देश-विदेश

पाकिस्‍तान, तुर्की... ब्रिक्‍स सदस्‍यता के लिए 34 देशों ने किया आवेदन, पक्ष में नहीं है भारत, चीन कनेक्‍शन जानें

मास्‍को: ब्रिक्‍स की सदस्‍यता के लिए पूरी दुनिया में एक होड़ सी शुरू हो गई है। रूस के कजान में होने वाले ब्रिक्‍स शिखर सम्‍मेलन से पहले 34 देशों ने इस संगठन की सदस्‍यता के लिए आवेदन कर दिया है। इन देशों में पाकिस्‍तान, तुर्की, सीरिया, फलस्‍तीन और म्‍यांमार जैसे देश शामिल हैं। बताया जा रहा है कि कजान में 22 से लेकर 24 अक्‍टूबर तक होने वाली बैठक में 10 नए सदस्‍यों और 10 पार्टनर को शामिल किया जा सकता है। इस पूरे मामले में महत्‍वपूर्ण बात यह है कि हिंसा प्रभावित सीरिया, म्‍यांमार और फलस्‍तीन भी इसके सदस्‍य बनना चाहते हैं। ब्रिक्‍स के संस्‍थापक सदस्‍यों में भारत, ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका हैं लेकिन इसमें कई नए सदस्‍यों को शामिल किया गया है। वहीं भारत इस संगठन के तत्‍काल और ज्‍यादा विस्‍तार के पक्ष में नहीं है लेकिन चीन अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए रूस का इस्‍तेमाल करके इसकी सदस्‍यता को बढ़ाना चाहता है।न्‍यू इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक कजान में होने वाली बैठक में आम सहमति बनने के बाद ही नए सदस्‍यों का ऐलान किया जाएगा। पीएम मोदी भी इस ब्रिक्‍स शिखर सम्‍मेलन में हिस्‍सा लेने जाने वाले हैं। यह पिछले 3 महीने में पीएम मोदी की दूसरी रूस यात्रा होगी। बताया जा रहा है कि इस बैठक में पीएम मोदी और ब्रिक्‍स के सदस्‍य देशों के नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक हो सकती है। कहा यह भी जा रहा है कि पीएम मोदी और चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग के बीच भी कई साल बाद मुलाकात हो सकती है।


ब्रिक्‍स के लिए क‍िन देशों ने किया आवेदन?

सूत्रों के मुताबिक जिन 34 देशों ने अप्‍लाई क‍िया है, उनमें अल्‍जीरिया, अजरबैजान, बहरीन, बांग्‍लादेश, बेलारूस, बोलिव‍िया, क्‍यूबा, चाड, इंडोनेशिया, कजाखस्‍तान, कुवैत, पाकिस्‍तान, कुवैत, मलेशिया, लाओस, म्‍यांमार, मोरक्‍को, नाइजीरिया, सेनेगल, दक्षिण सूडान, श्रीलंका, फलस्‍तीन, सीरिया, थाइलैंड, तुर्की, यूगांडा, वेनेजुएला, वियतनाम और जिंबाब्‍वे आदि देश शामिल हैं। इनमें कई ऐसे देश हैं जहां का चीन का बहुत ज्‍यादा प्रभाव है और वे अमेरिका के नेतृत्‍व वाले पश्चिमी देशों के गठजोड़ा का विरोध करते हैं।अभी ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई और सऊदी अरब ब्रिक्‍स के सदस्‍य देश हैं। माना जा रहा है कि कजान में होने वाली बैठक में ईरान के राष्‍ट्रपति मसूद पेजेशकिआन भी मौजूद रहेंगे। यह उनकी पहली रूस यात्रा हो सकती है। वहीं तुर्की के राष्‍ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान भी ब्रिक्‍स सम्‍मेलन में हिस्‍सा लेने पहुंच रहे हैं। वहीं रूस ने कहा है कि करीब 24 देशों के नेता कजान में जमा होने वाले हैं। व‍िश्‍लेषकों का कहना है कि चीन ब्रिक्‍स का इस्‍तेमाल अपने फायदे के लिए कर रहा है।

चीन की चाल को मात देंगे ये देश !

विश्‍लेषकों का कहना है कि चीन की कोशिश है कि पश्चिमी देशों के जी7 के खिलाफ ब्रिक्‍स को खड़ा किया जाए। वहीं रूस इस समय यूक्रेन युद्ध में फंसा हुआ है और चीन पर बुरी तरह से निर्भर है। इसी का फायदा चीन उठा रहा है। इजरायल के साथ युद्ध में फंसा ईरान भी चीन का साथ दे सकता है। उन्‍होंने कहा कि चीन भले ही कोशिश कर रहा है लेकिन यूएई, भारत और सऊदी अरब चीन के मंसूबे कामयाब नहीं होने देंगे। चीन चाहता है कि पाकिस्‍तान और तुर्की को भी शामिल किया जाए जिससे ब्रिक्‍स में उसका प्रभाव बढ़ जाए। भारत के पड़ोसी देश बांग्‍लादेश और श्रीलंका भी चाहते हैं कि ब्रिक्‍स की सदस्‍यता उन्‍हें मिले जहां चीन का काफी ज्‍यादा प्रभाव है। भारत का कहना है कि हाल ही में ब्रिक्‍स का एक विस्‍तार हुआ है और हमें थोड़ा रुककर फिर नए सदस्‍यों को शामिल करना चाहिए।
 

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