दुर्ग में जेन-अल्फा का शिक्षकों की कमी और शौचालय न होने पर चक्काजाम
दुर्ग । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्वामी आत्मानंद स्कूलों की बदहाल व्यवस्था और मूलभूत सुविधाओं के अभाव को लेकर स्कूली बच्चों का गुस्सा फूट पड़ा है. शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के गृह जिले दुर्ग के दो अलग-अलग क्षेत्रों में विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई और प्राथमिक सुविधाओं की मांग के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर होना पड़ा.
पेंड्रावन और सेलूद के स्कूलों में हुए इन प्रदर्शनों ने क्षेत्र में शिक्षा विभाग के दावों की पोल खोलकर रख दी है.
पेंड्रावन में शिक्षकों के टोटे से नाराज बच्चों ने मुख्य मार्ग किया जाम
धमधा क्षेत्र के पेंड्रावन स्थित स्वामी आत्मानंद स्कूल में कक्षा 9वीं से 12वीं तक लगभग 400 विद्यार्थी नामांकित हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए केवल 3 शिक्षक और 1 प्रधानाध्यापक ही तैनात थे. छात्रों का तर्क है कि सुचारू पढ़ाई के लिए कम से कम 17 शिक्षकों की आवश्यकता है. शिक्षकों की कमी के चलते पाठ्यक्रम पूरा नहीं होने से नाराज छात्रों ने 21 अगस्त को खैरागढ़-धमधा मुख्य मार्ग पर विरोध दर्ज कराया था.
प्रशासनिक आश्वासन के बाद भी जब स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो 25 अगस्त को आक्रोशित छात्र-छात्राओं ने दोबारा मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया. प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ओपन स्कूल व्यवस्था को समाप्त किया, प्रधानाध्यापक को पद से हटाया और 3 नए शिक्षकों की नियुक्ति की.
इसके अलावा कॉमर्स विषय के एक और शिक्षक की जल्द व्यवस्था करने का भरोसा दिया गया है. हालांकि, छात्र अभी भी आर्ट्स और कॉमर्स के पूरे संकाय के लिए पर्याप्त शिक्षकों की मांग पर डटे हुए हैं.
सेलूद में 2 साल से टॉयलेट नहीं, छात्राओं ने पूछा- खुले में कहाँ जाएं?
दूसरी ओर, जिले के सेलूद स्थित स्वामी आत्मानंद स्कूल में सुविधाओं के घोर अभाव को लेकर कक्षा 6वीं से 8वीं के 203 छात्र-छात्राओं का सब्र टूट गया. पिछले दो वर्षों से शौचालय और बाउंड्रीवॉल न होने से परेशान बच्चों ने पहले तो स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला जड़ा और फिर दुर्ग-पाटन मार्ग पर एक घंटे तक यातायात बाधित रखा.
छात्रा किंजल कुर्रे सहित अन्य विद्यार्थियों ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि शौचालय न होने से विशेषकर छात्राओं को भारी शर्मिंदगी और परेशानी का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा बाउंड्रीवॉल न होने के कारण असामाजिक तत्व परिसर में खड़ी साइकिलों को नुकसान पहुंचाते हैं.
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर वैकल्पिक व्यवस्था के लिए प्रिंसिपल को राशि जारी की और ऑनलाइन प्रस्ताव दर्ज करने का निर्देश दिया.
व्यवस्था में सुधार की गुहार
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि वे अपनी पढ़ाई छोड़कर सड़कों पर बैठना नहीं चाहते, लेकिन जब बार-बार शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती, तो आंदोलन ही एकमात्र रास्ता बचता है. छात्रों ने साफ किया कि उनका यह कदम किसी राजनीति से प्रेरित नहीं है, बल्कि यह उनके भविष्य और बुनियादी अधिकारों से जुड़ा मामला है.
क्या दुर्ग (छत्तीसगढ़) के इन बच्चों को 'जेन अल्फा' कहा जा सकता है?
दुर्ग के पेंड्रावन स्कूल में पढ़ने वाले 9वीं से 12वीं तक के बच्चों का जन्म लगभग 2008 से 2012 के बीच हुआ होगा (यह जनरेशन जेड और जेन अल्फा का संधि-काल है). वहीं सेलूद स्कूल में 6वीं से 8वीं तक पढ़ने वाले 203 बच्चे (जिनकी उम्र लगभग 11 से 14 वर्ष के बीच है) स्पष्ट रूप से जेन अल्फा के दायरे में आते हैं.
दुर्ग के पेंड्रावन और सेलूद के स्कूली बच्चों द्वारा शिक्षकों की कमी, टॉयलेट और बाउंड्रीवॉल जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए चक्काजाम और प्रदर्शन करना यह दर्शाता है कि आज की यह पीढ़ी (जेन अल्फा) अपने अधिकारों, शिक्षा और भविष्य को लेकर काफी जागरूक और मुखर है.
जेन अल्फा (Gen Alpha या Generation Alpha) उन लोगों का पीढ़ीगत समूह (Generation) है जिनका जन्म वर्ष 2010 से 2024 (या लगभग 2025 तक) के बीच हुआ है या हो रहा है.
इस पीढ़ी का नामकरण समाजशास्त्री मार्क मैक्रिंडल (Mark McCrindle) द्वारा किया गया था. यह जनरेशन जेड (Gen Z) के बाद आने वाली पीढ़ी है.