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भारत पर मेहरबान ट्रंप: ईरान से युद्ध के बीच अमेरिका ने रूसी तेल खरीद को दी छूट, इंडिया 30 दिन तक खरीद सकेगा रूसी कच्चा तेल

 अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग (US-Israel Iran War) का आज सातवां दिन है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया है। इसके कारण अंतरराष्ट्रीय मार्केट में क्रूड ऑयल के दाम में बारी बढ़ोतरी हुई है। ईरान जंग की वजह से पैदा हुए तेल संकट के बीच अमेरिका ने अहम फैसला लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर भारत पर मेहरबानी दिखाते हुए रूस से तेल खरीदने की छूट दी है। वाशिंगटन ने रूस को भारत को तेल बेचने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दी है।


बता दें कि भारत को मिडिल ईस्ट से बहुत सारा तेल आता है। देश में सिर्फ 25 दिन का कच्चा तेल स्टॉक है और 40 फीसदी तेल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरकर आता है। अगर यहां कोई दिक्कत हुई तो मुश्किल हो सकती है। लिहाजा अमेरिका ने यह राहत दी है। अमेरिकी सरकार ने साफ कहा, ‘हमने रूस के समुद्र में फंसे तेल की बिक्री भारत को जारी रखने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट जारी कर दी है।


इससे पहले अमेरिका ने यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद विभिन्न देशों को रूसी तेल नहीं खरीदने की धमकी दी थी। पश्चिमी देशों ने भी मॉस्को पर प्रतिबंध लगाए थे। हालांकि भारत रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदारों में से एक के रूप में उभरा था। ट्रंप की धमकियों के बावजूद भारत ने रूसी तेल खरीदना जारी रखा था। साथ ही साफ संदेश दिया था कि तेल कहां से खरीदना है, इसका फैसला भारत खुद करेगा।


भारत की ऑयल रिफाइनरी फिर से एक्टिवेट

अब भारत की रिफाइनरी कंपनियां फिर सक्रिय हो गई हैं। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और मंगलौर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड, ये सब ट्रेडर्स से बात कर रही हैं कि जल्दी से जल्दी रूसी तेल मिल जाए। सूत्रों के मुताबिक, इन कंपनियों ने पहले ही करीब 2 करोड़ बैरल रूसी तेल खरीद लिया है।


रूस के तेल टैंकर समुद्र में क्यों खड़े थे

दरअसल, रूस के तेल टैंकर समुद्र में इसलिए खड़े थे क्योंकि नए अमेरिकी प्रतिबंधों और भुगतान/बीमा की अनिश्चितता की वजह से उनका तेल तुरंत उतारा नहीं जा रहा था। यूएस ने रूसी तेल से जुड़ी कुछ शिपिंग कंपनियों और टैंकरों पर सख्त प्रतिबंध लगाए थे। इससे कई जहाजों के बीमा, भुगतान और पोर्ट एंट्री पर सवाल खड़े हो गए। भारत के रिफाइनर्स भी इंतजार करने लगे कि कहीं तेल खरीदना नियमों के खिलाफ तो नहीं होगा। इसलिए जहाजों को कुछ समय समुद्र में ही रोक दिया था।
 

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