रोजगार
दूसरे ब्रह्मांडों के राज खुलेंगे, बीमारियों की सटीक दवाएं बनेंगी:इस साल फिजिक्स, केमेस्ट्री और मेडिसिन के किन आविष्कारों को मिला नोबेल; आसानी से समझें
जानते हैं इस साल विज्ञान की दुनिया में किन खोजों को नोबेल के लिए चुना गया है। शुरुआत मेडिसिन से.… साल 2026 का फिजियोलॉजी और मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार संयुक्त रूप से कार्ल डेइसेरोथ, पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागेल को दिया गया। उन्हें यह पुरस्कार एक ऐसे प्रोटीन (algae protein) की खोज के लिए मिला जो लाइट पड़ने पर काम करता है और जिसका इस्तेमाल नर्व सेल्स को समझने के लिए एक स्विच के तौर पर किया जा सकता है। अब हमारे दिमाग के न्यूरॉन्स या नर्व्स को रोशनी के जरिए ऑन-ऑफ किया जा सकेगा। ब्रह्मांड की शुरुआत और बदलावों को पढ़ा जा सकेगा और गंभीर बीमारियों की दवाओं के साइड इफेक्ट्स को कम किया जा सकेगा। ऑप्टोजेनेटिक्स कैसे करते हैं काम इस खोज को 'ऑप्टोजेनेटिक्स' (optogenetics) नाम दिया गया है। साइंटिस्ट ने 'ऑप्सिन्स' (opsins) लाइट-सेंसिटिव प्रोटीन की खोज की है। इसे खास सेल्स में डाला जा सकता है। हमारे दिमाग में करोड़ों नर्व सेल्स (neurons) होते हैं। ये एक-दूसरे से छोटे-छोटे इलेक्ट्रिक सिंगनल्स (electrical signals) के जरिए बात करते हैं। इससे किसी खास सेल्स (जैसे याददाश्त) को बाकी सेल्स को प्रभावित किए बिना ऑन या ऑफ किया जा सकेगा। ये दिमाग की कोशिकाओं का लाइट स्विच भी कहा जा सकता है। कैसे काम करेगा लाइट स्विच ये एक लाइट स्विच की तरह काम करेगा। सामान्य स्थिति में नर्व बंद रहता है। लेकिन रोशनी पड़ने पर ये खुल जाता है और कोशिका में ions का फ्लो शुरू हो जाता है। इससे सेल्स की इलेक्ट्रिक एक्टिविटी बदल जाएगी। इसने नर्व सिस्टम में बदलाव करने और उनके प्रभावों का बहुत बारीकी से अध्ययन किया जा सकेगा। गंभीर बीमारियों में काम आएगी रिसर्च इस आविष्कार के बाद साइंटिस्ट को इसका फायदा मिलेगा। पहले वैज्ञानिक ये देख सकते थे कि किसी सेल की एक्टिविटी और उसके नेचर के बीच रिलेशन है। लेकिन ये प्रूव करना मुश्किल था कि ये सेल उस नेचर का कारण है या नहीं। ऑप्टोजेनेटिक्स से इसका फायदा मिलेगा। सेल्स को सीधे ऑन/ऑफ करके कॉज एंड इफैक्ट को समझा जा सकता है। इसका उपयोग याददाश्त, भावनाएं, व्यवहार, मूवमेंट और सेल्स सर्किट के लिए किया जा सकेगा। जिसमें मेंटल डिसॉर्डर स्किजोफ्रेनिया (schizophrenia), अल्जाइमर (Alzheimer) , पार्किंसंस (Parkinson) और मिर्गी (epilepsy) जैसी न्यूरोलॉजिकल, सायकियाट्रिक कंडीशन जैसी गंभीर बीमारियों को समझने के नए रास्ते मिलेंगे। क्या इसका इस्तेमाल अभी सीधे मरीजों के इलाज में हो सकेगा ऑप्टोजेनेटिक्स का इस्तेमाल रिसर्च में किया जाएगा। विजन रेस्टोरेशन जैसे संभावित उपचारों पर क्लीनिकल रिसर्च कर रहे हैं। इसलिए इसे अभी सामान्य इलाज की तकनीक नहीं माना जा सकेगा। ये रिसर्च फ्रांसिस क्रिक की दी गई एक थ्योरी पर आधारित है। क्रिक एक मॉलिक्यूलर बायोलॉजिस्ट थे जिन्होंने DNA के डबल हेलिक्स स्ट्रक्चर की खोज की थी और इसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार भी मिला था। अब बात फिजिक्स के नोबेल की फिजिक्स में न्यूट्रिनो का पता लगाने और उनकी रिसर्च के लिए बेल्जियम-अमेरिकी वैज्ञानिक फ्रांसिस हैल्जेन को नोबेल मिला। हमारे ब्रह्मांड में जो एक चीज सबसे ज्यादा है, वो है फोटॉन्स यानी लाइट के पार्टिकल्स। दूसरे नंबर पर आते हैं न्यूट्रिनो। जो स्पेस में होने वाली न्यूक्लियर रिएक्शंस से बनते हैं। इनमें ब्रह्मांड के कई राज छिपे होते हैं, मगर क्योंकि ये किसी चीज से टकराते नहीं, इसलिए इन्हें पकड़ना नामुमकिन है। साइंस में इन्हें ‘घोस्ट पाटिर्कल्स’ कहा जाता है। इस रिसर्च में इन्हीं घोस्ट पार्ट को खोजा है। कैसे मिलेंगे ‘घोस्ट पार्ट्स’ अंटार्कटिका में बर्फ की परतों के नीचे एक खास सिस्टम बनाया, ताकि इन मुश्किल से मिलने वाले पार्टिकल (कणों) का पता लगाया जा सके। फ्रांसिस हैल्जेन ने अंटार्कटिका की 2 किलोमीटर गहरी और साफ बर्फ के अंदर 1 क्यूबिक किलोमीटर का एक जाल बनाया और इसमें ऐसे सेंसर्स लगाए जो न्यूट्रिनो के बर्फ से टकराने पर निकली हल्की नीली रोशनी को पकड़ लेते हैं। इससे ये पता लगा सकते हैं कि ये पार्टिकल्स ब्रह्मांड के किस कोने से आए हैं और अपने साथ क्या जानकारी लाए हैं। आइसक्यूब से पार्टिकल्स का पता चला इस रिसर्च से पहले तक सिर्फ उन्हीं न्यूट्रिनो का पता लगाया जा रहा था जो पृथ्वी के आस-पास से आते थे और मुख्य रूप से सूरज में बनते थे। दरअसल पृथ्वी से गुजरने वाले ज्यादातर न्यूट्रिन सूरज के अंदर होने वाली न्यूक्लियर रिएक्शन से बनते हैं। अब इस रिसर्च के बाद गैलेक्सी के बाहर से आने वाले न्यूट्रिनो का पता चलने से ब्रह्मांड के बारे में जानकारी मिलने का रास्ता खुल गया है। इससे पहले तक वैज्ञानिकों के पास ब्रह्मांडीय घटनाओं का अध्ययन करने के लिए सिर्फ दृश्य प्रकाश (visible light) का ही ऑप्शन था। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स बेंगलुरु की वैज्ञानिक डी. इंदुमती ने कहा कि ये अलग-अलग तरह के सिग्नल मिलकर 'मल्टी-मैसेंजर एस्ट्रोनॉमी' को संभव बनाते हैं। यानी अलग-अलग तरह के सिग्नलों का इस्तेमाल करके एक ही ब्रह्मांडीय घटना का अध्ययन किया जा सकता है। क्यों ये रिसर्च बहुत बड़ी है दरअसल न्यूट्रिनो का पता लगाना इतना मुश्किल इसलिए है क्योंकि उनमें पदार्थ (matter) के साथ इंटरैक्ट करने की क्षमता बहुत कम होती है। नोबेल अवार्ड कमेटी के मुताबिक ‘शाय पार्टिकल्स’ बिना किसी रुकावट के बहुत घने इलाकों से भी गुजर जाते हैं। अरबों-खरबों न्यूट्रिन हर सेकंड हमारे शरीर और पृथ्वी से होकर गुजरते हैं, लेकिन हमें इसका पता तक नहीं चलता।
यानी साइंटिस्ट सीधे न्यूट्रिनो को नहीं देखते, बल्कि उसके टकराने से पैदा हुई रोशनी के संकेत को पकड़ते हैं। अंटार्कटिका की बर्फ ही क्यों? इस रिसर्च के लिए वहां लाखों-करोड़ों टन बहुत साफ और पारदर्शी बर्फ मौजूद है। इसमें हजारों सेंसर लगाए गए हैं। जब न्यूट्रिनो बर्फ से टकराता है, तो पैदा होने वाली रोशनी से वैज्ञानिक पता लगा सकते हैं कि न्यूट्रिनो आया कहां से? उसमें कितनी ऊर्जा थी? उसकी दिशा क्या थी? वह किस तरह की खगोलीय घटना से आया होगा? इसकी सबसे बड़ी खोज क्या है
अब बात केमिस्ट्री के नोबेल की केमिस्ट्री का नोबेल हेनरी बी. कागन और केन्सो सोआई को नोबेल केमिस्ट्री में 2026 का नोबेल पुरस्कार हेनरी बी. कागन और केन्सो सोआई को ‘असिमेट्रिक ऑर्गेनिक सिंथेसिस में नॉन-लीनियर इफेक्ट्स और ऑटो-कैटालिसिस की खोज’ के लिए दिया गया है। आसान शब्दों में इन वैज्ञानिकों ने एक ऐसा तरीका खोजा है, जिससे केमिकल रिएक्शन में एक तरह के मॉलिक्यूल ज्यादा और उनकी मिरर इमेज (प्रतिबिंब) कम बनती है। इसमें बनने वाला प्रोडक्ट वही होता है जो रिएक्शन कराने वाला एजेंट (कैटलिस्ट) में पाया जाता है। मिरर-इमेज हैं जिनका कंपोजीशन एक जैसा है इसे एक उदाहरण से समझें 1950 के दशक में प्रेगनेंट महिलाओं के लिए मॉर्निंग सिकनेस की दवा बनाई गई। मगर अगले दशक तक 46 से ज्यादा देशों में अपंग बच्चों के जन्म की दर बढ़ गई। तब पता चला कि कुछ अमीनो एसिड्स के बिल्कुल मॉलिक्यूल्स दरअसल दो अलग-अलग फॉर्म में भी मौजूद होते हैं। इनका कंपोजीशन एक जैसा होता है, मगर ये एक दूसरे के मिरर-इमेज होते हैं। जैसे हमारा दांया और बांया हाथ। कमेस्ट्री में इसे चिरैलिटी कहते हैं चिरैलिटी का शरीर पर क्या प्रभाव होता है? दो मिरर इमेज में से एक चिरैलिटी हमारे DNA में मौजूद होता है, जबकि दूसरा इसका नुकसान पहुंचाता है। हेनरी बी. कागन और केन्सो सोआई ने पहली बार ऐसी रिएक्शन तकनीक खोजी है, जिससे लेबोरेट्री में केवल 1 तरह का चिरैल मॉलिक्यूल बनाया जा सके। यानी DNA से जुड़ी बीमारियों के इलाज में अब और सटीक दवाएं इस्तेमाल हो सकेंगी। इस तरह का रिएक्शन सालों से केमिस्ट्री की सबसे मशहूर पहेलियों में से एक था, और जब सोआई ने आखिरकार ये रिएक्शन खोजा (जिसे 'सोआई रिएक्शन' कहा जाता है), तो इसे अब तक के सबसे बेहतरीन केमिकल प्रयोगों में से एक माना गया। अभी तक वैज्ञानिक ऐसा कोई तरीका नहीं ढूंढ पाए थे। वे जब किसी भी तरह का कोई एक्सपेरीमेंट कर रहे थे, तो मॉलिक्यूल से एक ही तरह के रिएक्शन नजर आ रहे थे जिनमें एक असली था और एक बिल्कुल उसकी मिरर इमेज की तरह। जिससे वैज्ञानिकों के लिए ये समझना मुश्किल था कि असल में हमारी बॉडी के लिए कौन सा असली (कैटलिस्ट) है, जिसे दवाओं का असर भी प्रभावित करता था। उदाहरण के लिए हमारे दोनों हाथों को देखिए। दायां और बायां हाथ एक-दूसरे के प्रतिबिंब जैसे हैं, लेकिन उन्हें एक-दूसरे के ऊपर रखने पर वे पूरी तरह एक जैसे नहीं बैठते। फार्मा में दवाएं बनाने के लिए ये जरूरी रिसर्च है फार्मा में अभी तक ऐसी दवाएं बनाई जाती थीं जिनमें अक्सर ऐसे कैटलिस्ट का इस्तेमाल किया जाता था जिनमें दोनों मेटल एटम रियल और मिरर इमेज दोनों ही शामिल होते थे। उनका मानना था कि अगर कैटलिस्ट में दोनों मिरर-इमेज बराबर मात्रा हो, तो बनने वाले प्रोडक्ट में भी उसके दोनों एनैन्टिओमर की बराबर मात्रा होनी चाहिए। सबसे अहम खोज ये थी कि मिला-जुला कैटलिस्ट अलग तरह से काम करता था। ये बाकी दो कैटलिस्ट की तुलना में रिएक्शन को बहुत धीमी गति से आगे बढ़ाता था। 1986 में, कागन ने तीन ऐसे एसिमेट्रिक रिएक्शन के बारे में बताया जिनमें ये नॉन-लीनियर प्रभाव दिखाई देते थे। उन्होंने फ्रैंक के मॉडल की दूसरी कमी को पूरा किया शुरुआती एसिमेट्री को बढ़ाने का एक तरीका। नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) नोबेल पुरस्कार दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार है, डायनामाइट के आविष्कारक अल्फ्रेड नोबेल की याद में दिया जाता है। इसकी शुरुआत 10 दिसंबर 1901 में हुई। अब तक मिले भारतीयों को नोबेल ------------------------------- ग्राफिक्स- विपुल शर्मा ---------------------------- ये खबर भी पढ़ें.. 135 साल पुरानी लाइब्रेरी क्यों तोड़ना चाहती है सरकार:प्रस्ताव- 2 कमरों में शिफ्ट कर लें 8.9 लाख किताबें सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी देश की सबसे पुरानी और दूसरी सबसे बड़ी सरकारी लाइब्रेरी है। 1969 में शास्त्री भवन में स्थापित की गई ये लाइब्रेरी अब तक 5500 स्क्वायर मीटर में 4 मंजिल में संचालित की जा रही है। पूरी खबर पढ़ें..
करेंट अफेयर्स 9 अक्टूबर:घाना अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस में शामिल, बंगाल सरकार में मिथुन चक्रवर्ती सलाहकार नियुक्त
आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं नेशनल (NATIONAL) 1. घाना भारत की लीडरशिप वाले अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस में शामिल अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (IBCA) 2. 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक का आयोजन इंटरनेशनल (INTERNATIONAL) 3. ऐन कार्सन को 2026 का साहित्य नोबेल पुरस्कार मिला स्पोर्ट्स (SPORTS) 4. एशियाई पैरा खेल 2026 के भारतीय ध्वजवाहकों की घोषणा निधन (DEATH) 5. नाना पाटेकर का कार्डियक अरेस्ट से निधन मिसलिनियस (miscellaneous ) 6. बंगाल सरकार में मिथुन चक्रवर्ती को मिला कैबिनेट मंत्री का दर्जा आज का इतिहास : ये खबर भी पढ़ें करेंट अफेयर्स 8 अक्टूबर:वायुसेना के आशुतोष दीक्षित एयर चीफ मार्शल के लिए चुने गए, लियोनेल मेसी ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लिया आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें
करेंट अफेयर्स 10 अक्टूबर:इजराइल का राष्ट्रपति नागरिक वीरता पुरस्कार स्मित मच्छर को, नवनीतम पिल्लै शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित
आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं नेशनल (NATIONAL) 1. स्मित मच्छर को इजराइल का राष्ट्रपति नागरिक वीरता पुरस्कार विशेष डाक आवरण 2. कैंसर की गैर-अनुसूचित दवाओं के ट्रेड मार्जिन पर 30% की सीमा तय 3. निर्मला सीतारमण तीन दिवसीय सिंगापुर यात्रा पर 4. राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास शिखर सम्मेलन का दिल्ली में आयोजन इंटरनेशनल (INTERNATIONAL) 5. नवनीतम पिल्लै शांति के नोबेल पुरस्कार 2026 से सम्मानित 6. ट्रम्प ने टाटा-विप्रो को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड किया PERM आज का इतिहास : ------------------------------------------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें करेंट अफेयर्स 9 अक्टूबर:घाना अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस में शामिल, बंगाल सरकार में मिथुन चक्रवर्ती सलाहकार नियुक्त आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें
25 वर्ष और लक्ष्य से आगे की एक कहानी:पीएम मोदी की सत्ता की यात्रा से अधिक जिम्मेदारी की यात्रा है
भारत के राजनीतिक इतिहास में कुछ ऐसे व्यक्तित्व रहे हैं, जिनकी यात्रा केवल सत्ता के गलियारों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने संगठन निर्माण, विचारधारा, जनसेवा और राष्ट्र निर्माण की एक लंबी प्रक्रिया से गुजरते हुए अपनी राजनीतिक पहचान बनाई। नरेंद्र मोदी की राजनीतिक यात्रा को भी इसी व्यापक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। यह यात्रा एक ऐसे स्वयंसेवक की यात्रा है, जिसने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा से जनसेवा का संस्कार पाया, भारतीय जनता पार्टी के संगठन में काम करते हुए अपनी पहचान बनाई, गुजरात का नेतृत्व किया और प्रधानमंत्री के रूप में राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में स्वयं को स्थापित किया। 7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। 2026 में वे सरकार के प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूरे कर रहे हैं। इस अवधि में लोगों के जीवन स्तर में सुधार और देश की प्रगति के लिए उनके निरंतर प्रयास और योगदान रहे हैं। लेकिन नरेंद्र मोदी की कहानी 2001 से शुरू नहीं होती। इस लंबी यात्रा के पीछे दशकों का संगठनात्मक जीवन, अनुशासन और वैचारिक प्रशिक्षण रहा है। RSS के स्वयंसेवक से देश के सेवक तक नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन का विकास राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ गहराई से जुड़ा रहा है। उनका संगठनात्मक जीवन अहमदाबाद से शुरू हुआ। बाद में उन्होंने प्रचारक के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व की पृष्ठभूमि को समझने के लिए आरएसएस के स्वयंसेवक के रूप में उनकी भूमिका को समझना महत्वपूर्ण है। स्वयंसेवकों के जीवन में संगठन, अनुशासन, राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता और समाज के बीच लगातार काम करने पर जोर दिया जाता है। इसके बाद वे भारतीय जनता पार्टी के संगठन में सक्रिय हुए। विभिन्न स्तरों पर संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाते हुए वे राष्ट्रीय राजनीति में आगे बढ़े। इसलिए नरेंद्र मोदी की राजनीतिक यात्रा की एक महत्वपूर्ण बुनियाद संगठन निर्माण और कार्यकर्ता-केंद्रित राजनीतिक संस्कृति रही है। 7 अक्टूबर 2001 को जब नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री का पद संभाला, तब राज्य एक कठिन दौर से गुजर रहा था। 2001 में कच्छ सहित गुजरात के बड़े हिस्से में विनाशकारी भूकंप आया था। इससे पहले सूखा और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाएं भी राज्य को प्रभावित कर चुकी थीं। मोदी ने अपने विभिन्न वक्तव्यों में इन चुनौतियों का उल्लेख किया है। इसके बाद उन्होंने गुजरात में सुशासन का ऐसा मॉडल विकसित करने का प्रयास किया, जिसमें बुनियादी ढांचे का निर्माण, निवेश, बिजली, कृषि, प्रशासनिक सुधार और समग्र विकास प्राथमिकता बने। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी ने 13 वर्ष तक जिम्मेदारी संभाली। यह उनके प्रशासनिक अनुभव की महत्वपूर्ण नींव बनी, जिसने बाद में उनकी राष्ट्रीय भूमिका को भी आकार दिया।
भाजपा नेता से प्रधानमंत्री तक 2014 का लोकसभा चुनाव भारतीय राजनीति में एक निर्णायक मोड़ था। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को लोकसभा में पूर्ण बहुमत मिला। 26 मई 2014 को उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। 2019 में भाजपा को एक बार फिर पूर्ण बहुमत मिला। 2024 में नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इस यात्रा का एक विशेष रूप से उल्लेखनीय पक्ष यह है कि एक सामान्य संगठनात्मक कार्यकर्ता देश के सर्वोच्च निर्वाचित प्रशासनिक पद तक पहुंचा। 2014 के बाद नरेंद्र मोदी ने अपने साथ ‘प्रधान सेवक’ की अवधारणा को जोड़ा। उनके समर्थकों के लिए यह शब्द उनकी राजनीतिक शैली का प्रतीक बन गया। इस शैली का मूल विचार है कि सत्ता कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। ‘सबका साथ, सबका विकास’ से ‘विकसित भारत’ तक प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी का शासन बड़े पैमाने पर जनकल्याण और विकासोन्मुखी योजनाओं के लिए जाना जाता है। इनमें जनधन योजना, स्वच्छ भारत अभियान, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण जैसी योजनाएं शामिल हैं, जिनके माध्यम से लाखों लाभार्थियों तक पहुंचने का प्रयास किया गया। गरीबों का कल्याण सरकार की प्राथमिकताओं में प्रमुख रहा है। आवास, स्वच्छता, बैंकिंग, रसोई गैस, स्वास्थ्य सेवाओं और खाद्य सुरक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों को ध्यान में रखकर योजनाएं तैयार की गईं। इन कार्यक्रमों का मूल उद्देश्य गरीबों और समाज के कमजोर वर्गों तक बुनियादी सुविधाएं और आर्थिक अवसर पहुंचाना रहा है। ‘सबका साथ, सबका विकास’ की राजनीतिक अवधारणा आगे बढ़ते हुए ‘सबका प्रयास’ से जुड़ी और ‘विकसित भारत’ के व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य तक पहुंची।
डिजिटल इंडिया : शासन की बदली हुई तस्वीर मोदी युग की एक महत्वपूर्ण विशेषता भारत के सार्वजनिक जीवन का तेजी से डिजिटल होना है। डिजिटल भुगतान, यूपीआई, आधार आधारित सेवाएं, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे ने नागरिकों और सरकार के बीच संवाद और सेवाओं के स्वरूप को बदल दिया है। भारत की डिजिटल क्षमता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी महत्व मिला। 2023 में भारत की जी20 अध्यक्षता के दौरान डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, ग्लोबल साउथ और समावेशी विकास पर विशेष जोर दिया गया। यह बदलाव केवल तकनीकी परिवर्तन नहीं था। इसके साथ शासन को अधिक प्रत्यक्ष, तेज और नागरिक-केंद्रित बनाने का व्यापक प्रयास भी जुड़ा रहा।
महत्वपूर्ण फैसलों के जरिए नेतृत्व प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में ऐसे कई महत्वपूर्ण फैसले हुए, जिनका भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव पड़ा। इनमें 2016 की नोटबंदी, 2017 में जीएसटी की शुरुआत, 2019 में जम्मू-कश्मीर से जुड़े संवैधानिक बदलाव, नागरिकता संशोधन कानून तथा नए रेलवे और आपराधिक कानूनों में किए गए बदलाव शामिल हैं। इन फैसलों को जहां समर्थन मिला, वहीं उनकी आलोचना भी हुई। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में यह स्वाभाविक है। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय की वास्तविक परीक्षा उसके दीर्घकालिक प्रभाव, नागरिकों के अनुभव और संस्थागत असर से होती है। विश्व मंच पर नया भारत पिछले एक दशक में विश्व मंच पर भारत की भूमिका नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की एक महत्वपूर्ण पहचान बनी है। क्वाड, जी20, ग्लोबल साउथ, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर भारत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 2023 में जी20 की भारतीय अध्यक्षता विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही। नई दिल्ली में हुए जी20 शिखर सम्मेलन में अफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्य बनाया गया। यह भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं और वैश्विक दक्षिण की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता देने का एक महत्वपूर्ण संकेत था। मोदी की विदेश नीति का एक प्रमुख संदेश यह रहा है कि भारत विश्व व्यवस्था में केवल एक सहभागी के रूप में नहीं रहेगा, बल्कि प्रभाव पैदा करने में सक्षम एक मजबूत राष्ट्र की भूमिका निभाएगा।
स्वयंसेवक के मूल्य और प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री की यात्रा को समझने के लिए उनके स्वयंसेवक जीवन को समझना भी महत्वपूर्ण है। संघ परिवार से उन्हें संगठनात्मक मूल्य मिले। भाजपा में कार्यकर्ता के रूप में उनका लंबा अनुभव और प्रशासनिक नेतृत्व का अनुभव—इन तीनों स्तरों ने मिलकर उनके राजनीतिक व्यक्तित्व को आकार दिया। इसी कारण उनकी राजनीति में संगठन, कार्यकर्ता और जनभागीदारी को विशेष महत्व मिला है। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी वे अक्सर स्वयं को जनता का सेवक बताते रहे हैं। 2025 में प्रशासनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के बाद उन्होंने कहा था कि देशसेवा सबसे बड़ा सम्मान और कर्तव्य है। उन्होंने संविधान के मूल्यों से निर्देशित होकर सामूहिक लक्ष्य ‘विकसित भारत’ को हासिल करने के लिए और अधिक मेहनत करने का संकल्प व्यक्त किया था।
25 वर्ष : लक्ष्य से आगे की एक कहानी सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष व्यक्तिगत रूप से एक लंबी अवधि है। नरेंद्र मोदी के मामले में यह अवधि तीन विशिष्ट भूमिकाओं में फैली हुई है—आरएसएस के स्वयंसेवक, भाजपा के संगठनकर्ता और नेता तथा गुजरात के मुख्यमंत्री और भारत के प्रधानमंत्री। इन 25 वर्षों में भारत ने भी कई बदलाव देखे हैं। अर्थव्यवस्था, तकनीक, बुनियादी ढांचे, डिजिटल भुगतान, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, विदेश नीति और राजनीतिक सोच के स्तर पर अनेक परिवर्तन हुए हैं। देश इन परिवर्तनों को उनके नेतृत्व की उपलब्धियों के रूप में देखता है।
स्वतंत्र भारत के प्रधानमंत्री के रूप में मोदी का योगदान इसमें कोई संदेह नहीं कि स्वतंत्रता के बाद भारत के सबसे प्रभावशाली और परिवर्तनकारी प्रधानमंत्रियों में नरेंद्र मोदी का स्थान महत्वपूर्ण है। केवल चुनावी सफलता के आधार पर उनके योगदान का आकलन करना उचित नहीं होगा। उनके शासन की अपनी एक शैली रही है—निर्णय लेने में दृढ़ता, कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार, डिजिटल परिवर्तन, वैश्विक कूटनीति और देश के लिए दीर्घकालिक लक्ष्य निर्धारित करना। किसी भी नेतृत्व का वास्तविक योगदान समय की कसौटी पर परखा जाता है। उसके निर्णयों के स्थायी परिणाम, संस्थाओं पर प्रभाव, नागरिक जीवन में आए बदलाव और भावी पीढ़ियों पर उसके असर से उसका मूल्यांकन होता है। इस अर्थ में नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष स्वतंत्र भारत के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय हैं।
सेवा से संकल्प तक संघ की शाखा से शुरू हुई यह यात्रा गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यालय से होती हुई भारत के प्रधानमंत्री पद तक पहुंची है। एक संगठन में काम करने वाले कार्यकर्ता से देश का नेतृत्व करने वाले नेता तक और महत्वपूर्ण लक्ष्यों को हासिल करने का आह्वान करने वाले प्रधानमंत्री तक की यात्रा। यदि उनके 25 वर्षों की इस यात्रा को एक वाक्य में लिखा जाए, तो कहा जा सकता है: यह सत्ता की यात्रा से अधिक जिम्मेदारी की यात्रा है। पद की यात्रा से अधिक सेवा की यात्रा है। यह केवल एक व्यक्ति की यात्रा नहीं, बल्कि एक विचार और भारत के उस संकल्प की यात्रा है, जिसे वे ‘विकसित भारत’ के रूप में देखना चाहते हैं।
महाराष्ट्र में 5 महीनों से सड़कों पे हैं कैंडिडेट्स:आयोग की अर्थी निकाल रहे स्टूडेंट्स, जाने क्या है MPSC भर्ती विवाद
महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग यानी MPSC के खिलाफ बीते एक महीने से लगातार कैंडिडेट्स प्रदर्शन कर रहे हैं। पुणे में प्रदर्शनकारियों ने MPSC मुर्दाबाद के नारे लगाए और विरोध जताते हुए MPSC आयोग की अर्थी भी निकाली। आज 7 अक्टूबर को बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस पर सुनवाई की और 70 हजार खाली पदों और भर्ती प्रक्रिया पर महाराष्ट्र सरकार से तीन हफ्ते के भीतर जवाब मांगा। सरकार को तीन सप्ताह के भीतर भर्ती का रोडमैप पेश करना होगा। साथ ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आयोग की जांच कराने की बात कही। साथ ही कोर्ट ने कहा- 'हम कैंडिडेट्स की समस्या को समझ रहे हैं लेकिन उन्हें आंदोलन के बजाय पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए।'
MNS नेता राज ठाकरे पहुंचे, राहुल गांधी भी हो सकते हैं शामिल इससे पहल महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे भी प्रोटेस्ट में पहुंचे थे और 30 सितंबर को सीएम देवेंद्र फडणवीस से भी कैंडिडेट्स ने मुलाकात की थी। NCP विधायक रोहित पवार के मुताबिक राहुल गांधी 7-8 अक्टूबर को कैंडिडेट्स से मिल सकते हैं। MPSC आयोग के खिलाफ पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर कैंडिडेट्स लंबे समय से प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों की मुख्य मांग MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार का इस्तीफा है। MPSC आयोग के खिलाफ 5 महीनों से अलग-अलग विरोध प्रदर्शन 30 जून को छत्रपति संभाजीनगर में MPSC की परीक्षाओं को CBT (कंप्युटर बेस्ड टेस्ट) कराने के फैसले के खिलाफ कैंडिडेट्स ने आंदोलन शुरू किया था। स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया ( SFI) ने ऑनलाइन मोड में परीक्षाएं करवाने के फैसले का नोटिफिकेशन फाड़कर विरोध किया और परीक्षाएं ऑफलाइन कराने की मांग की थी। इसके बाद 16 जुलाई को संभाजीनगर में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स ने ऑफलाइन एग्जाम कराने की मांग को लेकर दोबारा प्रदर्शन शुरू किया था। ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा इंटरव्यू के बाद रद्द हुई अगस्त में ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में पेपर लीक मामला सामने आया था। MPSC ने फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट में ड्रग इंस्पेक्टर, ग्रुप-B पोस्ट के लिए भर्ती प्रक्रिया पेपर लीक के बाद रद्द कर दी थी। ये परीक्षा 22 मार्च 2026 को हुई थी और जुलाई में इसका रिजल्ट जारी होने के बाद इंटरव्यू हुए थे। इसके बाद प्रशासन के खिलाफ कैंडिडेट्स का आक्रोश ओर बढ़ गया। 27 अगस्त को विधायक रोहित पवार ने पेपर लीक मामले को लेकर 1 सितंबर को MPSC कार्यालय के बाहर आंदोलन की चेतावनी दी थी। पेपर लीक, परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर प्रदर्शन MPSC आयोग के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन जारी है, जहां पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था के पारदर्शिता को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। कांग्रेस की युवा इकाई के नेता भी आंदोलन में शामिल हैं। ये कैंडिडेट्स पिछले कुछ समय से परीक्षा प्रक्रिया, भर्ती में देरी और कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल कर रहे हैं। कैंडिडेट्स का गुस्सा सिर्फ एक परीक्षा का नहीं, बल्कि पूरी भर्ती और परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता है। पुणे में MPSC कैंडिडेट्स का आंदोलन फिलहाल तीन अलग-अलग जगहों पर चल रहा है और इन जगहों पर छात्रों की मांगें भी अलग हैं। आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग परीक्षा रद्द होने के बाद कैंडिडेट्स ने आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार और सचिव महेंद्र उत्तमराव हरपालकर की जवाबदेही तथा इस्तीफे की मांग तेज हो गई। उम्मीदवारों का कहना है कि महाराष्ट्र की सरकारी भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं, परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी और पारदर्शिता की कमी है। छात्रों ने परीक्षा पैटर्न में गड़बड़ियों और कुछ पदों में कटौती को भी अपना मुद्दा बनाया। इन कैंडिडेट्स की मुख्य मांगों में MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार का इस्तीफा और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं की जांच शामिल थी। सितंबर के आखिर में आंदोलन बड़ा हो गया और कैंडिडेट्स ने 2 अक्टूबर को बड़े प्रोटेस्ट का ऐलान किया। इसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कैंडिडेट्स से बातचीत की और आंदोलन स्थगित किया गया। इसके साथ ही कैंडिडेट्स ने स्टेनोग्राफर पद को बहाल करने की भी मांग की है। पेपर लीक मामले में आरोपी रहे अधिकारी अभिजीत लेंडवे के कार्यकाल में हुई सभी परीक्षाओं का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग भी की है। कई बड़े नेताओं और चेहरों ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया शिवसेना (UBT) के विधायक आदित्य ठाकरे पुणे पहुंचे और प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलकर उनके आंदोलन का समर्थन किया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्रों के आंदोलन और उनकी मांगों का समर्थन किया।
सांसद सुप्रिया सुले राज्य सरकार के मंत्री धनंजय मुंडे ने भी छात्रों के एक समूह से मुलाकात कर उनकी मांगों पर चर्चा की। MPSC चेयरमैन- मैं गुनहगार, तो तुरंत पद छोड़ूंगा आरोपों का जवाब देते हुए, MPSC के चेयरमैन विवेक भीमन्वार ने कहा कि कमीशन और राज्य सरकार ने ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए अलग-अलग हाई-लेवल कमेटियां बनाई हैं। पेपर लीक के मामले में पुलिस केस भी दर्ज किया गया है। एक बयान में भीमन्वार ने कहा, ‘मुझे इस बात का बहुत दुख है कि सच्चाई साफ होने के बावजूद, मेरी छवि खराब करने के मकसद से मुझ पर निजी और राजनीतिक कारणों से आरोप लगाए जा रहे हैं। पद संभालने के बाद से मैंने MPSC में कई सुधार किए हैं।’ साथ ही उन्होंने कहा कि हमने कुल 84 परीक्षाएं सफलतापूर्वक आयोजित की हैं। हालांकि, अगर मेरे खिलाफ एक भी सबूत मिलता है, तो मैं एक पल के लिए भी इस पद पर नहीं रहूंगा। मैंने पहले ही साफ कर दिया है कि ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने की घटना मेरे पद संभालने से पहले की है। आयोग- ग्रुप C की परीक्षा में पद बढ़ाए जाएंगे सरकार की MPSC विवाद को लेकर सफाई है कि MPSC के मौजूदा और पूर्व अध्यक्षों तथा सदस्यों के कामकाज की तीन महीने के भीतर न्यायिक जांच कराई जाएगी। MPSC की परीक्षाएं ऑफलाइन ही कराए जाने या किसी भी तरह के बदलाव के प्रस्ताव पर कैंडिडेट्स से चर्चा जरूर की जाएगी। इसके साथ ही सरकार ने कैंडिडेट्स की मांग पर ग्रुप C की 3 जनवरी को होने वाली परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाने, तीन साल की भर्तियों की योजना बनाने और रिटायरमेंट से खाली होने वाले पदों को भरने से भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की भी बात कही। साथ ही कैंडिडेट्स के लिए एक सिंगल कार्ड सिस्टम लाने का प्रस्ताव भी रखा गया, ताकि हर परीक्षा के लिए बार-बार डॉक्युमेंट्स जमा न करने पड़ें। इन आश्वासनों के बाद 2 अक्टूबर को प्रस्तावित आंदोलन को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया था, लेकिन अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग को लेकर दोबारा आंदोलन शुरू हो गए हैं। ---------------------- ये खबर भी पढ़ें.. DU कॉलेज में तय सीटों से ज्यादा एडमिशन पर विवाद:टीचर्स ने कुलपति को चिट्ठी लिखी, कमान अपने हाथ में लें
DU के हिंदू कॉलेज में एडमिशन में धांधली को लेकर घमासान मचा हुआ है। इसके विरोध में खुद दिल्ली यूनिवर्सिटी के शिक्षक और हिंदू कॉलेज स्टाफ एसोसिएशन (HCSA) सड़क पर उतर आए हैं और एडमिशन में धांधली की बात कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें..
करेंट अफेयर्स 8 अक्टूबर:वायुसेना के आशुतोष दीक्षित एयर चीफ मार्शल के लिए चुने गए, लियोनेल मेसी ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लिया
आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं नेशनल (NATIONAL) 1. वायुसेना के नए प्रमुख बने आशुतोष दीक्षित 2. RBI ने 4 साल बाद ब्याज दर बढ़ाई, लोन महंगे होंगे रेपो रेट 3. अंतर्राष्ट्रीय समुद्री शिखर सम्मेलन सागरमंथन 2026 की घोषणा इंटरनेशनल (INTERNATIONAL) 3. हेनरी बी. कगन और केन्सो सोआई को केमेस्ट्री का नोबल प्राइज मिलने का एलान स्पोर्ट्स (SPORTS) 4. लियोनेल मेसी का अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास 5. स्मृति मंधाना भारतीय महिला क्रिकेट टीम की नई कप्तान बनीं
6. सौरव गांगुली दिल्ली कैपिटल्स के हेड कोच बने
दिल्ली कैपिटल्स आज का इतिहास : -------------------------------------------------------
ये खबर भी पढ़ें करेंट अफेयर्स 7 अक्टूबर:देश के सबसे बड़े सेमीकंडक्टर प्लांट का ट्रायल रन शुरू, ब्रिटिश लेखक जेफरी आर्चर का निधन आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें
DU कॉलेज में तय सीटों से ज्यादा एडमिशन पर विवाद:टीचर्स ने कुलपति को चिट्ठी लिखी, कमान अपने हाथ में लें
DU के हिंदू कॉलेज में एडमिशन में धांधली को लेकर घमासान मचा हुआ है। इसके विरोध में खुद दिल्ली यूनिवर्सिटी के शिक्षक और हिंदू कॉलेज स्टाफ एसोसिएशन (HCSA) सड़क पर उतर आए हैं और एडमिशन में धांधली की बात कर रहे हैं। दरअसल शिक्षकों और HCSA का आरोप है कि एडमिशन कमेटी और डिपार्टमेंट हेडस के कड़े विरोध के बाद भी 20% की तय लिमिट से ज्यादा एडमिशन कर दिए गए हैं। शिक्षक- DU कुलपति कॉलेज कमान अपने हाथ में लें DU के ही शिक्षकों और HCSA ने मिलकर DU कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें एडमिशन में हुई धांधली की जांच की मांग की गई है। साथ ही इस ज्ञापन में कुलपति से दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज का कंट्रोल अपने हाथ में लेने की रिक्वेस्ट भी है। एडमिशन में धांधली, लिमिट से ज्यादा एडमिशन का आरोप हिंदू कॉलेज में विवाद एडमिशन में धांधली के चलते हो हो रहा है। दरअसल ये पूरा मामला एक्सस्ट्रा करिकुलम एक्टिविटी और स्पोर्ट्स कोटे से हुए एडमिशन को लेकर है। हिंदू कॉलेज स्टाफ एसोसिएशन (HCSA) के मुताबिक ‘एडमिशन के लिए स्पोर्ट्स और एक्स्ट्रा कैरिकुलम एक्टिविटीज (ECA) कोटे के तहत निर्धारित सीमा से ज्यादा सीटें अलॉट की गई हैं। हिंदू कॉलेज स्टाफ एसोसिएशन (HCSA) ने आरोप लगाया था कि BCom (ऑनर्स) और BA (ऑनर्स) पॉलिटिकल साइंस में स्पोर्ट्स और ECA (एक्स्ट्रा करिकुलम एक्टिविटीज) कोटे के तहत एडमिशन, किसी एक अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम के लिए तय 20% की लिमिट से ज्यादा किए गए हैं। 10 सीटों पर 17 एडमिशन अलॉट करने का आरोप असल में हिंदू कॉलेज में ECA और स्पोर्ट्स कोटे के तहत कुल 48 सुपरन्यूमेरेरी सीटें हैं। जिनमें 33 स्पोर्ट्स की और 15 ECA कैटेगरी की। जिनका 20% यानी 9.6 एडमिशन दिए जा सकेंगे। इस नियम के मुताबिक एक सिलेबस में अधिकतम 10 सीटें तय हैं, लेकिन इसके उलट ECA और स्पोर्ट्स कोटे से कॉमर्स में 17 और पॉलिटिकल साइंस में 15 सीटें अलॉट की गई। इसी आधार पर HCSA ने आपत्ति उठाई है। हिंदू कॉलेज- एडमिशन एल्गोरिदम में गलती हुई हिंदू कॉलेज ने एडमिशन के इस पूरे मामले पर कहा कि ये उसके अधिकार से बाहर है। साथ ही DU एडमिशन डिपार्टमेंट इसके लिए एडमिशन एल्गोरिदम में हुई गलती को जिम्मेदार बता रहा है। वहीं यूनिवर्सिटी ने ज्यादा एडमिशन को अपने एडमिशन एल्गोरिदम में हुई एक गलती बताया। बता दें कि ECA एडमिशन में डिबेट, म्यूजिक, डांस, थिएटर और फाइन आर्ट्स जैसी एक्टिविटीज में मिली मान्यता प्राप्त उपलब्धियों को शामिल किया जाता है। DU प्रिंसिपल की सफाई- एडमिशन सेल करती है सीट अलॉट DU हिन्दू कॉलेज के प्रिंसिपल ने इस एडमिशन प्रोसेस पर सफाई दी है। DU में एडमिशन प्रोसेस सेंट्रालाइज्ड होता है, जिसके तहत UG और PG सिलेबस में एडमिशन के लिए DU एडमिशन सेल एप्लीकेशन इनवाइट भेजता है। स्टूडेंट्स की पसंद के आधार पर कॉलेज और सब्जेक्ट अलॉटमेंट का फैसला यूनिवर्सिटी करती है। एप्लीकेशन प्रोसेस पूरा होने के बाद CUET स्कोर के आधार पर कैंडिडेट्स को कॉलेज अलॉट किए जाते हैं। वहीं ECA और स्पोर्ट्स कोटे से एडमिशन के लिए भी CUET स्कोर जरूरी होता है। DU ने ये भी कहा कि मेरिट वॉयलेशन नहीं हुआ, क्योंकि जिन स्टूडेंट्स को एडमिशन मिला है, स्पोर्ट्स/ECA के मेरिट स्कोर के आधार पर एलिजिबल थे। दूसरी ओर HCSA ने प्रिंसिपल के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन पास किया और पूरे मामले की जांच की मांग की है। गवर्निंग बॉडी के चेयरमैन TC A रंगाचारी और प्रिंसिपल अंजू श्रीवास्तव को हटाने की भी मांग की है। जिन स्टूडेंट्स को एडमिशन मिल वो कैंसिल होंगे इन सीटों को भरने के लिए 3 दिन के लिए दोबारा एडमिशन सेल खोला जाना चाहिए और स्टूडेंट्स को मौका मिलना चाहिए। बता दें कि यूनिवर्सिटी एडमिशन रूल के मुताबिक कैटेगरी वायज अनरिजर्व कैटेगरी में 50.5% ओबीसी में 27%, अनुसूचित जाति (SC) 15%, अनुसूचित जनजाति (ST) की 7.5%, EWS के लिए 10% और दिव्यांग (PwD) के लिए 5% सीट भरना जरूरी होता होता है। स्टूडेंट्स और टीचर्स को धमकाने का भी आरोप एसोसिएशन ने छात्र और शिक्षक प्रदर्शनकारियों को डराने-धमकाने का आरोप भी लगाया है। आरोप है कि अनियमित बैठकों और समानांतर समितियों के माध्यम से इसे दरकिनार कर दिया गया था। इसने स्टडी लीव, चाइल्ड केयर लीव, सबैटिकल लीव और प्रमोशन में देरी, और तय कार्यकाल से अधिक समय तक पद पर बने रहने वालों को लेकर भी चिंता जताई है। —---------- ये खबर भी पढ़ें.. NEET PG में 258 स्टूडेंट्स के 0 या नेगेटिव नंबर:क्या फिर माइनस नंबर वाले होंगे क्वालिफाई? एक्सपर्ट बोले-सीटें भरने का नहीं, बेचने का फॉर्मूला 24 सितंबर को जारी हुए NEET-PG 2026 रिजल्ट में इस बार कुल 2,63,535 कैंडिडेट्स ने क्वालिफाई किया है। पूरी खबर पढ़ें..
करेंट अफेयर्स 7 अक्टूबर:देश के सबसे बड़े सेमीकंडक्टर प्लांट का ट्रायल रन शुरू, ब्रिटिश लेखक जेफरी आर्चर का निधन
आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं नेशनल (NATIONAL) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लॉन्च किया फ्लीट सपोर्टशिप सूर्य फ्लीट सपोर्ट शिप 2. असम के जागीरोड में देश के सबसे बड़े सेमीकंडक्टर प्लांट का ट्रायल रन शुरू इंटरनेशनल (INTERNATIONAL) 3. फ्रांसिस हाल्जेन को मिला 2026 का फिजिक्स नोबेल प्राइज स्पोर्ट्स (SPORTS) 4. भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने इस्तीफा दिया मिसलिनियस (Miscellaneous) 5. देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो की फ्लाइट्स महंगी हुई इंडिगो निधन (DEATH) : 6. मशहूर ब्रिटिश लेखक जेफरी आर्चर का निधन आज का इतिहास : ---------------------------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें करेंट अफेयर्स 6 अक्टूबर:मेडिसिन का नोबेल जर्मनी, अमेरिका के 3 वैज्ञानिकों को मिला, संयुक्त सैन्य अभ्यास नोमैडिक एलिफेंट 2026 का समापन आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें
RAS और लेक्चरर परीक्षा में आवेदन संशोधन की लास्ट-डेट आज:दिसंबर में होगी एग्जाम, गलत जानकारी देने पर होगी कार्रवाई; जानिए पूरी डिटेल
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवाएं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा-2026 और प्राध्यापक-विशेष शिक्षा प्रतियोगी परीक्षा-2026 के अभ्यर्थियों के लिए आवेदन फॉर्म में ऑनलाइन संशोधन की आज लास्ट डेट है। अभ्यर्थी निर्धारित शुल्क जमा कर अपने आवेदन में आवश्यक संशोधन कर सकते हैं। पहले OTR प्रोफाइल में करना होगा बदलाव यदि अभ्यर्थी को OTR प्रोफाइल से संबंधित रिकॉर्ड में संशोधन करना है तो पहले OTR प्रोफाइल में बदलाव करना होगा। इसके बाद ही आवेदन फॉर्म में करेक्शन किया जा सकेगा। संशोधन से संबंधित डिटेल जानकारी आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। आयोग ने विज्ञापन में निर्धारित शर्तों के अनुसार अभ्यर्थियों को आवेदन में संशोधन का अवसर दिया है। हालांकि, संशोधन की सुविधा से विज्ञापन में निर्धारित पात्रता की शर्तों में कोई बदलाव नहीं होगा। परीक्षा के लिए जारी विज्ञापन में निर्धारित योग्यता की शर्तों के अनुसार ही संशोधन स्वीकार होंगे। योग्यता न होने पर विड्रो कर सकेंगे आवेदन आयोग ने अभ्यर्थियों को पात्रता की स्वयं जांच करने की भी सलाह दी है। गलत या असत्य जानकारी के आधार पर आवेदन करना और पात्रता नहीं होने के बावजूद आवेदन विड्रॉ नहीं करना भारतीय न्याय संहिता की धारा 217 के तहत दंडनीय अपराध बताया गया है। ऐसे अभ्यर्थी यदि बाद में काउंसलिंग, पात्रता जांच या इंटरव्यू के दौरान अयोग्य पाए जाते हैं, तो उन्हें अगले 3 साल तक भर्ती परीक्षाओं से डिबार भी किया जाएगा। इसलिए जिन अभ्यर्थियों के पास निर्धारित योग्यता नहीं है, वे 30 सितंबर 2026 तक अपना आवेदन विड्रॉ कर सकते हैं। इसके लिए एएसओ पोर्टल पर लॉगिन कर रिक्रूटमेंट पोर्टल में → माय रिक्रूटमेंट सेक्शन में जाकर संबंधित परीक्षा के लिए विड्रो विकल्प पर क्लिक करना होगा।
चंडीगढ़ का मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल बना नंबर 1:दिल्ली के 4 स्कूल टॉप 10 में शामिल - एजुकेशन वर्ल्ड इंडिया स्कूल रैंकिंग 2026-27 जारी
एजुकेशन वर्ल्ड ने देशभर में किए गए सर्वे के बाद एजुकेशन वर्ल्ड इंडिया स्कूल रैंकिंग (EWISR) 2026-27 जारी की है। इस सर्वे में 34 शहरों के तकरीबन 18,000 लोगों से बातचीत की गई। इस बातचीत में पेरेंट्स, टीचर, स्कॉलर्स और काउंसिलर को शामिल किया गया। इस सर्वे में 22 राज्यों के 4500 स्कूलों को इंफ्रा, स्टूडेंट्स डेवलपमेंट जैसे 15 पैमानों पर जांचा गया। एजुकेशन वर्ल्ड इंडिया स्कूल रैंकिंग 2026-27 को एजुकेशन वर्ल्ड ने AZ रिसर्च पार्टनर के साथ मिलकर तैयार किया है। इस साल रैंकिंग में करीब 4,500 स्कूलों को शामिल किया गया। इसमें 8,000 पेरेंट्स, टीचर, स्कॉलर्स व काउंसिलर्स की राय ली गई। चंडीगढ़ का ये सरकारी स्कूल नंबर 1 एजुकेशन वर्ल्ड इंडिया स्कूल रैंकिंग (EWISR) 2026-27 में राज्य सरकार के स्कूलों की कैटेगरी में चंडीगढ़ के एक सरकारी स्कूल को पहली रैंक मिली है। यह चंडीगढ़ सेक्टर 16 D में बना गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल है। इससे पहले 2023–24 में भी इस स्कूल को पहली रैंक मिली थी। इस स्कूल ने ICT, स्मार्ट लर्निंग और NEP 2020 के अनुरूप पढ़ाई पर खास ध्यान दिया है। दिल्ली के इन 4 सरकारी स्कूलों का दबदबा एजुकेशन वर्ल्ड इंडिया स्कूल रैंकिंग (EWISR) 2026-27 में राज्य सरकार के स्कूलों की कैटेगरी में दिल्ली के 4 सरकारी स्कूलों ने टॉप 10 में जगह बनाई है। यह सीएम श्री द्वारका सेक्टर 10, दिल्ली है। दिल्ली सरकार ने इस स्कूल में मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर और नई टीचिंग की प्रोसेस को NEP 2020 और नेशनल कुरिकुलम फ्रेमवर्क के अनुरूप जोड़ा है। इस रैंकिंग में स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ को-करीकुलर व स्पोर्ट्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, टीचर्स की क्षमता, नेतृत्व और कम्युनिटी एंगेजमेंट को भी देखा गया। ------------------------------------------------------------------ ये खबर भी पढ़ें IIT बॉम्बे में एंटी सुसाइडल रूल्स लागू हुए:हर कमरे में ट्विन शेयरिंग; सीलिंग फैन हटाए, वाल माउंटेड पंखे लगना शुरू IIT बॉम्बे में स्टूडेंट साहिल वाकोडे के सुसाइड के बाद स्टूडेंट्स की मेंटल हेल्थ सुधारने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। आईआईटी बॉम्बे के हॉस्टल में ट्विन-शेयरिंग मॉडल लागू करने और काउंसलिंग के घंटे बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। पूरी खबर यहां पढ़ें
22 सितंबर के करेंट अफेयर्स:एस जयशंकर आज UNGA में शामिल होने न्यूयॉर्क पहुंचेगे, भारत की पहली 'नागा' फिल्म सीधे ऑस्कर में शामिल
आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- इंटरनेशनल (INTERNATIONAL) 1. विदेश मंत्री एस जयशंकर न्यूयॉर्क में UNGA को संबोधित करेंगे संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) नेशनल (NATIONAL) 2. भारत-श्रीलंका के बीच SLINEX-26 पूरा हुआ स्पोर्ट्स (SPORTS) 3. एशियन गेम्स में भारत ने 6 मेडल जीते 4. टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में पहली बार नागा फिल्म को अवार्ड उद्घाटन (INAUGURATION) 5. मॉरीशस में पहला आयुर्वेद इनफॉर्मेशन सेंटर शुरू हुआ प्रोजेक्ट (PROJECT) 6. असम में अल्ट्रा-सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट शुरू होगा आज का इतिहास ----------------------------- ये खबर भी पढ़ें.. 21 सितंबर के करेंट अफेयर्स:भारत-अमेरिका युद्ध अभ्यास में M777 तोपों की लाइव-फायरिंग, रेल इलेक्ट्रॉनिक प्रोजेक्ट को ₹200 करोड़ की मंजूरी
आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं-
कुत्तों को घुमाकर रोज कमा रहे 50 हजार:कभी 12-14 घंटे की नौकरी से थे परेशान, बने अपनी मर्जी के मालिक, अब लाखों में कमाई
पैसा कमाने के लिए कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता। यूनाइटेड किंगडम में रहने वाले हेनरी एटनबोरो ने जितनी कमाई वकालत से नहीं की होगी, वे उतना कुत्तों को घुमाकर कमा रहे हैं। हेनरी ने कॉर्पोरेट लॉ फर्म की अच्छी सैलरी वाली नौकरी छोड़कर फुल टाइम डॉग वॉकर की नौकरी शुरू की। अब रोजाना इस काम से 50 हजार रुपए कमाते हैं। 12 से 14 घंटे की शिफ्ट बनी परेशानी
लंदन की एक बड़ी लॉ फर्म में काम करने के बावजूद एटनबोरो वर्क लाइफ बैलेंस नहीं बना पा रहे थे। उन्हें रोजाना 12 से 14 घंटे की शिफ्ट करनी पड़ती थी। उनका ज्यादातर वक्त कंप्यूटर स्क्रीन पर काम करते हुए कटता था। अपने इस रूटीन को लेकर वे काफी परेशान थे। धीरे - धीरे उन्हें ये अहसास हुआ कि अच्छी सैलरी के बावजूद वे अपनी लाइफ में खुश नहीं हैं। शुरुआत में दोस्तों ने उनके फैसले का मजाक उड़ाया। हेनरी को पहले से ही जानवरों से काफी ज्यादा लगाव था। वे उनके साथ खेलना या घूमना पसंद करते थे। यही वजह है कि कोविड के बाद जब उन्होंने दूसरे करियर के बारे में सोचा तो डॉग वॉकर के तौर पर नौकरी करने का फैसला लिया। उन्होंने 2022 में हेनरी एंड डॉग्स के नाम से अपनी डॉग-वॉकिंग और पेट-केयर सर्विस फर्म बनाई और काम शुरू किया। अब वे रोजाना लगभग 20–25 कुत्तों को घुमाने और उनकी देखभाल करने का काम करते हैं। हेनरी रोजाना 20 से 25 कुत्तों को वॉक पर ले जाने का काम करते हैं। साथ ही उनकी देखभाल भी करते हैं। इस काम के बदले वे हर घंटे करीब 2000 से 2500 रुपए तक चार्ज करते हैं। ----------------------------------------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें हरियाणा के 12 हजार शिक्षकों पर संकट:HTET जरूरी, नहीं तो नौकरी छोड़ो या रिटायरमेंट लो, पश्चिम बंगाल में 90 हजार टीचर्स के लिए एग्जाम की तैयारी
हरियाणा के सरकारी स्कूलों में कार्यरत उन 12 हजार शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, जिन्होंने अब तक हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा (HTET) पास नहीं की है। विद्यालय शिक्षा निदेशालय (हरियाणा) ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए एक नोटिस जारी किया है। पूरी खबर यहां पढ़ें
कहीं क्लास, तो कहीं असेंबली में स्टूडेंट्स की पिटाई:टीचर बोले- थोड़ा ही तो पीटा है, बीते महीने क्लास में थप्पड़ से छात्र की मौत हुई
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक बच्ची दर्द से रो रही है। ये वीडियो बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के डेजावू स्कूल का है। इस वीडियो के मुताबिक टीचर ने छात्रा को परीक्षा में नकल करने के लिए बुरी तरह पीटा है, जबकि छात्रा का कहना है कि उस दिन कोई परीक्षा हुई ही नहीं थी। नकल करने पर शिक्षक ने पीटा इस वीडियो में छात्रा के हाथों पर पीटने के लाल निशान दिखाई दे रहें हैं। वहीं छात्रा के रोने पर उसके परिजन और आस पास के लोग उसे संभालते दिख रहें हैं। हालांकि ये छात्रा किस क्लास की है इसकी जानकारी नहीं मिली है। शिक्षक ने कहा- हां थोड़ा मारा था इस वीडियो में टीचर का कहना है कि ‘परीक्षा में नकल करने पर थोड़ा सा ही मारा है।’ वही वीडियो में छात्रा ने इस बात का विरोध करते हुए कहा है कि ‘उस दिन कोई परीक्षा थी ही नहीं।’ वहीं जब वीडियो में टीचर से मारने की वजह पूछी गई तो, टीचर ने कहा गलती से थोड़ा सा लग गया था। प्रिंसिपल को भी बता दिया है। अब तक इस वीडियो को लेकर कोई आधिकारिक बयान या स्कूल की तरफ से कोई टिप्पणी सामने नहीं आई है। ऐसे में बच्ची के साथ हुई इस क्रूरता ने स्कूल की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिये हैं। यूपी के बुलंदशहर में भी 7वीं के छात्र को पीटने का मामला सामने आया ऐसी ही घटना यूपी के बुलंदशहर से भी सामने आई है, जहां खुर्जा ग्राम में एक स्कूल शिक्षक पर 7वीं के छात्र को पीटने का आरोप है। छात्र के शरीर पर पिटाई के नीले निशान मौजूद है। पीड़ित छात्र के पिता ने खुर्जा नगर कोतवाली में इसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोपी टीचर के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है। राष्ट्रगान के दौरान PTI टीचर ने पीटा ये मामला खुर्जा के ढाकर पेट्रोल पंप के पास स्थित मदर्स एकेडमी स्कूल का है। छात्र के पिता प्रताप चौहान के मुताबिक, उनका बेटा इसी स्कूल में 7वीं क्लास में पढ़ता है। राष्ट्रगान के दौरान हुई हल्की धक्का-मुक्की के बाद शिक्षक सूरज (पीटीआई) ने उनके बेटे की पिटाई की, जिससे उसके शरीर पर नील पड़ गए हैं। स्कूल में शिकायत करने पर दोबारा पीटा गया पिता के मुताबिक, मारपीट के कारण छात्र के पूरे शरीर पर नीले निशान पड़ गए हैं। उसकी आंख के पास भी चोट आई है। उनका कहना है कि जब वे शिकायत करने स्कूल पहुंचे, तब भी बच्चे के साथ मारपीट की जा रही थी। इसके बाद उन्होंने थाने पहुंचकर पुलिस को लिखित शिकायत दी। परिजनों ने पुलिस से बच्चे का मेडिकल एग्जामिनेशन कराने और टीचर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। फिलहाल, इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। विशाखापट्टनम में थप्पड़ मारने से 6 साल के बच्चे की मौत हुई थी इससे पहले अगस्त में भी ऐसी घटना सामने आई थी। जिसमें विशाखापट्टनम में टीचर की पिटाई से 6 साल के बच्चे की मौत हो गई थी। CCTV में नजर आया कि पिटाई के बाद बच्चा टीचर की गोद में ही गिर पड़ा। परिजन का आरोप है कि टीचर की पिटाई से बच्चे को दहशत में हार्ट अटैक आ गया था। पूरी घटना CCTV में हुई रिकॉर्ड यह पूरी घटना क्लासरूम में लगे CCTV में रिकॉर्ड हो गई थी। इसमें दिखाई दे रहा है कि टीचर ने उसके कपड़े उतारने की कोशिश की और थप्पड़ मारा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक मृतक प्रणय तेजा लिटिल गार्डन्स स्कूल के UKG में पढ़ता था। टीचर की गोद में गिरने के बाद बच्चे को किंग जॉर्ज अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act 2009) के सेक्शन 17 के तहत स्कूल में पढ़ रहे बच्चों को दिए जाने वाले दंड को लेकर स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। ----------------------- ये खबर पढ़ें.. कहीं कीचड़ में स्कूल जाते बच्चे, कहीं घुटनों तक पानी:कहीं फिसलन, सांप-बिच्छू तो, कहीं पानी में डूबने का खतरा; वीडियो वायरल
एमपी के रायसेन जिले में गैरतगंज तहसील में आने वाले देवनगर में स्कूल जाती छात्राओं का वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में बच्चे कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल की तरफ जा रहे हैं और उनकी पीठ पर स्कूल बैग हैं और ये इन बच्चों का आम रास्ता है। पूरी खबर पढ़ें..
21 सितंबर के करेंट अफेयर्स:भारत-अमेरिका युद्ध अभ्यास में M777 तोपों की लाइव-फायरिंग, रेल इलेक्ट्रॉनिक प्रोजेक्ट को ₹200 करोड़ की मंजूरी
आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- नेशनल (NATIONAL) 1. भारत-अमेरिका युद्ध अभ्यास में M777 2. भारत साउथ अफ्रीका के बीच आर्मी- टू- आर्मी वार्ता हुई स्पोर्ट्स (SPORTS) 3. एशियन गेम्स के पहले दिन भारत ने 2 सिल्वर मेडल जीते 4. 46वें FIDE चेस ओलंपियाड में भारत ने क्वालिफाई किया
प्रोजेक्ट (PROJECT) 5. 200 करोड़ के रेल इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली आज का इतिहास ----------------------- ये खबर भी पढ़ें.. 19 सितंबर के करेंट अफेयर्स:जिम्बाब्वे के तवेंगवा ICC के नए वाइस चैयरमेन, HAL ने भारतीय सेना को LCA तेजस विमान सौंपे आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- पूरी खबर पढ़ें..
18 सितंबर के करेंट अफेयर्स:एन चंद्रशेखर टाटा सन्स के चेयरमैन बने रहेंगे, NHAI ने वन टैग फास्ट टैग सर्विस एप शुरू किया
आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- नेशनल (NATIONAL) 1. पीएम मोदी ने सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन किया 2. एन चंद्रशेखर टाटा सन्स के चेयरमैन बने रहेंगे
इंटरनेशनल (INTERNATIONAL) 3. जनरल धीरज सेठ 3 दिन की रूस यात्रा पर पहुंचे
अवार्ड (AWARD) 4. अभिनेता अनंत नाग को दादा साहेब फाल्के 2024 मिलेगा मिसलीनियस 5. NHAI ने वन टैग फास्ट टैग सर्विस शुरू की -------------------------- ये खबर भी पढ़ें.. 17 सितंबर के करेंट अफेयर्स:संजुक्ता CoBRA यूनिट की पहली महिला ऑफिसर बनीं, भारत ने बोत्सवाना को एड्स के लिए10 टन दवाएं भेजीं आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- पूरी खबर पढ़ें..
दिल्ली यूनिवर्सिटी इलेक्शन की वोटिंग आज:प्रेसिडेंट के लिए 7 उम्मीदवारों के बीच मुकाबला; किसी ने डांस करके तो किसी ने अदाओं से बिखेरा जलवा
दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (DUSU) चुनाव 2026 के लिए मतदान 18 सितंबर यानी आज होगा। जबकि वोटों की गिनती 19 सितंबर को की जाएगी। केवल एलिजिबल डीयू छात्र ही मतदान कर सकेंगे। वोटिंग के लिए डीयू का आईडी कार्ड जरूरी रहेगा। इस चुनाव में सुरक्षा के इंतजामों को देखते हुए कॉलेजों और विभागों के बाहर पुलिस तैनात रहेगी। संवेदनशील स्थानों पर गश्त और महिला कॉलेजों में महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती का इंतजाम भी किया गया है। प्रचार का तरीका AI बेस्ड दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव 2026 में प्रचार का तरीका इस बार पूरी तरह बदल गया है। डीयू प्रशासन की सख्ती के कारण छात्र संगठनों ने कागजी पोस्टरों की जगह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और सोशल मीडिया रील्स के जरिये प्रचार किया है। इस साल डूसू चुनाव की जंग बेहतर और रचनात्मक प्रॉम्प्ट से लड़ी जा रही है। युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए उम्मीदवारों ने शॉर्ट वीडियोज, मीम्स और रील्स को अपना हथियार बनाया।
17 सितंबर को कॉलेज में पहुंची ईवीएम डीयू में मतदान से एक दिन पहले यानी 17 सितंबर को कॉलेजों तक ईवीएम पहुंचाने की प्रोसेस पूरी हुई। इसके लिए ट्रेंड मास्टर ट्रेनरों की तैनाती की गई है। मतदान का समय कॉलेज शिफ्ट के अनुसार अलग अलग रखा गया है। डे क्लास के लिए सुबह साढ़े 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक समय तय किया गया है। वहीं इनविंग क्लास के लिए दोपहर 3 बजे से शाम को साढ़े 7 बजे तक का समय तय है।
मतदान केंद्रों पर खास प्रबंध मतदान केंद्रों पर छात्रों की सुविधा का विशेष ध्यान रखने के प्रबंध किए गए हैं। मतदान केंद्र पर छात्रों की कतार व्यवस्थित करने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी और स्वयंसेवक लगाए गए हैं। प्रवेश और निकास के लिए अलग अलग रास्तों का इंतजाम किया गया है। छात्रों को गर्मी और भीड़ से बचाने के लिए पानी और छांव की व्यवस्था की गई है। प्राथमिक उपचार का प्रबंध भी किया गया है। मतदान केंद्र पर आईडी वेरिफिकेशन जरूरी डूसू चुनाव में बड़ी संख्या में छात्रा मतदाता होते हैं। ऐसे में मतदान केंद्र पर सही वोटर्स की पहचान तय करना भी इस चुनाव का खास हिस्सा है। इसी वजह से यूनिवर्सिटी ने आइडेंटिटी वेरिफिकेशन और एंट्री की व्यवस्था पर खास ध्यान दिया है। 13 अगस्त को जारी हुआ चुनाव कार्यक्रम DU ने 13 अगस्त को DUSU इलेक्शन 2026-27 का चुनाव कार्यक्रम जारी किया था। इसी महीने में चुनाव आचार संहिता और कैंपेनिंग के नियम लागू किए गए। इसमें पेपरलेस कैंपेन, डिजिटल/वीडियो प्रचार पर जोर दिया गया है। साल 2025 में 1.55 लाख से ज्यादा छात्र वोटिंग में शामिल पिछले साल डूसू चुनाव में लगभग 1.55 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स ने वोट दिया था। इस चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी ABVP के आर्यन मान प्रेसिडेंट चुने गए थे। उन्होंने कांग्रेस बैक्ड नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया यानी NSUI की जोसलीन नंदिता चौधरी को 16,196 वोटों से हराया था। पिता और भाई मशहूर शराब व्यवसायी आर्यन मान बिजनेस परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता, सिकंदर मान बहादुरगढ़ स्थित ADS ग्रुप के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। ये कंपनी मशहूर रॉयल ग्रीन शराब बनाती है। आर्यन के बड़े भाई विराट मान ADS स्पिरिट्स प्राइवेट लिमिटेड के CEO हैं। साथ ही, वो रोकोब्रांड के फाउंडर भी हैं। स्पोर्ट्स कोटे से एडमिशन हुआ 2 नेशनल सर्टिफिकेट के आधार पर मान का एडमिशन स्पोर्ट्स कोटे से दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज में हुआ। उस समय कोविड चल रहा था। ऐसे में पहले साल ऑनलाइन मोड क्लासेस अटेंड की और ओपन बुक एग्जाम में शामिल हुए। हंसराज में रहते हुए जॉइन किया ABVP हंसराज कॉलेज जॉइन करने के 1 सप्ताह के भीतर ही उन्हें स्पोर्ट्स इक्विपमेंट्स की कमी महसूस हुई। इक्विपमेंट नहीं मिलने के चलते उन्होंने कॉलेज प्रिंसिपल को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया। फिर अपने साथियों के साथ आवेदन लेकर प्रिंसिपल को सौंपने गए। जब वे प्रिंसिपल ऑफिस की तरफ जा रहे थे, उसी दौरान रास्ते में ABVP के सपोर्टर्स और ऑफिस बियरर्स से मुलाकात हुई। उनके हाथों में पोस्टर और बैनर थे, जिस पर तीसरे लाइन में स्पोर्ट्स इक्विपमेंट प्रोवाइड करने की डिमांड लिखी थी। ये देखकर मान को लगा कि जो स्टूडेंट विंग हमारी मांग या जरूरत को अपना मुद्दा बनाता है, उससे जुड़ना बेहतर रहेगा। उसी दौरान वे ABVP से जुड़े। डीयू इलेक्शन कमीशन द्वारा जारी किया गया नोटिफिकेशन ----------------------------------------------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें इंडियन आर्मी में अग्निवीर रैली के लिए टैटू पॉलिसी जारी:ट्राइबल कम्युनिटी और धार्मिक टैटू बनवा सकते हैं, ये 6 तरह के टैटू प्रतिबंधित इंडियन आर्मी ने अग्निवीर रैली के लिए टैटू पॉलिसी जारी की है। इसमें बताया गया है कि शरीर पर कहां टैटू बनवाया जा सकता है और कहां नहीं। अग्निवीर भर्ती में शारीरिक गतिविधियों के साथ उम्मीदवारों के पूरे शरीर की जांच की जाती है। साथ में शरीर पर टैटू भी देखा जाता है क्योंकि सेना में टैटू को लेकर कड़े नियम तय किए गए हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें
17 सितंबर के करेंट अफेयर्स:संजुक्ता CoBRA यूनिट की पहली महिला ऑफिसर बनीं, भारत ने बोत्सवाना को एड्स के लिए10 टन दवाएं भेजीं
आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- इंटरनेशनल (NATIONAL) 1. विदेश मंत्री एस जयशंकर भूटान की यात्रा पर गए 2. भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य 'युद्ध अभ्यास 2026' शुरू अपॉइटनमेंट (APPOINTMENT) 3. संजुक्ता पाराशर CoBRA यूनिट की पहली महिला IG बनीं CoBRA यूनिट मिसलीनियस 4. लद्दाख का पहला ‘हेरिटेज विलेज’ घोषित 5. भारत ने बोत्सवाना को 10 टन एंटी-रेट्रोवायरल (ARV) दवाएं भेजी
आज का इतिहास -------------------------- ये खबर भी पढ़ें.. करेंट अफेयर्स 16 सितंबर:स्टील कचरे से छत्तीसगढ़ में बनी सबसे लंबी सड़क, डल झील संरक्षण के लिए ग्रास माशे का मॉडल प्रस्तुत आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं-पूरी खबर पढ़ें..