संस्कृति
श्रीमद्भागवत और भगवद्गीता में क्या है अंतर: जानिए कौन-सा ग्रंथ बढ़ाता है ज्ञान, भक्ति और जीवन का संतुलन
Bhagavad Gita vs Shrimad Bhagavatam Teachings: सनातन धर्म में दो ऐसे ग्रंथ हैं जिनका अध्ययन जीवन को सही दिशा देता है, श्रीमद्भागवत महापुराण और भगवद्गीता. दोनों ही भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े हैं, लेकिन इनके उद्देश्य, शैली और प्रभाव में गहरा अंतर है. यदि आप जीवन में आत्मिक संतुलन और मन की शांति चाहते हैं, तो रोज एक श्लोक गीता से और एक कथा भागवत से पढ़ने की आदत डालें. इससे ज्ञान और भक्ति दोनों बढ़ेंगे, और आप जीवन की हर स्थिति का सामना सहजता से कर पाएंगे.
देवउठनी एकादशी पर करें ये खास उपाय, प्रसन्न होंगे भगवान विष्णु और शनि देव
Dev Uthani Ekadashi 2025: देवउठनी एकादशी का दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है. लेकिन ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस शुभ दिन पर शनि देव को प्रसन्न करने और उनके दोषों (जैसे शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या) को कम करने के लिए भी कुछ विशेष उपाय किए जा सकते हैं. देवउठनी एकादशी मुख्य रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का दिन है. इसलिए, आप शनि देव के उपाय करने के साथ-साथ भगवान विष्णु के मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप और तुलसी पूजन अवश्य करें.
Devuthani Ekadashi 2025: 1 या 2 नवंबर, कब है देवउठनी एकादशी, जानें व्रत नियम और पूजा के शुभ मुहूर्त…
Devuthani Ekadashi 2025: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे हरि-प्रबोधिनी या देवउठनी एकादशी कहा जाता है, इस वर्ष 1 नवंबर 2025 को मनाई जाएगी. पंचांग के अनुसार यह तिथि 1 नवंबर को सुबह 9:11 बजे से शुरू होकर 2 नवंबर को 7:31 pm बजे तक रहेगी. उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए यह व्रत 2 नवंबर को ही मान्य रहेगा.
देवउठनी एकादशी पर दुर्लभ त्रिस्पर्शा योग; विष्णु जागरण, तुलसी विवाह और मांगलिक कार्यों का शुभ संयोग
2 नवंबर को इस वर्ष की देवोत्थान एकादशी पर एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ योग बन रहा है। त्रिस्पर्शा योग, जिसमें एक साथ एकादशी, द्वादशी और त्रयोदशी तिथियों का संगम होगा। यह संयोग वर्षों बाद बन रहा है और इसे सभी मांगलिक कार्यों, विवाह, गृहप्रवेश तथा धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।
Ahoi Ashtami 2025 : संतान की लंबी उम्र के लिए माताएं आज रखेंगी अहोई अष्टमी का व्रत, जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त…
Ahoi Ashtami 2025 : इस साल अहोई अष्टमी व्रत 2025 आज यानी 13 अक्टूबर को मनाया जा रहा है. यह व्रत हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है. माताएं इस दिन अपनी संतान की सुख-समृद्धि, दीर्घायु और मंगलकामना के लिए निर्जला उपवास रखती हैं. शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत का पालन करने से संतान के जीवन में खुशहाली और तरक्की आती है.
इस बार अहोई माता की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:53 से 7:08 बजे तक रहेगा. पूजा के बाद माताएं तारे निकलने पर अर्घ्य देकर व्रत का पारण करेंगी.
अहोई अष्टमी पूजा विधि
अहोई अष्टमी की पूजा संतान वाली महिलाएं या संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाली महिलाएं करती हैं. दीवार पर अहोई माता और स्याऊ (साहीन) का चित्र बनाकर या छपा हुआ चित्र लगाकर पूजा की जाती है.
- पूजन के समय दीवार पर चौक बनाकर एक लोटे में जल और कलश रखकर अहोई माता की विधिवत पूजा करें.
- पूजा के बाद अहोई माता की कथा सुनी जाती है.
- चांदी की अहोई स्याऊ की माला गले में पहनने का विशेष महत्व है.
- व्रत पूरा होने के बाद माताएं चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं और संतान की लंबी उम्र की कामना करती हैं.
Ahoi Ashtami 2025 के दिन भूलकर भी न करें ये 5 काम
- मन में नकारात्मक विचार या किसी की बुराई न करें.
- मिट्टी, चाकू, सुई, कैंची आदि से संबंधित कार्य न करें.
- सूर्योदय से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें.
- व्रत के दिन दूध का सेवन न करें, केवल तारा दर्शन के बाद ही व्रत तोड़ें.
- किसी पशु या गाय को नुकसान न पहुंचाएं — उन्हें गुड़ या चारा खिलाना शुभ माना गया है.
तारे निकलने का समय
अहोई अष्टमी 2025 पर तारे शाम 7:32 बजे निकलेंगे. इसके बाद माताएं अर्घ्य देकर व्रत का समापन करेंगी और संतान की दीर्घायु की प्रार्थना करेंगी.
इस पावन व्रत के बारे में कहा जाता है कि अहोई माता की कृपा से घर में सुख-शांति, संतान की रक्षा और समृद्धि बनी रहती है.
कमजोर आत्मविश्वास या बिगड़े हालात? अपनाएं सूर्यदेव के ये उपाय, जल्द दिखेगा कमाल!
अगर जीवन में आत्मविश्वास की कमी महसूस हो रही है, सरकारी कार्यों में लगातार रुकावट आ रही है या पिता के साथ मतभेद बढ़ते जा रहे हैं, तो इसका कारण आपकी जन्म कुंडली में कमजोर सूर्य हो सकता है.
Karwa Chauth 2025 : पति की लंबी आयु के लिए आज सुहागिन महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और छत्तीसगढ़ में चंद्र उदय का समय …
Karwa Chauth 2025 : देशभर की सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु आज करवा चौथ (Karwa Chauth) व्रत कर रही है. पति-पत्नी के अटूट प्रेम और समर्पण का यह पर्व विवाहित महिलाएं निर्जला उपवास रखकर अपने जीवनसाथी की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और दांपत्य सुख की कामना के लिए करती हैं.
कार्तिक माह शुरू: सूर्योदय से पहले स्नान का क्या है महत्व
कार्तिक मास को सबसे पवित्र महीनों में गिना गया है. इस महीने में सूर्योदय से पहले स्नान करना न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि स्वास्थ्य और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है. पुराणों में उल्लेख है कि इस माह का ब्रह्ममुहूर्त स्नान व्यक्ति को पापों से मुक्त कर मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग दिखाता है.
कार्तिक मास में इन 5 स्थानों पर दीपदान का है विशेष फल
कार्तिक मास को धार्मिक दृष्टि से सबसे पवित्र महीनों में गिना जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, इसकी शुरुआत 8 अक्टूबर से हो चुकी है. 5 नवंबर तक कार्तिक महीना है. इस पूरे महीने में पूजा-पाठ, स्नान, दान और दीपदान का विशेष महत्व होता है.
Kartik Maas 2025 : कार्तिक मास में दीप, अन्न और आंवला दान का है खास महत्व, लेकिन भूलकर भी ना करें काम
Kartik Maas 2025 : रायपुर. हिंदू धर्म में कार्तिक मास को हिन्दू धर्म का सबसे पवित्र महीना माना गया है. ऐसी मान्यता है कि इस महीने भगवान विष्णु अपनी योगनिद्रा से जागते हैं और इसी दिन से सभी शुभ कार्यों की शुरुआत होती है. कार्तिक मास में स्नान, दान, दीपदान और पूजा का विशेष महत्व होता है. इस समय किए गए पुण्य कर्म से मनुष्य को सौभाग्य और शांति की प्राप्ति होती है.
Valmiki & Meera Bai Jayanti 2025 : आज ही के दिन जन्मे थे रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मिकी और श्री कृष्ण की परम भक्त मीरा बाई…
हिंदू पंचांग के अनुसार, 7 अक्टूबर 2025, मंगलवार का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष है. इस दिन आश्विन माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि सुबह 9 बजकर 16 मिनट तक रहेगी. इसके बाद कार्तिक माह की प्रतिपदा तिथि प्रारंभ हो जाएगी. इसी दिन महर्षि वाल्मीकि जयंती और मीरा बाई जयंती मनाई जाएगी.
शरद पूर्णिमा 2025: क्यों होती है शरद पूर्णिमा में राधा-कृष्ण की पूजा, जानिए महारास का रहस्य
Sharad Purnima 2025: अश्विन माह की पूर्णिमा तिथि को शरद पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है. इस वर्ष यह खास तिथि 6 अक्टूबर को पड़ रही है. मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणों से अमृत की वर्षा होती है. यही कारण है कि इसे साल भर की 12 पूर्णिमाओं में सबसे अलौकिक पूर्णिमा माना जाता है. शरद पूर्णिमा पर एक ओर जहां धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष विधान है, वहीं दूसरी ओर श्री राधा-कृष्ण की पूजा भी अत्यंत शुभ मानी जाती है. हालांकि, बहुत कम लोग ही जानते हैं कि इस दिन राधा रानी और श्रीकृष्ण की पूजा क्यों होती है.
Shardiya Navratri 2025 : नवरात्र के आठवें दिन होती है मां महागौरी की पूजा, जानिए तिथि और शुभ मुहूर्त …
शारदीय नवरात्रि के मां दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा उपासना का खास महत्व होता है. लेकिन नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि सबसे महत्पूर्ण तिथि होती है. अष्टमी और नवमी तिथि पर मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना के साथ कन्या पूजन, उनको भोजन और उपहार देकर शारदीय नवरात्रि व्रत का पारण किया जाता है. शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की आराधना के पर्व नवरात्र के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है. ऐसी मान्यता है कि इनकी पूजा से भक्त को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. मां सौभाग्य और मानसिक शुद्धता की देवी मानी जाती हैं. दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और मां की आरती करें.
नवरात्रि विशेष: यहां गिरा था मां सती का सिर, जानिए सुरकंडा देवी की अद्भुत कहानी
नवरात्रि का पर्व आते ही देशभर के देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ने लगती है. इस दौरान श्रद्धालु शक्ति पीठों और सिद्ध स्थलों की ओर रुख करते हैं. उत्तराखंड का सुरकंडा देवी मंदिर भी उन्हीं पवित्र स्थानों में से एक है, जहाँ नवरात्रि पर विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं और दूर-दराज़ से भक्त माता के दर्शन के लिए पहुँचते हैं.
Shardiya Navratri 2025 : नवरात्र के छठे दिन होती है मां कात्यायनी की पूजा, इस मंत्र का करें जाप
नवरात्र के पावन अवसर पर मां भगवती के छठे स्वरूप कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाएगी. इस स्वरूप के माध्यम से माता ने पिता के कुल की रक्षा का संदेश दिया है. कात्यायन ऋषि ने तपस्वी होकर देवी से वरदान मांगा कि वे पुत्री रूप में उनके कुल में जन्म लें. देवी ने ऋषि की प्रसन्नता के लिए अपना अजन्मा स्वरूप त्याग कर पुत्री रूप में जन्म लिया.
ज्योतिष में चंद्रमा को मन का कारक क्यों माना जाता है ?
ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन, भावनाओं और मानसिक स्थिति का मुख्य कारक माना जाता है. यह ग्रह सीधे हमारे मन को प्रभावित करता है और व्यक्ति की भावनात्मक स्थिरता, संवेदनशीलता और सोचने की क्षमता से जुड़ा होता है. जैसे सूर्य आत्मा का प्रतीक है, वैसे ही चंद्रमा मन का अधिपति है. चंद्रमा जल तत्व का ग्रह होने की वजह से यह मानसिक तरंगों और भावनाओं को नियंत्रित करता है. इसीलिए कुंडली में चंद्रमा की स्थिति से व्यक्ति के मन की शांतिपूर्ण या चंचल प्रकृति का पता चलता है.
Shardiya Navratri 2025 : नवरात्र के पांचवें दिन होती है मां स्कंदमाता की पूजा, इस मंत्र का जाप कर मां को करें प्रसन्न …
Shardiya Navratri 2025 : नवरात्र के पांचवें दिन देवी भगवती के पांचवें स्वरूप, मां स्कंदमाता की आराधना की जाएगी. मां स्कंदमाता का यह स्वरूप नारी शक्ति और मातृ शक्ति का सजीव प्रतीक है. स्कंदकुमार (कार्तिकेय) की माता होने के कारण इनका नाम स्कंदमाता पड़ा. यह स्वरूप भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह मातृत्व की अद्वितीय शक्ति और सामर्थ्य को दर्शाता है.