सामान्य ज्ञान

भगवान श्रीकृष्ण और गायों की पूजा का पर्व गोपाष्टमी:बाल गोपाल ने कार्तिक शुक्ल अष्टमी से शुरू किया गायों को चराने का काम, जानिए गोपाष्टमी से परंपराएं

कार्तिक महीने के शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि को लेकर मतभेद होने से गोपाष्टमी पर्व देश में कुछ जगहों पर आज और कुछ जगह कल मनेगा। 29 और 30 अक्टूबर, दोनों दिन गोपाष्टमी मनेगी। कार्तिक शुक्ल अष्टमी पर गौ पूजा का ये पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि द्वापर युग में बाल कृष्ण ने इसी तिथि से ब्रज क्षेत्र में गौचारण यानी गायों को चराने का काम शुरू किया था। गोपाष्टमी से जुड़ी परंपराएं : उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, गोपाष्टमी गौ माता और बाल गोपाल की पूजा करने का पर्व है। इस दिन भक्त गौशाला में गाय और बछड़े की पूजा करते हैं। गायों को स्नान कराते हैं, सजाते हैं और चारा खिलाते हैं। गौमाता की परिक्रमा की जाती है। इस दिन ग्वालों को दान देना और उन्हें नए वस्त्र भेंट करना चाहिए। आमतौर पर ये पर्व किसानों के लिए एक महापर्व की तरह होता है। किसान अपनी गाय, बछड़े और बैलों की विशेष पूजा करते हैं, उन्हें सजाते हैं। ऐसे कर सकते हैं गाय और गाय के बछड़े की पूजा गाय और बछड़े को स्नान कराना चाहिए। उनके सींगों को हल्दी, कुमकुम और फूलों से सजाएं। गाय और बछड़े को वस्त्र, चुनरी चढ़ाएं, इनके पैरों में घुंघरू बांधें। चावल चढ़ाएं। धूप, दीप जलाएं आरती करें। गौमाता को हरा चारा, हरा मटर, गुड़, गेहूं और रोटी और खीर खिलाएं। गाय की परिक्रमा करें। गौ माता से जुड़ी मान्यताएं गायों के चरणों की रज माथे पर लगाने से सौभाग्य में वृद्धि होती है। इस दिन गौशाला में चारा, अनाज, धन, वस्त्र आदि का दान करना चाहिए। गाय में तैंतीस करोड़ देवी-देवताओं का वास है। इसलिए गौ-पूजन करने से सभी देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और सभी पापों का नाश होता है। जहां गौ माता निवास करती हैं, वहां पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। गोपाष्टमी पर गौ सेवा करने से परिवार में सुख-शांति, स्वास्थ्य, लाभ और दीर्घायु की प्राप्ति होती है। ये पर्व पशुओं के संरक्षण, दया और सेवा करने का संदेश देता है। गोपाष्टमी की कथाएं गोपाष्टमी से जुड़ी दो कथाएं सबसे ज्यादा प्रचलित हैं- अब जानिए श्रीकृष्ण की पूजा विधि...

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