छत्तीसगढ़ / रायपुर

प्रदेश देवांगन समाज डॉक्टर ओमप्रकाश के साथ

समाज प्रमुखों एवं संस्थापक सदस्यों का निष्कासन अवैधानिक
प्रदेश देवांगन कल्याण समाज पंजीयन क्रमांक 2338 अल्पमत में

रायपुर। छत्तीसगढ़ में देवांगन समाज दो संगठनों में विभक्त होने के उपरांत नित नई चर्चाओं से सियासत गर्मा गई है। वहीं दोनों संगठनों की ओर से रोज नए-नए दावे किए जा रहे हैं, इसी बीच अब नवगठित प्रदेश देवांगन समाज छत्तीसगढ़ और समाज प्रमुख तथा संस्थापक सदस्यों ने पुरजोर तरीके से डॉ ओम प्रकाश देवांगन के साथ होने का दावा किया है।
 समाज प्रमुखों ने मीडिया से चर्चा में साफ तौर पर कहा कि प्रदेश देवांगन कल्याण समाज पंजीयन क्रमांक 2338 अल्पमत में आ गई है। 19 पदाधिकारी में से केवल सात पदाधिकारी साथ रह गए हैं, 12 पदाधिकारी नवगठित प्रदेश देवांगन समाज छत्तीसगढ़ में शामिल हो चुके हैं और डॉ ओमप्रकाश देवांगन को सर्वमान्य नेता स्वीकार कर लिया है। रायपुर प्रेस क्लब में मीडिया से चर्चा करते हुए प्रदेश देवांगन समाज के संरक्षक महेश देवांगन एवं संरक्षक एवं संस्थापक सदस्य राम गोपाल देवांगन ने कहा है कि प्रदेश देवांगन कल्याण समाज के प्रदीप देवांगन बौखलाहट में अनर्गल और गलत बयान बाजी कर रहे हैं। इससे समाज की प्रतिष्ठा धूमिल होते जा रही है, जिसे हर तरह के प्रयास कर रोका जाएगा। मीडिया से बातचीत में महेश देवांगन ने कहा कि पिछले दिनों 27 नवंबर 2024 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में सर्व सम्मति से सामाजिक संगठन को मजबूती प्रदान करने के लिए एवं सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से एक नया संगठन प्रदेश देवांगन समाज छत्तीसगढ़ के गठन का निर्णय लिया गया। वहीं सर्वसम्मति से डॉक्टर ओमप्रकाश देवांगन को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया तथा नई कार्र्यकारिणी के गठन हेतु डॉक्टर ओमप्रकाश को अधिकृत भी कर दिया गया है। उनका कहना था कि उपरोक्त निर्णय प्रदेश देवांगन कल्याण समाज पंजीयन क्रमांक 2338 के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप देवांगन द्वारा किए जा रहे मनमानी और आर्थिक अनियमितताओं तथा पद की लालसा को दृष्टिगत रखते हुए यह निर्णय लेना पड़ा है। यह अत्यंत दुर्भाग्य जनक है कि 1 दिसंबर 2024 को अवैधानिक रूप से प्रदीप देवांगन के द्वारा एक आम सभा का आह्वान रायपुर में किया गया जिसमें ना ही संस्थापक सदस्य उपस्थित रहे और ना ही कार्यकारिणी के सभी निर्वाचित सदस्य शामिल हुए। यहां तक की सदस्यों की संख्या भी अत्यंत सीमित थी अर्थात कोरम पूरा नहीं हुआ उन्होंने बताया कि फिर भी मन माने ढंग से समाज के निर्वाचित 19 कार्यकारिणी सदस्यों में से 12 सदस्यों को एवं कुछ समाज प्रमुखों को निष्कासन का निर्णय लिया गया जो प्रदीप देवांगन की बौखलाहट का एक उदाहरण है। उनका कहना था कि प्रदीप देवांगन से नवगठित प्रदेश देवांगन समाज छत्तीसगढ़ के सभी निर्वाचित सदस्य और पदाधिकारी यह पूछना चाहते हैं की क्या किसी सम्मानित व्यक्ति पदाधिकारी को समाज से निकाला जा सकता है ? डॉक्टर ओमप्रकाश देवांगन तो प्रदेश देवांगन कल्याण समाज पंजीयन  क्रमांक 2338 का सदस्य भी नहीं है फिर उन्हें किस तरह से निष्कासित किया गया? उपरोक्त संगठन के सदस्यों की संख्या केवल 2400 के लगभग है तो 10 लाख सदस्यों का दावा कहां तक सत्य है । यही नहीं दावा के अनुसार 10 लाख सदस्य हैं तो सदस्यता शुल्क की राशि 120 रुपए प्रतिवर्ष के हिसाब से 12 करोड़ की राशि होती है जो राशि कहां है ? उन्होंने बताया कि बिना कार्यकारिणी और सदस्यों के पर्याप्त संख्या के अभाव में उपरोक्त निर्णय किस प्रकार से लिया गया ? उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है की बौखलाहट में समाज को गुमराह करने के उद्देश्य से झूठ एवं अनर्गल प्रलाप किया जा रहा है। उपरोक्त गलत कार्यों के लिए प्रदीप देवांगन स्वयं समाज से माफी मांगे अन्यथा मानहानि का दावा एवं अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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