धिकमास के कृष्ण पक्ष में आने वाली विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत आज रखा जा रहा है. जो हर तीन साल में एक बार ही आता है. धार्मिक मान्यता है कि आज के दिन व्रत, पूजा और कथा सुनने से भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाले संकट दूर होकर सुख-शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है. 3 जून बुधवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास बन गया है. इस बार चतुर्थी और बुधवार का संयोग बना है. ज्योतिष शास्त्र में दोनों ही भगवान गणेश को समर्पित दिन माने गए हैं. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत और पूजा करने से जीवन के बड़े से बड़े संकट भी दूर हो जाते हैं.
चंद्रोदय का समय और व्रत का महत्व
चतुर्थी तिथि की शुरुआत 3 जून को रात से हो चुकी है और यह 4 जून को रात 11:30 बजे तक रहेगी. संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही खोला जाता हैं. आज चंद्रोदय का समय रात 10:04 बजे माना गया है. इसलिए इसी समय पूजा के बाद व्रत पारण किया जाएगा.
गणेश पूजा से मिलेगा संकटों से छुटकारा
आज के दिन भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा और मोदक अर्पित करना विशेष फल देने वाला और संकटों को नाश करने वाला होगा. साथ ही ओम गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करने से गणपति बप्पा की कृपा प्राप्त होगी. जीवन में आ रही बाधाएं दूर होने लगेंगी.
बिना पन्ना पहने भी मजबूत होगा बुध
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बुधवार का दिन बुध ग्रह को समर्पित होता है. ऐसे में आज कुछ आसान उपाय करके बिना पन्ना पहने भी बुधदेव को मजबूत किया जा सकता है. ओम ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः मंत्र का जाप करें. हरे रंग के कपड़े पहनें और पौधे लगाएं. मीठा और विनम्र व्यवहार अपनाएं. मान्यता है कि बुध मजबूत होने से व्यक्ति की वाणी प्रभावशाली होती हैं. करियर व व्यापार में सफलता मिलती है.
व्रत कथा का विशेष महत्व
पौराणिक कथा के अनुसार जब पांडव अपना राज्य हारकर वन में भटक रहे थे. तब उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से कष्टों से मुक्ति का उपाय पूछा. तब श्रीकृष्ण ने विभुवन संकष्टी चतुर्थी व्रत करने की सलाह दी. पांडवों ने द्रौपदी के साथ यह व्रत किया. जिससे उन्हें अपने सभी कष्टों से मुक्ति मिली और खोया हुआ राज्य वापस प्राप्त हुआ.