व्यंग्य,मजाक व अपमान में अंतर होता है...
राजनीति में राजनीतिक दलों के बीच तो एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी चलती रहती है। एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप भी लगाए जाते हैं। कभी कोई बात व्यंग्य में कही जाती है तो कभी कोई बात मजाक में भी कही जाती है।कभी कोई बात जानबूझकर अपमान करने के लिए की जाती है। किसी की तरफ से किसी के लिए की जाती है।कोई बात कही जाए सभ्य समाज में इस तरह से कही जानी चाहिए कि किसी को ऐसा न लगे कि उसका अपमान किया गया है। कड़वी से कड़वी बात भी अगर शालीन भाषा में कही जाए तो वह किसी को बुरी नहीं लगती है।छोटी से छोटी बात भी यदि अशालीन भाषा में कही जाती है तो वह किसी को भी अपमानजनक लग सकती है।चाहे व्यंग्य हो, मजाक हो यदि भाषा शालीन नहींं है तो वह किसी को भी बुरी लग सकती है,किसी को भी ऐसा लग सकता है कि मेरा सार्वजनिक रूप से अपमान करने के लिए ऐसा कहा गया है।
कुणाल कामरा एक स्टैंडअप कामेडियन माने जाते है।वह किसी प्रसंग पर पैरोडी,किसी राजनीतिक घटना पर पैरोडी बनाकर लोगों को हंसाने का काम करते हैं। कई बार वह अपने विवादित जोक या पैरोडी से अपनी ऐसी राय प्रगट करते हैं कि विवाद शुरू हो जाता है और वह फंस भी जाते हैं।वह उम्मीद करते हैं कि लोग इसे व्यंग्य,मजाक में लेंगे लेकिन कई बार जिनके बारे में वह कुछ कहकर कुछ लोगों को हंसाना चाहते हैं। कुछ लोग हंसते हैं तो कुछ लोग नाराज भी होते हैं कि कुणाल कामरा ने उनका अपमान किया है।इसके कारण लोगों की नाराजगी का सामना भी उनको करना पड़ता है।
बताया जाता है कि एक बार वह इंडिगो की फ्लाइट में पत्रकार अर्नब गोस्वामी से उलझ गए थे,उनकी पत्रकारिता को लेकर सवाल पूछे थे,अर्नब ने उनके किसी सवाल का कोई जवाब नहीं दिया था तो उसने अर्नब गोस्वामी का यह कहकर मजाक उड़ाया था कि खुद सबसे सवाल पूछते हैं और जब उनसे कोई सवाल पूछे तो जवाब नहीं देते है।ऐसा करने पर कई एयर लाइंस ने उनकी हवाई यात्रा कर पर कुछ समय के लिए बैन लगा दिया था।एक बार विहिप ने उनका शो गुरुग्राम में रद्द करा दिया था तो उन्होंने विहिप को नाथूराम गोड़े की निंदा करने की चुनौती दी थी। एक बार उन्होंने पीएम मोदी का एडिटेड वीडिया वायरल कर दिया था।बाद में भाजपा के विरोध पर हटाना पड़ा था।एक बार उन्होंने सुप्रीम कोर्ट पर टिप्पणी कर फंस गए थे।
इस बार कुणाल कामरा ने यह जानते हुए भी महाराष्ट्र में शिवसेना टूट कर दो हो गई है और एक के नेता एकनाथ शिंदे हैं और दूसरे के नेता उध्दव ठाकरे हैं। शिवसेना को तोड़ने के लिए उध्दव ठाकरे एकनाथ शिंदे को गद्दार कहते हैं। ऐसे में महाराष्ट्र में महाराष्ट्र की राजनीति पर वीडियो कुणाल कामरा को नहीं बनाना था, बनाना था तो बिना नाम लिए ऐसी पैरोडी नहीं बनानी थी जिसे देख व सुनकर सौ में से सौ लोग यही कहेंगे कि यह वीडियो तो एकनाथ शिंदे के खिलाफ बनाया गया है। अगर कोई यह कहता है कि उध्दव ठाकरे की शिवसेना के कहने पर यह वीडियो बनाया गया है तो वह गलत नहीं सोचता है क्योंकि उध्दव गुट तो शिंदे से बहुत नाराज है क्योंकि असली शिवसेना तो उनकी ही शिवसेना मानी गई है, अदालत ने भी माना है और जनता ने भी चुनाव में माना है।
यह भी बहुत लोग मान सकते हैं कि कुणाल कामरा ऐसे कामेडियन हैं जो अपने मजाक के कारण विवादों से घिरते हैं और पूरे देश में विवाद के लिए उनकी चर्चा होती है यानी वह अक्सर विवादों के कारण चर्चा में रहते हैं । देश के चर्चित कामेडियन माने जाते हैं तो विवादों के कारण ही माने जाते है,उनको जब भी ऐसा लगता है कि ऐसा कहने या करने पर देश में विवाद हो सकता है और उसकी चर्चा हो सकती है तो वह वैसा जरूर करते हैं। यानी वह चर्चित होने के लिए ही विवादास्पद बाते कहते हैं। स्वाभाविक है कि इससे उनका नाम होता है और उनकी पूछपरख भी बढ़ती है और ज्यादा पैसा भी मिलता है। इस बार उन्होंने वीडियों में बिना नाम लिए महाराष्ट्र को पूर्व सीएम एकनाथ शिंदे का मजाक उड़ाया है।वही कहा है जो उनके लिए उध्दव ठाकरे कहते आए हैं और कहते रहते हैं।
इससे शिंदे की शिवसेना के नेता व कार्यकर्ता नाराज हो गए और मुंबई के जिस स्टूडियो में वह वीडियो बनाया गया था, उस स्टूडियो में तोड़फोड़ की। इसके साथ ही कामरा के खिलाफ शिवसैनिकों ने एफआईआर भी दर्ज कराई है और मांग की है कि कुणाल कामरा को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।शिवसेना टूटने व एकनाथ शिंदे की सरकार के समय भी शिवसेना ने ऐसा कुछ नहीं किया था कि लोगों को याद आता कि यह वही शिवसेना है जो हमेशा आक्रामक रहती है और हमला करने व मारपीट करने में यकीन करती है। एकनाथ शिंदे की शिवसेना शिवसेना तो थी, लेकिन एक अलग ही शिवसेना थी, बाला साहेब ठाकरे वाली शिवसेना नहीं थी। जिसके आए दिन हमलों से लोग आतंकित रहते थे, शिवसेना से डरते थे। एकनाथ की शिवसेना डराया नहीं, मारपीट नहीं की।
कुणाल कामरा ने शांत शिवसेना के नेता का अपमान कर उसे याद दिला दिया कि आप तो बाला साहेब की शिवसना हो, आप अपने नेता का अपमान कैसे सहन कर सकते हो और लंबे समय बाद शिंदे की शिवसेना ने वही किया मजबूर करने पर जो शिवसेना की पहचान रही है।उध्दव ठाकरे इस मामले में कुणाल कामरा का पक्ष ले रहे हैं कि उसने कुछ गलत नहीं किया है।सीएम फडनवीस ने कहा हैकि कुणाल कामरा ने एकनाथ शिंदे का अपमान करने का प्रयास किया है।यह गलत है, हम इसकीन निंदा करते हैं। ऐसी चीजों को सहन नहीं किया जा सकता। वहीं कुणाल कामरा ने विवाद को बनाए रखने के लिए कहा है कि वह माफी नहीं मांगेंगे।वह माफी तब मांगेंगे जब सुप्रीम कोर्ट कहेगा। यानी वह विवाद को लंबे समय तक बनाए रखना चाहते है। वह चाहते हैं कि कुणाल कामरा के नाम से खबरें बनती रहे, उनके नाम की चर्चा होती रहे।