दो महीने से बंद एनीकट, 50 गांवों के ग्रामीण 60 किमी घूमकर आने-जाने को मजबूर
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08 Sep 2026
छत्तीसगढ़ संवाददाता
बलौदाबाजार, 8 सितंबर। विकासखंड पलारी के ग्राम अमेठी स्थित महानदी घाट पर सेतु निर्माण की मांग वर्षों से उठ रही है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि अब तक उन्हें केवल घोषणाएं ही सुनने को मिली हैं। इस वर्ष लगातार करीब दो महीने से अमेठी एनिकट के बंद रहने से क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों की आवागमन की समस्या और गंभीर हो गई है।
ग्रामीणों के अनुसार अमेठी घाट पर बना पुराना एनिकट वर्तमान में आवागमन के लिए बंद है। इसके चलते पलारी विकासखंड के करीब 25 गांव और कसडोल विकासखंड के करीब 25 गांव, यानी लगभग 50 गांवों के लोगों को आवागमन के लिए लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
स्थिति यह है कि अमेठी घाट से सीधे आवागमन नहीं होने के कारण ग्रामीणों को करीब 60 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाकर कसडोल, फिर लवन और वहां से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी तय कर रोहांसी, धमनी एवं आसपास के गांवों तक पहुंचना पड़ रहा है। इससे ग्रामीणों का समय और धन दोनों खर्च हो रहे हैं। किसानों, विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और मरीजों को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
हर साल सामने आती है समस्या
ग्रामीणों का कहना है कि महानदी में जलस्तर बढऩे के दौरान अमेठी घाट का एनिकट आवागमन के लिए जोखिमपूर्ण अथवा बंद हो जाता है। ऐसे में स्थायी समाधान के लिए यहां उच्चस्तरीय सेतु निर्माण की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब क्षेत्र की बड़ी आबादी इस मार्ग पर निर्भर है तो सेतु निर्माण की दिशा में ठोस पहल कब होगी?
क्षेत्र के लोगों ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अमेठी में सेतु निर्माण की पहल करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि आने वाले वर्ष 2027 में इस महत्वपूर्ण मांग को प्राथमिकता देते हुए सेतु निर्माण की दिशा में ठोस कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए, ताकि अमेठी घाट की समस्या का स्थायी समाधान हो सके।
ग्रामीणों का कहना है कि अमेठी में सेतु केवल एक गांव की जरूरत नहीं है, बल्कि यह पलारी और कसडोल क्षेत्र के करीब 50 गांवों के बीच आवागमन की महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है। अब ग्रामीण घोषणाओं के बजाय स्वीकृति, बजट और निर्माण कार्य शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।