सामान्य ज्ञान

1 दिसंबर को गीता जयंती:मोक्षदा एकादशी पर भगवान विष्णु का पूजन और गीता का करें पाठ, जानिए व्रत से जुड़ी मान्यताएं

सोमवार, 1 दिसंबर को मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी है, इसे मोक्षदा एकादशी कहते हैं। मान्यता है कि द्वापर युग में इसी तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। इस दिन भगवान विष्णु के लिए व्रत-उपवास, पूजा और गीता का पाठ करने की परंपरा है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, गीता का जन्म स्वयं श्रीभगवान के मुख से हुआ है, इसी वजह से इस ग्रंथ का महत्व काफी अधिक है और इसी कारण गीता की जयंती भी मनाई जाती है। मोक्षदा एकादशी का शाब्दिक अर्थ है मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी। इस दिन किए गए व्रत से भक्त को भगवान विष्णु की कृपा मिलती है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। मोक्ष यानी मृत्यु के बाद आत्मा को फिर से जन्म नहीं होता है, आत्मा भगवान में विलीन हो जाती है। मान्यता है कि मोक्षदा एकादशी व्रत से जाने-अनजाने में किए गए सभी पापों का नाश होता है। ये व्रत घर-परिवार के पितर देवताओं को भी मोक्ष देने वाला माना जाता है। इस दिन व्रत करके इसका पुण्य पितरों को अर्पित करने से उन्हें नरक से मुक्ति मिल सकती है। इस तिथि पर गीता का पाठ और श्रवण करने से ज्ञान, शांति और मार्गदर्शन मिलता है। ऐसे कर सकते हैं भगवान विष्णु की पूजा पूजा-पाठ, व्रत-उपवास के साथ करें गीता का पाठ इस तिथि पर श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करने का विशेष महत्व है। इस दिन अपने समय के अनुसार गीता के कुछ अध्यायों का या कुछ प्रसंगों का पाठ कर सकते हैं। भगवान श्रीकृष्ण की छोटी-छोटी कथाएं पढ़-सुन सकते हैं। कथाओं की सीख को जीवन में उतारने का संकल्प लेना चाहिए।

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