छत्तीसगढ़ / रायपुर

एनआईटी रायपुर प्रोफेसर अयंगर भार्गव ने महंत लक्ष्मीनारायण दास महाविद्यालय एवं विप्र महाविद्यालय के संयुक्त तत्वधान में आयोजित कार्यशाला में दी जानकारी

शिक्षा के चार मूल मंत्र गरिमा इमानदारी निष्पक्षता और जिम्मेदार स्वतंत्रता

रायपुर: राजधानी के गांधी चौक स्थित महंत लक्ष्मीनारायण दास महाविद्यालय एवं विप्र कला एवं शिक्षण महाविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित कार्यशाला के द्वितीय दिन एनआईटी रायपुर के प्रोफेसर आयंगर भार्गव ने कहा कि शिक्षा में चार मूल मंत्र हैं इनमें गरिमा इमानदारी निष्पक्षता और जिम्मेदार स्वतंत्रता इत्यादि जो एक शिक्षक को उनके दायित्वों के निर्वहन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं उन्होंने बताया कि शिक्षा में क्या गलत और क्या सही है इसका निर्णय शिक्षा में एथिक्स के माध्यम से होता रहा है यह एथिक्स कॉपी महत्वपूर्ण है इसकी जानकारी सभी शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विद्वत जनों को होनी चाहिए

कार्यशाला मुख्य विशेष वक्ता के तौर पर प्रोफ़ेसर अयंगर भार्गव ने कहा आम लोगों में मान्यताएं के आधार पर आचार संहिता तैयार होती है इसीलिए यह   माना जाता रहा है कि एक व्यक्ति किसी कार्य में बाधक होता है तो सुधारक भी वहीं पर होता है उन्होंने बताया कि किसी किसी व्यक्ति या संस्था का एथिक्स के आधार पर धरना बनती है स्वामी विवेकानंद का उदाहरण पेश करते हुए प्रोफ़ेसर आयंगर भार्गव ने कहा की वह ऐसे जीवंत  व्यक्तित्व रहे हैं जिसे आज भी पूरा देश आइडियल व्यक्ति के रूप में स्वीकार करता है |

प्रोफेसर भार्गव का कहना था कि एथिक्स और मोरल हमारे उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए निर्धारित मापदंडों में शामिल रहते हैं तभी तो हम शिक्षक को एक समाज में आदर्श व्यक्तित्व के रूप में स्वीकार करते रहे हैं उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में कोरोनावायरस के दौरान छात्र-छात्राओं को व्यवस्था ने  4 साल पीछे पहुंचा दिया है प्रोफेसर आयंगर का मानना था कि किसी व्यक्ति की सोच उसकी वैल्यू के आधार पर तय हो पाती है इसीलिए मोरल और वैल्यू हर स्तर पर काफी महत्वपूर्ण है और यह एथिक्स मैं शामिल होते हैं उनका कहना था कि एथिक्स काफी तार्किक होते हैं इसीलिए इसमें इंटीग्रेटेड मोरल प्रिंसिपल वैल्यू ऑनेस्टी राइट  चॉइस और फेयरनेस के साथ व्यक्तिगत रिस्पांसिबिलिटी का बहुत बड़ा योगदान है वह मानते हैं कि समाज का अपना एक रूप होता है जो समय के आधार पर बदलता रहता है परंतु व्यक्ति समाज के बदलते रूप में इसे ही एथिक्स को पैकर अपने लिए स्थान निर्धारित कर पाता है |

उन्होंने यह भी कहा कि समय-समय पर एथिक्स बदलते रहे हैं आज पैसा स्टेटस और शांति एक आम व्यक्ति की मुख्य जरूरत है वहीं आयोजन में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ देवाशीष मुखर्जी ने कहां की कार्यशाला के द्वितीय दिन के आमंत्रित वक्ता का समाज में विशेष महत्व है और एनआईटी में एक बड़ा नाम है निरंतर ही शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने वाले प्रोफेसर आयंगर भार्गव इंडियन एजुकेशन ऑफ एथिक्स पर काफी गहराई से विचार रखते हैं जो उन्होंने आज की कार्यशाला में रखी है जिसे हर शिक्षक को नई शिक्षा नीति के साथ स्वीकार ता करते हुए अपने शैक्षणिक करिकुलम में विशेष रूप से शामिल करना चाहिए ताकि उत्तरोत्तर और गुणोत्तर होते रहे |

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