हवन के लिए आम की लकड़ी ही क्यों होती है जरूरी? जानिए धार्मिक और वैज्ञानिक कारण
24-Jan-2026
शक्ति की भक्ति का पर्व गुप्त नवरात्र 19 जनवरी से शुरू हो चुका है और 27 जनवरी को समाप्त होगा. साधक इस दौरान साधना, मंत्र शक्ति और मनोकामना पूर्ति के लिए दस महाविद्याओं का आवाहन करते हैं. माघ माह की गुप्त नवरात्र में मां दुर्गा की साधना को सफल बनाने के लिए नियमों का पालन करना जरूरी माना गया है.
गुप्त नवरात्र के अंतिम दिन देवी की विधि-विधान से पूजा करने के बाद हवन और आरती जरूर करनी चाहिए. बता दें कि इस साल गुप्त नवरात्र का व्रत मंगलवार को समाप्त हो रहा है. इसलिए पूजन सामग्री को उसी दिन जल में विसर्जित न करें, बल्कि अगले दिन बुधवार को गड्ढे में दबा दें.
नवरात्र व्रत को लेकर मान्यता है कि मां की आराधना करते हुए हवन के बाद ही व्रत खोलना चाहिए. हवन में मुख्य रूप से आम की लकड़ी का उपयोग किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि माता के हवन में आम की लकड़ी का ही प्रयोग क्यों किया जाता है?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार प्राचीन काल से ही हवन की परंपरा चली आ रही है. किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के बाद हवन किया जाता है. गृह प्रवेश के समय भी शुभता के लिए हवन किया जाता है. इसके अलावा नवग्रह दोष से मुक्ति के लिए भी हवन का महत्व बताया गया है. विवाह के सात फेरे भी हवन की अग्नि को साक्षी मानकर लिए जाते हैं. मान्यता है कि हवन करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और चारों ओर का वातावरण शुद्ध होता है.
वैज्ञानिक शोध के अनुसार आम की लकड़ी से बहुत कम कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है. यह लकड़ी जल्दी जलने वाली होती है और कम हवा में भी आसानी से जल जाती है. शोध में यह भी बताया गया है कि आम की लकड़ी जलाने पर फॉर्मिक एल्डिहाइड नाम की गैस निकलती है, जो हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करती है. इससे वातावरण शुद्ध होता है. हवन के धुएं से टाइफाइड और सांस से जुड़ी बीमारियों में भी राहत मिलती है.