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ऑनलाइन सर्च में Google की मोनोपोली को लगेगा झटका? अमेरिकी कोर्ट का फैसला …

 Google को एक बड़ा झटका लगा है. अमेरिकी कोर्ट ने माना है कि Google ने ऑनलाइन सर्च में अपनी मोनोपोली बनाने के लिए गैरकानूनी तरीकों का इस्तेमाल किया गया है. अमेरिका के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज अमित पी मेहता ने ये फैसला सुनाया है. ये फैसला टेक्नोलॉजी जगत के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है.



क्या है मामला?

दरअसल, अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट और राज्यों ने गूगल के खिलाफ मुकदमा दायर किया था. इसमें Google द्वारा स्मार्टफ़ोन और वेब ब्राउज़र पर डिफॉल्ट सर्च इंजन बनाने के लिए Apple और Samsung जैसी अन्य कंपनियों को प्रतिवर्ष अरबों डॉलर का भुगतान करने का आरोप लगाया गया था, जिससे गूगल की मोनोपोली बनी रहे और दूसरे कंपटीटर्स बाजार में उतर न पाएं.

गूगल के कामकाज को कोर्ट ने ठहराया गलत

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि गूगल ने अपने दबदबे को बनाए रखने के लिए कानून का उल्लंघन किया है. कंपनी ने गूगल को डिफॉल्ट सर्च इंजन बनाए रखने के लिए अरबों रुपये खर्च कर दिए हैं. साथ ही गलत प्रैक्टिस को अपनाया है, जो कारोबारी नियमों के खिलाफ हैं. कोर्ट का कहना है कि गूगल ने अपने मुकाबले में किसी को खड़ा नहीं रहने दिया है. ऐसे में सर्च की दुनिया में नए इनोवेशन को रफ्तार नहीं मिल सकी है. गूगल सर्च के विज्ञापन से कंपनी को बड़ा फायदा होता है. साल 2023 में गूगल की ओनर कंपनी अल्फाबेट के कुल विज्ञापन में गूगल की हिस्सेदारी 77 फीसद थी.

गूगल एक एकाधिकारवादी: न्यायाधीश अमित मेहता
न्यायाधीश अमित मेहता ने कहा, “अदालत इस निष्कर्ष पर पहुँची है: गूगल एक एकाधिकारवादी है, और इसने अपना एकाधिकार बनाए रखने के लिए एकाधिकारवादी की तरह काम किया है.

कोर्ट के फैसले पर Google ने क्या कहा

गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट ने अपने बयान में कहा है कि यह फैसला बताता है कि गूगल सबसे बढ़िया सर्च इंजन है लेकिन हमें इसे लोगों को आसानी से उपलब्ध कराने का अधिकार नहीं है. गूगल इस फैसले को बड़ी अदालत में चुनौती देगी.

वहीं अमेरिका के एटॉर्नी जनरल मिरिक गारलैंड ने कहा कि यह अमेरिकी लोगों की एतिहासिक जीत है. कोई भी कंपनी, चाहे वो कितनी ही बड़ी या प्रभावशाली क्यों न हो वो कानून से बड़ी नहीं है.

अमेरिकी फेडरल एंटी ट्रस्ट नियामक ने कई बड़ी कंपनियों पर बाजार में एकाधिकार के लिए गलत तरीके अपनाने के आरोप में मुकदमा किया है. इसमें फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा, ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी अमेजन और आईफोन बनाने वाली कंपनी एपल शामिल हैं.

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