संस्कृति
Mahavir Jayanti 2025: सत्य, अहिंसा और संयम का पर्व, 10 अप्रैल को मनाया जाएगा भगवान महावीर का जन्मोत्सव…
Mahavir Jayanti 2025: इस वर्ष महावीर जयंती गुरुवार, 10 अप्रैल 2025 को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाएगी. यह पर्व जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है. भगवान महावीर का जन्म लगभग 599 ईसा पूर्व बिहार के वैशाली में हुआ था. यह भगवान महावीर की 2624वीं जन्म जयंती है. उनका जीवन सत्य, अहिंसा, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह जैसे पंचशील सिद्धांतों पर आधारित था.
कब है अक्षय तृतीया? एक क्लिक में पढ़ें पर्व को मनाने की खास वजह
अक्षय तृतीया के पर्व को आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन अबूझ मुहूर्त होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya 2025) के अवसर पर सभी कामों को करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस दिन सोना और चांदी खरीदना शुभ माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन विशेष चीजों का दान करने से धन लाभ के योग बनते हैं। साथ ही सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। क्या आप जानते हैं कि आखिर क्यों अक्षय तृतीया का त्योहार मनाया जाता है? अगर नहीं पता, तो आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।
अक्षय तृतीया 2025 डेट और शुभ मुहूर्त (Akshaya Tritiya 2025 Date and Shubh Muhurat)
वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 29 अप्रैल को शाम 05 बजकर 31 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन यानी 30 अप्रैल को दोपहर 02 बजकर 12 मिनट पर तिथि खत्म होगी। सनातन धर्म में सूर्योदय तिथि का विशेष महत्व है। ऐसे में इस बार 30 अप्रैल को (Kab Hai Akshaya Tritiya 2025) अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाएगा। अक्षय तृतीया के दिन पूजा करने का शुभ मुहूर्त सुबह 05 बजकर 41 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक है। इस दौरान किसी भी समय साधक पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 15 मिनट से 04 बजकर 58 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त - कोई नहीं
विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 31 मिनट से 03 बजकर 24 मिनट तक
सर्वार्थ सिद्धि योग - पूरे दिन
गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 55 मिनट से 07 बजकर 16 मिनट तक
अक्षय तृतीया का धार्मिक महत्व (Akshaya Tritiya 2025 Significance)
अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर दान करने का विशेष महत्व है। मान्यता के अनुसार, इस दिन दान करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। साथ ही मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है। पौराणिक कथा के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि यानी अक्षय तृतीया से सतयुग की शुरुआत हुई थी। मान्यता है कि अक्षय तृतीया से ही वेद व्यास जी ने महाभारत को लिखने की शुरुआत की थी।
इसके अलावा अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान परशुराम जी का जन्म हुआ था। भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम माने जाते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भगवान परशुराम ऋषि जमदग्नि और राजकुमारी रेणुका के पुत्र थे। अक्षय तृतीया के दिन परशुराम जयंती का पर्व भी मनाया जाता है।
हनुमान जन्मोत्सव 12 अप्रैल
" हनुमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह परनाम ।
राम काज कीन्हें बिनु मोहि कहां विश्राम ।।"
श्री रामचरित मानस के सुंदर कांड में गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा यह पंक्तियां यूं ही नहीं रच दी गईं हैं । इन पंक्तियों का सार पूरी रामायण में स्पष्ट समझा जा सकता है । भगवान श्री राम से वानर राज सुग्रीव की मित्रता का प्रसंग हो या फिर सीता माता की खोज की योजना , प्रभु श्री राम के अनुज को शक्तिबाण लगने के बाद संजीवनी बूटी लाकर उनके प्राणों की रक्षा का संकल्प , दशानन के भ्राता विभीषण के हृदय में प्रभु श्री राम के प्रति आस्था का दीप प्रज्ज्वलित करने तक इन पंक्तियों का अर्थ भलीभांति समझ में आता है । जब तक प्रभु श्री राम के द्वारा सौंपा गया कार्य सिद्ध नहीं हो जाता , उनके अनन्य भक्त हनुमान जी कहते हैं , उन्हें विश्राम नहीं करना है ! हनुमान जी के उक्त संकल्प के अनेक उदाहरण रामचरित मानस और रामायण में उल्लेखित हैं । इस संदर्भ में सबसे सटीक प्रमाण सुंदर कांड में ही हमारे समक्ष आता है । लंका की ओर जाते समय हनुमान जी को मैनाक पर्वत ने कुछ समय के लिए अपने ऊपर विश्राम करने का निमंत्रण दिया । अपने प्रभु की भक्ति और कर्मनिष्ठा से ओत - प्रोत हनुमान जी ने मैनाक पर्वत को अपने हाथों से स्पर्श कर प्रणाम किया और बड़े ही विनम्र भाव के साथ कहा :- " अपने प्रभु का काम संपन्न किए बिना मुझे विश्राम नहीं करना है ।"
हनुमान जी इस कलियुग के अकेले ऐसे चिरंजीव प्रभु श्री राम के सेवक हैं , जो आज भी उनके कार्यों को संपन्न कर रहे हैं । हनुमान जी के मस्तिष्क में कूट - कूट कर भरी हुई प्रबंध क्षमता यह बताती है कि उनसे बड़ा " मैनेजमेंट गुरु " कोई और नहीं ! हनुमान जी की प्रबंधन क्षमता का सबसे बाद प्रसंग उस वक्त सामने आता है , जब वे माता सीता की खोज में लंका प्रवेश करते हैं । वे इस विचार में खोए होते हैं कि इतनी बड़ी स्वर्ण नगरी में माता का ठिकाना कैसे और किससे पता करें ? उनके विचारों को पूर्णता मिली जब उन्होंने विभीषण के घर के द्वार पर तुलसी का पौधा , स्वस्तिक और धनुष - बाण के चिन्ह देखे । उनकी तीक्ष्ण बुद्धि से उन्होंने जान लिया कि असुरों की इस स्वर्ण नगरी में कोई तो सज्जन निवास कर रहा है ! उन्होंने विभीषण से दोस्ती की और अपनी प्रबंधन क्षमता का परिचय देते हुए प्रभु श्री राम के गुणों से विभीषण को अवगत कराया ! उन्होंने विभीषण को सीधे - सीधे प्रभु श्री राम के खेमे में शामिल होने का आमंत्रण नहीं दिया । हनुमान जी ने विभीषण के अंतर्मन में प्रभु श्री राम के प्रति उत्सुकता का बीज बो दिया ! जब लंकापति रावण ने भरी सभा में विभीषण का अपमान किया तब विभीषण को हनुमान जी और उनकी कही बातें याद आई और वह सीधे प्रभु श्री राम की शरण में पहुंच गया ! यह बजरंगबली की प्रबंधन क्षमता का ही परिणाम था कि उन्होंने यह समझ लिया था कि लंका पर जीत के लिए किसी ऐसे व्यक्ति की प्रबल जरूरत होगी जो लंका के हर कोने से , वहां रहने वाले लोगों से भलीभांति परिचित हो ! उन्हें विभीषण में वह व्यक्ति नजर आया ।
हनुमान जी का अवतार ही प्रभु श्री राम की सहायता के लिए हुआ था । स्कंद पुराण में उल्लेख मिलता है कि भगवान भोलेनाथ के ग्यारहवें रुद्रावतार द्वारा ही श्री विष्णु के राम - अवतार की सहायता की जाएगी । यही कारण था कि भगवान शिव - शंकर ने श्री विष्णु से दास्य ( दास ) रूप में अवतार का वरदान प्राप्त किया । भगवान शंकर के समक्ष बड़ा धर्म संकट था कि जिस रावण के वध हेतु वे श्री राम की सहायता करना चाहते हैं , वह उनका परम भक्त भी है ! इसी रावण ने अपने दस शीश को अर्पित कर भगवान शंकर के दस रुद्रों को संतुष्ट कर रखा था । आखिरकार ग्यारहवें रुद्र के रूप में भगवान भोलेनाथ ने अपने अंशावतार को हनुमान रूप में प्रभु श्री राम की सहायता के लिए अवतरित किया । इतना ही नहीं स्वर्ग के सारे देवताओं ने ग्यारहवें रुद्र के रूप में जन्मे हनुमान जी को अपार शक्तियां प्रदान की । विद्या - बुद्धि से लेकर बल - बुद्धि तक उनकी चतुरता का कोई सानी नहीं था । सर्व - शक्तिशाली होकर हनुमान जी ने अपने आराध्य के प्रति समर्पण का जो भाव अपने अंदर बनाए रखा, उसी के चलते वे एक कुशल प्रबंधक के रूप में स्थापित हुए । हनुमान जी अतुलित बलशाली होते हुए भी भक्ति की अनुपम मिसाल बने रहे ! उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर मर्यादा पुरुषोत्तम ने उन्हें वरदान दिया कि मुझसे भी ज्यादा तुम्हारे मंदिर होंगे और कलियुग में लोग अपने संकटों से मुक्ति पाने के लिए तुम्हारी ही उपासना करेंगे !
हनुमान जी ऐसे भक्त और सेवक सिद्ध हुए हैं जिन्होंने बड़े - बड़े काम करने के बाद भी अपनी शक्ति पर अंहकार नहीं किया ! उन्होंने सारे राम काज का श्रेय भी अपने प्रभु श्री राम को ही दिया । हमने सुंदर कांड में देखा है कि रावण की लंका दहन करने के बाद जब वे अपने आराध्य के पास पहुंचे तब प्रभु श्री राम द्वारा उनकी शक्ति और काम की प्रशंसा को भी उन्होंने अपने प्रभु की कृपा ही करार दिया । जब प्रभु श्री राम ने पूछा कि इतने विशाल समुद्र को उन्होंने कैसे पार किया ? कैसे इतनी बड़ी लंका को अग्नि के हवाले किया ? हनुमान जी ने बड़ी ही विनम्रता के साथ कहा यह सब आपकी कृपा का ही फल है । " प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहि..." अर्थात ये सब प्रताप तो आपकी मुद्रिका का ही था जिसे मुंह में रखकर ही मैने सौ योजन समुद्र लांघा ! प्रभु श्री राम ने तब कहा मुद्रिका जब तुमने जनक नंदनी को सौंप दिया तब वापसी में कैसे सागर लांघा ? हनुमान जी की प्रबंधन क्षमता यहां भी सामने आई और उन्होंने बड़ी ही सहजता के साथ कहा - प्रभु लौटते समय मां जानकी का चूड़ामणि मेरे पास था और मैं इस पार आ सका । अपने आराध्य के प्रति श्रद्धा और भक्ति का ऐसा दृश्य अन्यत्र दुर्लभ है । रामचरित मानस के सुंदर कांड में ही आई चौपाई भी इस बात को सिद्ध करती है कि महाबली हनुमान ने अपने द्वारा किए गए हर कार्य को प्रभु श्री राम की कृपा का आधार सिद्ध कर दिखाया । उन्होंने ऐसे ही प्रश्न पर प्रभु श्री राम के समक्ष कहा -
" ता कहूं प्रभु कछु अगम नहीं , जा पर तुम अनुकूल ।
तव प्रभाव बड़वानलही, जारि सकई
खलु तूल ।।"
अर्थात हे ! प्रभु इस संसार में उस व्यक्ति के लिए कुछ भी असंभव नहीं जिस पर आपकी कृपा हो । एक रूई का रेशा भी समुद्र की आग को जला सकता है !
Shani Budh Gochar 2025: शनि और गुरु करेंगे नक्षत्र परिवर्तन, चमकाएंगे 4 राशियों की किस्मत…
Shani Budh Gochar 2025: जब भी शनि और गुरु ग्रह नक्षत्र बदलते हैं, तो इसका प्रभाव सभी राशियों पर किसी न किसी रूप में अवश्य पड़ता है. यह एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटना जल्द ही घटित होने वाली है.
Pashupatinath Avatar: किन कारणों की वजह से भगवान शिव को लेना पड़ा पशुपति नाथ का रूप? जानिए अवतार की कथा और महत्व…
भगवान शिव को देवों के देव के रूप में पूजा जाता है. उन्होंने जगत के कल्याण के लिए अनेक रूप धारण किए हैं, जिनका प्रत्येक रूप अपनी विशेषता और महत्व रखता है. उन्हीं में से एक रूप है पशुपतिनाथ. इस अवतार के पीछे क्या कारण छिपा है, जिसके कारण भगवान शिव ने यह रूप धारण किया?
कब और कैसे करें मां लक्ष्मी के चालीसा का पाठ? जानें इसके शुभ समय और विधि…
Maa Lakshmi Chalisa: लक्ष्मी चालीसा का पाठ मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने और घर में सुख-समृद्धि लाने के लिए किया जाता है. इसका पाठ आप नियमित रूप से कर सकते हैं, लेकिन कुछ विशेष दिन और विधि ज्यादा फलदायी मानी जाती है.
Hanuman Janmotsav 2025: कब मनाया जाएगा हनुमान जन्मोत्सव? जानिए पूजा विधि और शुभ मुहूर्त…
Hanuman Janmotsav 2025: इस वर्ष हनुमान जन्मोत्सव 12 अप्रैल 2025, शनिवार को मनाई जाएगी. संकटमोचन, बल, बुद्धि और भक्ति के देवता हनुमान जी के जन्मोत्सव पर देशभर में धार्मिक आयोजन होते हैं. हर वर्ष चैत्र मास की पूर्णिमा को यह जन्मोत्सव धूमधाम से मनाई जाती है. मान्यता है कि इस दिन पूजा-अर्चना से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.
Baisakhi 2025: कब मनाया जाएगा बैसाखी पर्व? सिख धर्म के लिए क्यों है यह खास…
बैसाखी पर्व 13 अप्रैल को पूरे उल्लास और आस्था के साथ मनाया जाएगा. यह पर्व सिख धर्म में खालसा पंथ की स्थापना और किसानों के लिए रबी फसल की कटाई का प्रतीक है. पंजाब सहित देशभर में यह त्योहार सांस्कृतिक उत्सव और धार्मिक श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. बैसाखी पर्व खास इसलिए होता है क्योंकि इसमें धार्मिक, सांस्कृतिक और कृषि से जुड़ी भावनाएं एक साथ जुड़ी होती हैं.
Mangal Gochar 2025: शनि के नक्षत्र में मंगल का गोचर, इन राशियों के लिए लेकर आने वाला है बंपर लाभ…
Mangal Gochar 2025: 12 अप्रैल 2025 को मंगल ग्रह शनि के पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेगा. यह गोचर कुछ राशियों के लिए विशेष रूप से फलदायक सिद्ध हो सकता है. पुष्य नक्षत्र को वैदिक ज्योतिष में अत्यंत शुभ माना जाता है, और जब इसमें तेजस्वी ग्रह मंगल प्रवेश करता है, तो साहस, पराक्रम और ऊर्जा में वृद्धि देखी जाती है.
Kamada Ekadashi 2025: कब रखा जाएगा कामदा एकादशी का व्रत ? जानें क्या है इस एकादशी का महत्व…
Kamada Ekadashi 2025: कामदा एकादशी का महत्व धार्मिक, आध्यात्मिक और कर्म के स्तर पर बहुत गहरा है. यह एकादशी व्रत न केवल पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है, बल्कि मनोकामना पूर्ति और जीवन में सुख-शांति के लिए भी इसे अत्यंत प्रभावशाली बताया गया है.
Navratri Maha Ashtami 2025: चैत्र नवरात्रि की महाअष्टमी आज, जानें कन्या पूजन का महत्व और शुभ मुहूर्त…
Navratri Maha Ashtami 2025: आज शनिवार, 5 अप्रैल 2025 को चैत्र नवरात्रि की महाअष्टमी तिथि है. यह दिन देवी उपासना में विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है. महाअष्टमी के दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप — मां महागौरी की पूजा की जाती है. मान्यता है कि मां महागौरी की आराधना से समस्त कष्टों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है.
कन्या पूजन में बालक को हलवा-पूड़ी क्यों खिलाते हैं? जानिए इसके पीछे की धार्मिक और तांत्रिक मान्यता…
Kanya Pujan: नवरात्रि में भक्तगण कन्या पूजन कर उन्हें हलवा-पूड़ी का भोग अर्पित करते हैं. कन्या पूजन में एक बालक को विशेष रूप से हलवा-पूड़ी खिलाने की परंपरा धार्मिक और तांत्रिक मान्यताओं से जुड़ी हुई है. इसे भैरव स्वरूप मानकर भोजन कराना शक्ति और शिव के संतुलन, पूजन की पूर्णता और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा के लिए आवश्यक माना जाता है.
Shani Gochar 2025: शनि करेंगे अपने ही नक्षत्र में गोचर, इन राशियों का शुरू होगा गोल्डन टाइम…
Shani Gochar 2025: रंक को राजा और राजा को रंक बनाने की शक्ति रखने वाले शनिदेव 28 अप्रैल को सुबह 7:52 बजे उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. न्याय के देवता शनिदेव व्यक्ति को उसके अच्छे-बुरे कर्मों के आधार पर फल देते हैं, जिसका व्यापक प्रभाव जातक के जीवन पर पड़ता है.
Chardham Yatra 2025: रोज़ाना बन रहे ऑनलाइन पंजीकरण के नए रिकॉर्ड, जानें कपाट खुलने की तिथियां…
Chardham Yatra 2025: चारधाम यात्रा 2025 को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है. अब तक 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने ऑनलाइन पंजीकरण करा लिया है. यह संख्या हर दिन तेज़ी से बढ़ रही है. उत्तराखंड सरकार और यात्रा प्रशासन ने इस साल यात्रा को अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित बनाने के लिए विशेष तैयारियां की हैं.
सालभर इन 3 राशियों पर रहेगी शनि की साढ़ेसाती, जानें बचने के उपाय…
Shani Sade Sati: शनि देव का 29 मार्च 2025 को कुंभ से मीन राशि में गोचर हुआ, जिसके बाद कई राशियों पर साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव शुरू हुआ है.
Chaitra Navratri 2025: डोंगरगढ़ में सज रहा मां का दरबार, चैत्र नवरात्र में उमड़ेगा आस्था का सैलाब…
डोंगरगढ़. घने जंगलों और ऊंची पहाड़ियों के बीच बसा डोंगरगढ़ एक बार फिर नवरात्र महोत्सव के लिए तैयार है. चैत्र नवरात्र 30 मार्च से 6 अप्रैल तक रहेगा, यानी इस बार नवरात्र 8 दिनों का होगा और इस दौरान लाखों श्रद्धालु मां बमलेश्वरी के दर्शन के लिए यहां पहुंचेंगे. पर्व की भव्यता को देखते हुए मंदिर ट्रस्ट, जिला प्रशासन, रेलवे और सुरक्षा एजेंसियां व्यापक इंतजाम कर रही हैं. मंदिर परिसर को भव्य रोशनी रंगबिरंगी झालरों और फूलों से सजाया गया है. दर्शनार्थियों के लिए रोपवे सेवा केवल दिन में उपलब्ध रहेगी, जिसका किराया ₹100 (आना-जाना) और ₹70 (सिर्फ एकतरफा) तय किया गया है. सुरक्षा व्यवस्था को और मज़बूत करने के लिए इस बार 1200 पुलिस जवानों की तैनाती की गई है.
Shani Gochar 2025: 30 साल बाद शनिदेव ने किया मीन राशि में प्रवेश, जाने आपकी राशि पर क्या पड़ेगा असर…
Shani Gochar 2025: शनि ग्रह लगभग ढाई वर्ष (2.5 साल) में एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं और लगभग 30 वर्षों में पूरे 12 राशियों का एक चक्र पूरा कर लेते हैं. इस चक्र को ज्योतिष में शनि की साढ़े साती और ढैय्या जैसी अवधारणाओं से जोड़ा जाता है, जो विभिन्न राशियों और व्यक्तियों के जीवन पर अलग-अलग प्रभाव डालती हैं.