के विपरीत वॉकिंग निमोनिया अक्सर जीवाणु माइकोप्लाज्मा निमोनिया के कारण होता है. भारत में इसके केस मिलने की वजह से चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि चार साल पहले दिसंबर 2019 में चीन से ही कोविड शुरू हुआ था जो दुनियाभर में फैल गया. एम्स दिल्ली में माइक्रोबायोलॉजी विभाग के पूर्व प्रमुख और कंसोर्टियम की सदस्य डॉ रामा चौधरी ने एक अंग्रेजी अखबार को बताया कि माइकोप्लाज्मा निमोनिया को 15-20% कम्युनिटी एक्वायर्ड निमोनिया का कारण माना जाता है.
डॉ. चौधरी, जो वर्तमान में एनआईएमएस, जयपुर में डीन हैं, ने कहा, ‘इस जीवाणु के कारण होने वाला निमोनिया आमतौर पर हल्का होता है इसलिए इसे ‘वॉकिंग निमोनिया’ भी कहा जाता है. लेकिन इसके गंभीर मामले भी सामने आ सकते हैं.’ एम्स दिल्ली माइकोप्लाज्मा निमोनिया के प्रसार की निगरानी करने वाले वैश्विक संघ का भी हिस्सा है. माइकोप्लाज्मा निमोनिया संक्रमण सबसे ज्यादा छोटे बच्चों और स्कूल जाने वाले बच्चों को अपनी चपेट में लेता है लेकिन यह किसी को भी प्रभावित कर सकता है. भीड़-भाड़ वाली जगहों पर रहने और संक्रमण वाली जगह पर रहने या काम करने वाले लोगों को इसका खतरा ज्यादा है.
"तेलंगाना: अनुमुला रेवंत रेड्डी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, 11 विधायकों ने ग्रहण की मंत्री पद की शपथ"
तेलंगाना कांग्रेस विधायक दल के नेता अनुमुला रेवंत रेड्डी ने राज्य के दूसरे मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है. रेवंत रेड्डी के साथ 11 विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ग्रहण की. तेलंगाना की राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन ने रेड्डी को सीएम पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. शपथ ग्रहण समारोह हैदराबाद के एलबी स्टेडियम में आयोजित किया गया था.
बता दें कि साल 2014 में आंध्र प्रदेश से अलग तेलंगाना के गठन के बाद रेवंत रेड्डी राज्य के दूसरे मुख्यमंत्री हैं। विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने भारत राष्ट्र समिति (BRS) को हराकर 119 में से 64 सीट जीती हैं. रेवंत रेड्डी सीएम पद की शपथ लेने के लिए शपथ ग्रहण समारोह में फूलों से सजी एक खुली जीप में पहुंचे. रेड्डी ने शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए लोगों को खुला निमंत्रण दिया. उन्होंने कहा था कि ‘जनता की सरकार’ आज कार्यभार संभालेगी, जो लोकतांत्रिक तथा पारदर्शी शासन को महत्व देगी.
इन 11 नेताओं ने ली मंत्री पद की शपथ
इस शपथ ग्रहण समारोह में भट्टी विक्रमार्क मल्लू ने राज्य के उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। मंत्री पद की शपथ लेने वाले 10 नेताओं में दामोदर राजा नरसिम्हा, उत्तम कुमार रेड्डी, कोमाटिरेड्डी वेंकट रेड्डी, सीताक्का, पोन्नम प्रभाकर, श्रीधर बाबू, तुम्मला नागेश्वर राव, कोंडा सुरेखा, जुपल्ली और कृष्णा पोंगुलेटी शामिल हैं.
शपथ ग्रहण समारोह में ये हुए शामिल
शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार भी शामिल हुए. शपथ ग्रहण कार्यक्रम में करीब एक लाख लोग पहुंचे.