छत्तीसगढ़ /

संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए माताओं ने रखा हलषष्ठी व्रत

छत्तीसगढ़ संवाददाता बचेली, 2 सितंबर।संतान की दीर्घायु, आरोग्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ लौह नगरी बचेली में बुधवार, 2 सितंबर को महिलाओं ने आस्था और श्रद्धा के साथ हलषष्ठी (कमरछठ) व्रत रखा। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पर मनाए जाने वाले इस पारंपरिक पर्व पर नगर के विभिन्न स्थानों में महिलाओं ने एकत्र होकर विधि-विधान से भगवान शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना की, सगरी की स्थापना की तथा व्रत कथा का श्रवण किया। नगर के गायत्री सत्संग भवन परिसर, एफओएच कॉलोनी स्थित कुंदेश्वर महादेव समिति, गुरुघासीदास चौक टाइप वन गणेश मंडप, बैंक कॉलोनी सहित विभिन्न स्थानों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की। पूजा स्थलों पर सुबह से ही व्रतधारी महिलाओं की चहल-पहल बनी रही और पूरे दिन धार्मिक माहौल देखने को मिला। परंपरा के अनुसार महिलाओं ने गड्ढे बनाकर उसमें भैंस के दूध से निर्मित घी और दही अर्पित कर पूजा की। इसके साथ ही सगरी की स्थापना कर भगवान शिव-पार्वती का पूजन किया गया और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हलषष्ठी व्रत कथा का वाचन एवं श्रवण किया गया। महिलाओं ने अपने बच्चों के स्वस्थ, सुखी और दीर्घायु जीवन की कामना की। हलषष्ठी पर्व की परंपराओं का पालन करते हुए व्रतधारियों ने बिना हल चले उगे अन्न का उपयोग किया। इस दिन पसहर चावल सहित पारंपरिक प्रसाद का विशेष महत्व रहा। मान्यता के अनुसार गाय के दूध और उससे बने पदार्थों का सेवन वर्जित माना जाता है, जबकि भैंस के दूध से बने घी और दही का पूजा में विशेष महत्व होता है। बचेली में तालाबों की कमी के कारण महिलाओं ने परंपरागत तालाब पूजा के स्थान पर निर्धारित पूजा स्थलों पर गड्ढों और सगरी की स्थापना कर धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए। पूजा के पश्चात व्रत कथा का श्रवण किया गया और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। छत्तीसगढ़ की लोक आस्था और संस्कृति से जुड़ा हलषष्ठी पर्व महिलाओं की मातृत्व भावना, संतान के प्रति प्रेम और पारिवारिक सुख-समृद्धि की कामना का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से यह व्रत करने पर संतान को दीर्घायु, आरोग्य और सुखी जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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