छत्तीसगढ़ /

सड़क निर्माण से जमीन प्रभावित, मुआवजे के लिए पहुंचे हाईकोर्ट

रायगढ़, 8 अक्टूबर। लैलूंगा क्षेत्र में बक्रुमा-लैलूंगा सड़क परियोजना से निजी भूमि प्रभावित होने और मुआवजा नहीं मिलने का मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंच गया है। ग्राम राजपुर निवासी राकेश कुमार बहेरा ने रिट याचिका दायर कर प्रभावित भूमि के विधिवत अधिग्रहण और नियमानुसार मुआवजा दिलाने की मांग की है। याचिका के अनुसार ग्राम राजपुर, पी.एच. नंबर 03, तहसील लैलूंगा स्थित खसरा नंबर 380/6, 380/18 और 380/19 की भूमि सड़क परियोजना से प्रभावित हुई है। याचिकाकर्ता का दावा है कि सड़क निर्माण अथवा चौड़ीकरण के लिए भूमि का उपयोग किए जाने के बावजूद अब तक अधिग्रहण और मुआवजा प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। याचिका में बताया गया है कि वर्ष 2021 में भी हाईकोर्ट में मामला प्रस्तुत किया गया था। 25 मार्च 2021 को अदालत ने संबंधित अधिकारियों को भूमि का सीमांकन कर, सड़क से प्रभावित पाए जाने पर नियमानुसार अधिग्रहण की कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। याचिकाकर्ता के अनुसार इन निर्देशों के बावजूद सीमांकन करीब पांच वर्ष बाद 11 जुलाई 2026 को हुआ। याचिका में सीमांकन रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि खसरा नंबर 380/6 की करीब 0.132 हेक्टेयर भूमि सड़क परियोजना से प्रभावित पाई गई। इसके अलावा करीब 99 वर्गमीटर क्षेत्र में नौ कमरों की संरचना होने का भी उल्लेख है। याचिकाकर्ता के अनुसार इसके बावजूद भूमि और संरचना का मुआवजा अब तक निर्धारित अथवा भुगतान नहीं किया गया है। बहेरा ने 7 अगस्त 2026 को संबंधित एसडीओ एवं भूमि अधिग्रहण अधिकारी को अभ्यावेदन देकर मुआवजे की मांग की थी, जो लंबित होने का दावा किया गया है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 300-ए का हवाला देते हुए कहा गया है कि कानून में निर्धारित प्रक्रिया के बिना किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से प्रभावित भूमि और संरचना का नियमानुसार मुआवजा निर्धारित कर भुगतान कराने तथा अभ्यावेदन पर समयबद्ध एवं कारणयुक्त आदेश पारित करने का निर्देश देने की मांग की है। साथ ही मुआवजा और अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी किए बिना प्रभावित भूमि पर सड़क निर्माण अथवा चौड़ीकरण नहीं करने की मांग भी की गई है।

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