सामान्य ज्ञान

स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र:जीवन का सबसे बड़ा शत्रु आलस है, ये हमें आगे नहीं बढ़ने देता, इससे बचें और आगे बढ़ते रहें

हमेशा जीवंत रहें, इसका अर्थ है कि गतिमान और विचारशील रहें। निरुद्योगी न रहें। जीवन का सबसे बड़ा शत्रु आलस्य है, ये हमें आगे नहीं बढ़ने देता, इसलिए गतिमान रहें। चरैवेति-चरैवेति यानी चलते रहें, चलते रहें। रुक जाना, ठहर जाना, जीवन नहीं है। जो बैठ गया है, उसका जीवन भी बैठ गया है यानी उसका भाग्य बैठ गया है। जो व्यक्ति निरंतर आगे बढ़ते रहता है, उसका साथ भाग्य भी देता है। आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र में जानिए जीवन में सिद्धि कैसे मिलती है? आज का जीवन सूत्र जानने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें।

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