छत्तीसगढ़ / रायपुर

एल आई सी को 35 लाख भुगतान करने का आदेश

बीमित व्यक्ति की बीमा राशि नहीं देने पर राज्य उपभोक्ता आयोग ने दिया निर्देश

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने जीवन बीमा निगम को बीमित व्यक्ति की 35 लाख रुपए की राशि भुगतान करने का आदेश जारी किया है साथ ही आयोग ने निगम को बीमित व्यक्ति को 6% की दर से 35 लाख पर ब्याज अदा करने के लिए भी निर्देशित किया है इसके अलावा मानसिक क्षति के लिए ₹10000 और वाद पर आने वाले खर्च के लिए ₹5000 भुगतान करने के आदेश दिए हैं इस आशय के आदेश न्यायाधीश गौतम ने जारी किए हैं. बता दें कि वर्ष 2010 में जीवन बीमा निगम में एक व्यक्ति ने अपने जीवन काल में 20 लाख व 15 लाख का बीमा करवाया था इन दो पॉलिसियों की जीवित रहने के दौरान बीमित व्यक्ति की 2012 में मृत्यु हो गई तत्पश्चात बीमित व्यक्ति की पत्नी ने भारतीय जीवन बीमा निगम में प्रपोजल फॉर्म को भर कर राशि प्रदान करने के लिए मांग पेश की लेकिन भारतीय जीवन बीमा निगम ने प्रपोजल फॉर्म में बीमित व्यक्ति की बीमारी सहित तथ्यों को छुपाने की बात कहकर दावा निरस्त कर दिया था

इस पर बीमित व्यक्ति की पत्नी ने राज्य उपभोक्ता आयोग में दावा प्रस्तुत किया था और आदेश प्रसारित करने की अपील की थी इस मामले में तमाम तथ्यों को बारीकी से परीक्षण करने के बाद राज्य उपभोक्ता आयोग ने पाया की बीमित व्यक्ति की राशि देने में जीवन बीमा निगम ने लापरवाही बरती और बीमित व्यक्ति की पत्नी को राशि देने से इनकार कर दिया यहां तक कि उनका दावा निरस्त कर दिया गया जबकि बीमित व्यक्ति की मृत्यु के ठोस कारण और साक्ष्य प्रस्तुत नहीं है जिससे यह मानसिकता बन सके कि बीमित व्यक्ति ने किसी तरह की बीमारी को छिपाने का प्रयास किया है राज्य उपभोक्ता आयोग के न्यायमूर्ति गौतम का कहना था की विश्लेषण में यह भी पाया गया कि बीमित व्यक्ति पर राज्य जीवन बीमा निगम ने बीमा विधि संशोधन अधिनियम 2015 की धारा 45 के संशोधन अनुसार बीमित व्यक्ति की मृत्यु की पॉलिसी का जारी होना और संशोधन की पूर्व की घटना थी इस प्रकरण में बीमा अधिनियम की धारा 45 में संशोधन के पूर्व वाले प्रावधान लागू होंगे जिसके अनुसार किसी भी पॉलिसी के जारी होने के 2 वर्ष के भीतर मृत्यु पर पॉलिसी को प्रश्न गत नहीं किया जा सकता

इस प्रकरण में बीमित व्यक्ति की मृत्यु पॉलिसी लेने के 2 वर्ष 4 माह बाद हुई है अतः भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा प्रस्ताव स्थगित किए जाने का कारण अनुचित है इसलिए आयोग यह आदेश प्रसारित करता है की बीमित व्यक्ति के पक्षकार को भारतीय जीवन बीमा निगम 1 माह के भीतर दोनों बीमा पॉलिसी के कुल रकम ₹35 लाख रुपए भुगतान करें साथ में उक्त राशि का परिवाद प्रस्तुति 2017 से 6% वार्षिक ब्याज का भुगतान भी किया जाए यही नहीं मानसिक क्षति के लिए ₹10000 रुपए और वाद खर्च के लिए ₹5000 का भुगतान किया जाए का आदेश दिया है 



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