सामान्य ज्ञान

मोहन भागवत बोले-हमारे पूर्वज धर्म का सत्य जानते थे:मर्यादा, अनुशासन और संतुलन राष्ट्र प्रगति की नींव, दुनिया के देश स्वार्थ के साथ चल रहे

दुनिया के देश आजकल अपने स्वार्थ के साथ चल रहे हैं। हर कोई चाहता है कि मेरा स्वार्थ सिद्ध होना चाहिए, मेरा हित होना चाहिए, मैं बढ़ता रहूं, बाकि लोगों का क्या होगा वो बाद का सवाल है। सभी इसी सोच के साथ चल रहे हैं। लेकिन भारत देश और भारत के लोग कभी भी इस सोच के साथ नहीं चले, न ही चल रहे हैं और न ही चलेंगे, क्योंकि वो धर्म जानते हैं। यह ये बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने डीडवाना-कुचामन जिले के छोटी खाटू कस्बे में जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के 162वें मर्यादा महोत्सव में कहीं। इस दौरान भागवत ने कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। 'सब लोग दिखते अलग-अलग, लेकिन मूल में सब एक' मर्यादा महोत्सव में सरसंघचालक ने कहा कि एक महत्वपूर्ण बात हमारे पूर्वजों को पता चली, बाकि दुनिया को पता नहीं चली... वो बात यह है कि हम सब लोग दिखते अलग-अलग हैं, विश्व में सर्व बातें दिखती अलग-अलग हैं, लेकिन मूल में सब एक है। 'धर्म के पीछे का सत्य हमारे पूर्वज जानते थे' भागवत ने कहा कि धर्म के पीछे जो सत्य है वो बाकि दुनिया नहीं जानती, हमारे पूर्वज जानते थे। इसलिए सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य आदि कई बातें हमारे यहां हैं,बाहर नहीं है। पुस्तकें सबने पढ़ी है। हमारे संतों की पुस्तकें भी उन्होंने पढ़ी है, उनकी भी हम पढ़ते हैं। परंतु प्रत्यक्ष जानना, अनुभव... यह केवल हमारे यहां हुआ, वहां नहीं हुआ। भागवत ने मर्यादा, अनुशासन और संतुलन को राष्ट्र प्रगति की मजबूत नींव बताया हैं। 'धर्मग्रंथों के संदेश से जीवन की दिशा बदली जा सकती' कार्यक्रम में सरसंघचालक भागवत और जैन धर्मगुरु आचार्य महाश्रमण विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस दौरान भागवत ने आचार्य महाश्रमण से आशीर्वाद लिया। आचार्य महाश्रमण ने अपने संबोधन में सत्य की खोज, अहिंसा और करुणा के महत्व गिनाए। उन्होंने कहा कि संतों की वाणी और धर्मग्रंथों के संदेश से जीवन की दिशा बदली जा सकती है। जब हम सबको अपना मानकर चलते हैं, तभी मर्यादा और अनुशासन जीवन में उतरता है। उन्होंने कहा कि अहिंसा जीवन का मूल सिद्धांत है, लेकिन यदि देश और समाज की रक्षा के लिए मजबूरी उत्पन्न हो जाए, तो शस्त्र उठाना भी आवश्यक हो सकता है। धार्मिक, आध्यात्मिक रहा माहौल महोत्सव में देशभर से आए तेरापंथ समाज के श्रद्धालु, प्रवासी सदस्य और संघ कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए। इस दौरान छोटी खाटू कस्बा धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण से सराबोर नजर आया। कार्यक्रम के बाद भागवत ने संघ कार्यकर्ताओं के एकत्रीकरण में भी भाग लिया। मंच पर अखिल भारतीय सह प्रचारक प्रमुख अरुण जैन, क्षेत्र कार्यवाह जसवंत खत्री, क्षेत्र प्रचारक निंबाराम सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। अंत में आयोजन समिति की ओर से संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत का स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया।

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